प्र1.
क्या होगा यदि… यदि मनुष्य भी कुत्तों की तरह पराश्रव्य तरंगों को पहचान सकते तो इसके क्या लाभ और हानियाँ होतीं?
उत्तर
हमें संसार की बहुत-सी अतिरिक्त जानकारी मिल जाती, परंतु साथ ही हम ऐसे शोर से घिर जाते जिसका आज हमें पता तक नहीं चलता।
| लाभ | हानियाँ |
|---|---|
| चमगादड़ों और डॉल्फिनों का शिकार करना सुनाई देता, और जंतुओं का वह संवाद भी जो आज हमारे लिए मौन है। | पराश्रव्य कीट-भगाने वाले यंत्रों, कुछ मशीनों, वाहनों के पार्किंग संवेदकों और सफ़ाई उपकरणों का निरंतर शोर। |
| चिकित्सक या तकनीशियन धातु खंड के भीतर के दोष या अवरुद्ध पाइप को यंत्र के बिना, सीधे सुनकर पहचान लेते। | पराश्रव्य वेल्डिंग और औद्योगिक सफ़ाई संयंत्र असहनीय कार्यस्थल बन जाते और उन्हें भारी परिरक्षण चाहिए होता। |
| पराश्रव्य दूरी संवेदक, सुरक्षा चेतावनियाँ और परास मापक कान से ही जाँचे जा सकते। | समान आयाम पर उच्च आवृत्ति की ध्वनि अधिक ऊर्जा वहन करती है, अतः लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से श्रवण क्षति तेज़ी से हो सकती। |
| हमारी अपनी प्रतिध्वनि-क्षमता बेहतर होती: कम तरंगदैर्घ्य छोटी वस्तुओं से परावर्तित होती है, अतः अंधेरे में छोटी बाधाओं का भी अनुमान लग जाता। | वाणी और संगीत एक स्थायी 'सर्र-सर्र' के नीचे दब जाते, जिससे ध्यान लगाना और बातचीत करना कठिन हो जाता। |
पराश्रव्य तरंगें स्थान निर्धारण में इतनी उपयोगी क्यों हैं: वायु में 40 kHz पर λ = 344 m s⁻¹ ÷ 40 000 s⁻¹ ≈ 0.0086 m, अर्थात एक सेंटीमीटर से भी कम। कोई तरंग तभी स्पष्ट रूप से परावर्तित होती है जब वस्तु उसके तरंगदैर्घ्य से बहुत छोटी न हो, अतः पराश्रव्य तरंगें उन छोटे लक्ष्यों से भी साफ़ लौट आती हैं जिनके चारों ओर से सामान्य ध्वनि निकल जाती। यही कारण है कि ये शिशु के अंगों का प्रतिबिंब बना सकती हैं, गुर्दे की पथरी तोड़ सकती हैं और धातु खंड के भीतर की दरार खोज सकती हैं।
संकेत: जब कोई प्रश्न लाभ और हानियाँ दोनों माँगे तो केवल राय की सूची नहीं, प्रत्येक के पीछे का भौतिक कारण दीजिए। यहाँ दोनों पक्ष एक ही तथ्य से निकलते हैं — कम तरंगदैर्घ्य और अधिक ऊर्जा।