कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 13 क्रियाकलाप 13.1 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
चित्र 13.1 में दर्शाए गए पृथ्वी के अभिलक्षणों का अवलोकन कीजिए। भूमंडल, जलमंडल, हिममंडल, वायुमंडल और जैवमंडल को निरूपित करने वाले एक उदाहरण को पहचानें और उन पर घेरा बनाएँ।
उत्तर

चित्र 13.1 में एक ऊँची पर्वतीय घाटी दिखाई गई है — उसमें एक झील है, पीछे बर्फ से ढकी पर्वत शृंखला है, और जल के किनारे उगी घास पर एक गड़रिया अपनी भेड़ें चरा रहा है। इसी एक चित्र में पाँचों मंडल उपस्थित हैं:

मंडलचित्र 13.1 में किस पर घेरा बनाएँक्यों
भूमंडलघाटी के तल और पर्वतीय ढलानों की नंगी चट्टानें तथा पत्थरठोस चट्टानें, मृदा और भू-आकृतियाँ
जलमंडलझीलसतह पर उपस्थित द्रव जल
हिममंडलपर्वतों की चोटियों पर जमी हिम और बर्फजल का ठोस रूप
वायुमंडलघाटी के ऊपर का आकाश और बादलपृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बँधा वायु का आवरण
जैवमंडलभेड़ें, गड़रिया और घाससजीव और उनके पर्यावास
स्वयं जाँचिए: यह चित्र इसीलिए चुना गया है कि इसमें पाँचों मंडल एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं। हिम चट्टान पर टिकी है, उसका पिघला जल झील भरता है, झील का जल वाष्पित होकर वायु में जाता है, और घास — जिसे मृदा, जल और वायु तीनों चाहिए — भेड़ों का भोजन बनती है। यही अतिव्यापन इस क्रियाकलाप का उद्देश्य है।
प्र2.
हिम (cryosphere) अंतत: झील (hydrosphere) का भाग किस प्रकार बनती है?
उत्तर

पिघलकर। वसंत और ग्रीष्म में जब वायु और भूमि गर्म होती है, तो हिम और हिमानी की बर्फ ऊष्मा अवशोषित करके ठोस से द्रव अवस्था में बदल जाती है, और यह पिघला जल धाराओं के रूप में ढलान से उतरकर झील में पहुँचता है।

हिम / बर्फ (ठोस, हिममंडल)
+ सौर विकिरण और गर्म वायु से प्राप्त ऊष्मा
→ 0 °C पर गलन
→ पिघला जल ढलान से नीचे बहता है
→ धाराएँ → झील (द्रव, जलमंडल)
यह क्यों होता है: हिम और झील का जल एक ही पदार्थ हैं — केवल अवस्था भिन्न है। गलन के लिए ऊर्जा चाहिए, और वह ऊर्जा सूर्य से आती है। हिम की सतह का ताप 0 °C तक पहुँच जाने के बाद आगे मिलने वाली ऊष्मा ताप बढ़ाने में नहीं, बल्कि बर्फ के क्रिस्टल के बंधन तोड़ने (गलन की गुप्त ऊष्मा) में लगती है, और ठोस द्रव में बदल जाता है। इसके आगे का काम गुरुत्व करता है — जल ढलान से बहकर घाटी के सबसे निचले भाग, अर्थात् झील तक पहुँच जाता है।
संकेत: हिम का थोड़ा भाग द्रव अवस्था से गुज़रता ही नहीं — वह पर्वतों की शुष्क वायु में सीधे ऊर्ध्वपातन द्वारा जलवाष्प बन जाता है। वह जल वायुमंडल में जाकर कहीं और वर्षण के रूप में लौटता है।
प्र3.
यदि कुछ वर्षों तक शीतकाल में हिमपात कम हो जाए तो इससे झील के जल स्तर और भेड़ों के लिए उपलब्ध घास पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर

ग्रीष्मकाल में झील का जल स्तर घट जाएगा और जल कम मिलने से घास कम उगेगी — अर्थात् भेड़ों के लिए चारा कम हो जाएगा।

शीतकाल में कम हिमपात → हिम और बर्फ का भंडार छोटा
छोटा भंडार → ग्रीष्म में कम पिघला जल
कम पिघला जल → झील का जल स्तर गिरता है
नीची झील और सूखी मृदा → घास की वृद्धि कमज़ोर
कम घास → भेड़ों के लिए कम भोजन
यह क्यों होता है: हिमपात एक प्राकृतिक जलाशय है। वह शीतकाल के वर्षण को ठोस रूप में एकत्र करता है और ग्रीष्म भर धीरे-धीरे द्रव रूप में छोड़ता रहता है — ठीक उसी समय जब वर्षा नहीं होती और घास को जल की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। शीत ऋतु की जमा राशि घटेगी तो ग्रीष्म की निकासी भी घटेगी। अध्याय भी यही कहता है — "शीतकाल में हिमपात कम होता है तो ग्रीष्मकाल में झील का जल स्तर घट जाता है। परिणामस्वरूप मैदानों में घास की वृद्धि के लिए जल कम उपलब्ध हो पाता है।"
एक कदम और आगे: कम भेड़ें चराई जा सकेंगी, इसलिए गड़रिये की आय घटेगी। हिममंडल में आरंभ हुआ परिवर्तन एक मानव परिवार तक पहुँच गया — इसीलिए पृथ्वी के मंडलों का अध्ययन एक साथ करना आवश्यक है।
प्र4.
अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए और लिखिए कि ये सभी मंडल परस्पर किस प्रकार संबंधित हैं और किसी एक मंडल में विक्षोभ अन्य मंडलों में किस प्रकार का परिवर्तन ला सकता है।
उत्तर

पाँचों मंडल दो चीज़ों से जुड़े हैं जिनका चलना कभी नहीं रुकता — ऊर्जा (मुख्यत: सूर्य से) और द्रव्य (जल, कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन तथा खनिज)। चूँकि वे एक ही ऊर्जा और एक ही द्रव्य को साझा करते हैं, इसलिए किसी एक मंडल पर पड़ा दबाव दूसरों में प्रकट होकर ही रहता है।

ऊर्जा और द्रव्य वायुमंडल जलमंडल हिममंडल जैवमंडल भूमंडल
पाँचों मंडल अलग-अलग परतें नहीं हैं — वे अतिव्यापी हैं और प्रत्येक रेखा के साथ ऊर्जा तथा द्रव्य का आदान-प्रदान करते हैं। इसीलिए विक्षोभ एक से दूसरे तक यात्रा करता है।
विक्षोभकिस मंडल में आरंभआगे कहाँ प्रकट होता है
शीतकाल में कम हिमपातहिममंडलझील का स्तर गिरना (जलमंडल) → घास कम उगना → भेड़ों को चारा कम (जैवमंडल)
अरब सागर का गर्म होनाजलमंडलअधिक वाष्पीकरण → अनिश्चित मानसून (वायुमंडल) → बाढ़ और सूखा → फसल हानि (जैवमंडल)
ईंधन जलाने से अतिरिक्त CO2वायुमंडलतापन से हिमानियों का पिघलना (हिममंडल) → समुद्र स्तर बढ़ना (जलमंडल) → तटीय पर्यावास की हानि (जैवमंडल)
वनोन्मूलनजैवमंडलवाष्पोत्सर्जन घटना (वायुमंडल), अपवाह और अपरदन बढ़ना (भूमंडल), नदियों में गाद (जलमंडल)
मूल कारण: पृथ्वी द्रव्य के लिए एक बंद तंत्र है — बाहर से न जल आता है, न कार्बन, न नाइट्रोजन — किंतु ऊर्जा के लिए एक खुला तंत्र है, जो सूर्य से आती है और अवरक्त विकिरण के रूप में लौट जाती है। चूँकि द्रव्य का यही सीमित भंडार पाँचों मंडल साझा करते हैं, इसलिए एक मंडल से द्रव्य निकालने का अर्थ है दूसरे में उसकी मात्रा बदल जाना। अध्याय इसी को "एक सूक्ष्म संतुलन" कहता है।
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