कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 13 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
वैश्विक तापमान में वृद्धि से महासागरों में घुली CO2 का संतुलन बिगड़ जाता है। इसका समुद्री जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर

समुद्री जीवन पर दो ओर से एक साथ आघात होता है — समुद्र अधिक अम्लीय हो जाता है, जिससे खोल और प्रवाल पर आक्रमण होता है; और गर्म जल कम घुली ऑक्सीजन तथा कम घुली CO2 धारण कर पाता है, जिससे मछलियाँ संकट में आती हैं और महासागर का कार्बन भंडार कमज़ोर पड़ता है।

वैश्विक ताप में वृद्धि
(क) वायु में अधिक CO2 → अधिक घुलती है → कार्बोनिक अम्ल → महासागरीय अम्लीकरण
    → प्लवक, शंबुक और प्रवाल के कार्बोनेट खोल घुलते हैं / ठीक से बनते ही नहीं
(ख) गर्म जल में गैस कम घुलती है → घुली O2 कम → मछलियों को श्वसन में कठिनाई
(ग) गर्म जल कम CO2 अवशोषित करता है → कार्बन अवशोषक कमज़ोर → वायु में और अधिक CO2 शेष
गैसें ऐसा व्यवहार क्यों करती हैं: जल में किसी गैस की विलेयता जल के गर्म होने पर घटती है — इसी कारण गर्म शीतल पेय ठंडे पेय की तुलना में जल्दी फीका (गैस-रहित) हो जाता है। इसलिए तापन दो विपरीत-सी दिखने वाली बातें करता है: वायुमंडल में CO2 बहुत अधिक होने के कारण वह और अधिक CO2 जल में धकेलता है, फिर भी गर्म समुद्री जल का प्रत्येक लीटर पहले से कम गैस — जिसमें मछलियों के लिए आवश्यक ऑक्सीजन भी सम्मिलित है — धारण कर पाता है। अध्याय दोनों पक्ष कहता है: अतिरिक्त CO2 से "महासागरों में उनका अवशोषण बढ़ने से समुद्री जल अधिक अम्लीय हो जाता है", और "गर्म महासागरीय जल, महासागर की CO2 के अवशोषण की क्षमता को घटा कर उनकी प्रभावी कार्बन भंडारण की क्षमता को कम कर देता है।"
जीव-समूहउन पर क्या बीतती है
पादप प्लवकप्रत्येक समुद्री आहार शृंखला का आधार और ऑक्सीजन का विशाल स्रोत — यहाँ हानि होने पर ऊपर का सारा जीवन भूखा रह जाता है
खोल बनाने वाले जीव (शंबुक, कुछ प्लवक)अम्लीय जल में कैल्सियम कार्बोनेट के खोल पतले पड़ जाते हैं और बनाने कठिन हो जाते हैं
प्रवाल भित्तियाँगर्म जल में विरंजित होती हैं और अम्लीय जल में घुलती हैं; भित्ति की मछलियाँ अपना पर्यावास खो देती हैं
मछलियाँ और तटीय मत्स्य संसाधनघुली ऑक्सीजन कम, भोजन कम, प्रवास-मार्ग बदलते हुए — पकड़ घटती है
मात्रा की जाँच: अध्याय का जिज्ञासा-सूत्र बताता है कि यह भंडार क्यों इतना महत्त्वपूर्ण है — "वैश्विक कार्बन की कुल मात्रा में से लगभग 71 प्रतिशत कार्बन महासागरों में पाया जाता है", जबकि वायुमंडल में केवल लगभग 1 प्रतिशत है। इसलिए महासागर के रसायन में थोड़ा-सा परिवर्तन भी कार्बन की बहुत बड़ी मात्रा को हिला देता है।
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