प्र1.
यदि जैव-भूरासायनिक चक्र बाधित हो जाए अथवा रुक जाए तो पृथ्वी पर पादपों और जंतुओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
जीवन समाप्त हो जाएगा, क्योंकि पृथ्वी के पास द्रव्य की कोई बाहरी आपूर्ति नहीं है। कोई पादप या जंतु जल, कार्बन, नाइट्रोजन या ऑक्सीजन का जो भी परमाणु प्रयोग करता है, वह पहले किसी और जीव द्वारा प्रयोग किया जा चुका है। चक्रण रुका तो आपूर्ति समाप्त।
चक्र-दर-चक्र क्या होगा:
- जल चक्र रुका। न वाष्पन, न संघनन, न वर्षा। नदियाँ, झीलें और मृदा की नमी सूख जाएँगी। पादप प्रकाश संश्लेषण के लिए जल नहीं खींच पाएँगे और न ही खनिजों का परिवहन कर पाएँगे; जंतुओं को पीने को कुछ नहीं मिलेगा। स्थलीय जीवन कुछ ही दिनों-सप्ताहों में समाप्त हो जाएगा।
- कार्बन चक्र रुका। पादप प्रकाश संश्लेषण के लिए वायु से CO2 लेते रहेंगे, परंतु अपघटन और श्वसन उसे लौटाएँगे नहीं। वायुमंडल की CO2 समाप्त हो जाएगी, प्रकाश संश्लेषण रुक जाएगा और पादपों पर आश्रित हर आहार शृंखला ढह जाएगी। साथ ही मृत शरीर और पत्तियाँ ढेर होती जाएँगी, क्योंकि अपघटक उनका कार्बन लौटा नहीं रहे।
- नाइट्रोजन चक्र रुका। वायुमंडलीय N2 अक्रियाशील है और पादप उसका सीधा उपयोग नहीं कर सकते। नाइट्रोजन स्थिरीकरण के बिना अमोनिया नहीं बनेगी, नाइट्रीकरण के बिना नाइट्रेट नहीं मिलेगा, इसलिए पादप प्रोटीन और न्यूक्लीक अम्ल नहीं बना पाएँगे। वृद्धि, मरम्मत और जनन तीनों रुक जाएँगे। जंतु, जो नाइट्रोजन केवल खाकर प्राप्त करते हैं, प्रोटीन के अभाव में मर जाएँगे।
- ऑक्सीजन चक्र रुका। श्वसन और दहन ऑक्सीजन का उपभोग करते रहेंगे, परंतु प्रकाश संश्लेषण उसे लौटाएगा नहीं। वायुमंडलीय ऑक्सीजन घटते-घटते इतनी रह जाएगी कि ऑक्सी-श्वसन असंभव हो जाएगा।
पृथ्वी = ऊर्जा के लिए खुला तंत्र (सूर्य का प्रकाश भीतर, अवरक्त बाहर)
पृथ्वी = द्रव्य के लिए बंद तंत्र (नई C, N, O या H2O बाहर से नहीं आती)
अतः द्रव्य का चक्रण होना अनिवार्य है, अन्यथा आपूर्ति सीमित है और जीवन रुक जाएगा।
पृथ्वी = द्रव्य के लिए बंद तंत्र (नई C, N, O या H2O बाहर से नहीं आती)
अतः द्रव्य का चक्रण होना अनिवार्य है, अन्यथा आपूर्ति सीमित है और जीवन रुक जाएगा।
लिखने योग्य एक ठोस उदाहरण: आज आपने जो दाल खाई, उसकी नाइट्रोजन कुछ ही समय पहले वायु में N2 गैस थी। दलहनी फसल की जड़ ग्रंथियों में बैठे राइजोबियम ने उसे अमोनिया में स्थिर किया, नाइट्रीकरण जीवाणुओं ने नाइट्रेट बनाया, पादप ने उसका स्वांगीकरण कर प्रोटीन बनाया — और जब आप उस प्रोटीन का पाचन करके अपशिष्ट मृदा को लौटाते हैं, तब अपघटक अमोनीकरण करके उसे फिर से सौंप देते हैं। इस शृंखला की एक भी कड़ी टूटी तो खेत आपको खिलाना बंद कर देगा।