कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 2 चिंतन कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
कोशिका कहाँ से आती है?
उत्तर

प्रत्येक कोशिका किसी पहले से विद्यमान कोशिका के विभाजन से बनती है — निर्जीव पदार्थ से कभी नहीं। यही कोशिका सिद्धांत का तीसरा कथन है जिसे 1855 में रुडोल्फ विरचो ने जोड़ा।

पूर्वविद्यमान कोशिका → वृद्धि → विभाजन → नई कोशिकाएँ
समसूत्री विभाजन: 1 जनक कोशिका → 2 समान संतति कोशिकाएँ
अर्धसूत्री विभाजन: 1 जनक कोशिका → 4 कोशिकाएँ, गुणसूत्रों की आधी संख्या के साथ
ऐसा क्यों होता है: कोशिका केवल रसायनों की थैली नहीं है। इसमें कार्यशील झिल्ली, कोशिकाद्रव्य, राइबोसोम और सबसे बढ़कर डीएनए के पूरे अनुदेश चाहिए, और ये सब बने-बनाए तथा सही क्रम में केवल किसी अन्य जीवित कोशिका के भीतर ही मिलते हैं। अध्याय का अपना उदाहरण यही सिद्ध करता है — वर्ष 2010 में जे. क्रेग वेंटर के दल ने माइकोप्लाज्मा माइकोइड्स का संश्लिष्ट डीएनए बनाया, फिर भी उसे एक विद्यमान जीवाणु कोशिका में ही डालना पड़ा जिसका कोशिकाद्रव्य और झिल्ली अक्षुण्ण थे। केवल डीएनए संश्लिष्ट था।
क्या आप जानते हैं? आपका अपना शरीर एक निषेचित अंडाणु से आरंभ हुआ था। आज आपके शरीर की लगभग 30 खरब कोशिकाएँ उसी एक कोशिका से विभाजनों की अटूट श्रृंखला द्वारा बनी हैं।
प्र2.
नग्न आँखों से परे संसार को समझने के लिए तकनीकी प्रयोगों ने नए ज्ञान के सृजन में किस प्रकार सहायता की है?
उत्तर

प्रत्येक नए उपकरण ने देखने की सीमा को आगे बढ़ाया, और हर बार नया जीव विज्ञान सामने आया।

उपकरणसबसे छोटी वस्तु जो दिखीजो नया ज्ञान मिला
नग्न नेत्र0.1 mm (100 µm)केवल संपूर्ण जीव और अंग
रॉबर्ट हुक का सूक्ष्मदर्शी, 1665 (200–300 गुना)कुछ µmकॉर्क में बक्से जैसे कोष्ठ — उन्होंने इन्हें ‘कोशिका’ नाम दिया
विद्यालय का प्रकाश सूक्ष्मदर्शी (10X × 10X = 100X, 400X तक)लगभग 0.2 µmकेंद्रक, कोशिका भित्ति, हरितलवक, प्याज के मूलाग्र में कोशिका विभाजन की अवस्थाएँ
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (इलेक्ट्रॉन पुंज)नैनोमीटर स्तर (1 nm = एक मीटर का एक अरबवाँ भाग)राइबोसोम, माइटोकॉन्ड्रिया के अंतःकटक, लिपिड द्विपरत, कोशिका पंजर, विषाणु; इसी ने गॉल्जी उपकरण के अस्तित्व की पुष्टि दशकों बाद की
ऐसा क्यों होता है: विभेदन उस तरंगदैर्घ्य से तय होता है जिससे हम ‘देखते’ हैं। दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य लगभग 400–700 nm है, अतः कोई भी प्रकाश सूक्ष्मदर्शी लगभग 200 nm से पास के दो बिंदुओं को अलग नहीं कर सकता, लेंस कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो। इलेक्ट्रॉन कहीं कम तरंगदैर्घ्य की तरंगों की भाँति व्यवहार करते हैं, इसीलिए इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी हजार गुना बारीक संरचनाएँ दिखाता है। वैज्ञानिकों ने दो और विशेषताएँ सुधारीं — विपर्यास (वस्तु के विभिन्न भागों की द्युति में अंतर, इसीलिए प्याज की झिल्ली को सैफ्रेनीन और कपोल कोशिकाओं को मेथिलीन ब्लू से अभिरंजित करते हैं) और आवर्धन
क्या आप जानते हैं? गॉल्जी उपकरण पर दशकों तक संदेह किया गया क्योंकि आरंभिक सूक्ष्मदर्शी इसका स्पष्ट विभेदन नहीं कर पाते थे। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी ने ही यह विवाद समाप्त किया। तकनीक केवल ज्ञान की पुष्टि नहीं करती — वह यह भी तय करती है कि कौन-से प्रश्न पूछे ही जा सकते हैं।
प्र3.
कोशिका जीवन की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई किस प्रकार है?
उत्तर

यह संरचनात्मक इकाई इसलिए है क्योंकि प्रत्येक सजीव शरीर कोशिकाओं से ही बना है, और कार्यात्मक इकाई इसलिए क्योंकि जीवन की हर प्रक्रिया कोशिका के भीतर ही होती है।

  • संरचनात्मक — समान कोशिकाएँ ऊतक बनाती हैं, ऊतक अंग और अंग मिलकर अंग-तंत्र — नासा रंध्र, नासा गुहा, श्वासनली और फेफड़े मिलकर श्वसन तंत्र बनाते हैं। इस संगठन को खोलते जाइए, अंत में कोशिका ही मिलेगी।
  • कार्यात्मक — श्वसन माइटोकॉन्ड्रिया में, प्रोटीन संश्लेषण राइबोसोम पर, प्रकाश-संश्लेषण हरितलवक में, अपशिष्ट का पाचन लाइसोसोम में और भंडारण रसधानी में होता है। ये सब एक ही कोशिका के भीतर हैं।
  • एक अकेली कोशिका संपूर्ण जीव भी हो सकती है — जीवाणु या यीस्ट स्वयं जीता, भोजन लेता, बढ़ता और जनन करता है। कोशिका से छोटी कोई भी वस्तु यह नहीं कर सकती।
ऐसा क्यों होता है: कोशिका वह सबसे छोटी इकाई है जिसमें जीवन की तीनों आवश्यकताएँ एक साथ हैं — एक सीमा जो भीतर को बाहर से भिन्न रखे (झिल्ली), स्वयं को चलाने और अपनी प्रति बनाने के अनुदेश (डीएनए), तथा उन अनुदेशों को कार्य में बदलने वाली मशीनरी (राइबोसोम, एंजाइम, माइटोकॉन्ड्रिया)। कोशिका को तोड़ दीजिए तो उसके भाग कुछ ही मिनटों में काम करना बंद कर देते हैं, क्योंकि सही सांद्रताओं को एक साथ रखने वाली सीमा ही नहीं रही। विषाणुओं में डीएनए और प्रोटीन तो हैं पर अपनी झिल्ली-आबद्ध मशीनरी नहीं — इसीलिए वे परपोषी कोशिका के बाहर जीवित नहीं रह सकते।
प्र4.
कोशिका किस प्रकार गुणन करती है?
उत्तर

कोशिका विभाजन द्वारा — जनक कोशिका पहले अपने डीएनए की प्रति बनाती है, फिर विभाजित होती है। इसके दो प्रकार हैं।

समसूत्री विभाजनअर्धसूत्री विभाजन
संतति कोशिकाएँ24
गुणसूत्र संख्याजनक के समानजनक की आधी
विभाजनों की संख्याएकदो, एक के बाद एक
कहाँकायिक कोशिकाओं में — त्वचा, मूलाग्र, अस्थि मज्जाजंतुओं में केवल वृषण और अंडाशय; पादपों में परागकोश और अंडाशय
उद्देश्यवृद्धि, मरम्मत, रखरखाव, अलैंगिक जननयुग्मक बनाना; विविधता उत्पन्न करना
समसूत्री: 1 कोशिका (46 गुणसूत्र) → 2 कोशिकाएँ (प्रत्येक में 46)
अर्धसूत्री: 1 कोशिका (46) → प्रथम विभाजन → 2 कोशिकाएँ (प्रत्येक में 23) → द्वितीय विभाजन → 4 कोशिकाएँ (प्रत्येक में 23)
निषेचन: 23 + 23 = 46 — मूल संख्या पुनर्स्थापित
ऐसा क्यों होता है: कोशिका केवल बढ़ती नहीं रह सकती। आकार बढ़ने पर आयतन घन के अनुपात में बढ़ता है जबकि पृष्ठीय क्षेत्रफल केवल वर्ग के अनुपात में, अतः झिल्ली शीघ्र ही भीतरी भाग को भोजन और ऑक्सीजन देने में असमर्थ हो जाती है। विभाजन इस अनुपात को फिर से ठीक कर देता है। अर्धसूत्री विभाजन का कारण भिन्न है — यदि युग्मकों में पूरी गुणसूत्र संख्या होती तो निषेचन प्रत्येक पीढ़ी में उसे दोगुना कर देता, इसलिए पहले उसे आधा करना आवश्यक है।
क्या आप जानते हैं? प्रतिदिन हमारे शरीर में लगभग सैकड़ों अरब कोशिकाएँ प्रतिस्थापित होती हैं — कुल संख्या का लगभग 1 प्रतिशत। इसी कारण कटा हुआ स्थान भर जाता है और बाल फिर उग आते हैं।
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