प्र1.
मानव नेत्र द्वारा दो अति निकट वस्तुओं को अलग और विशिष्ट रूप से देखने की क्षमता को हम क्या कहते हैं?
उत्तर
इसे नेत्र का विभेदन कहते हैं, और वह न्यूनतम दूरी जिस पर यह क्षमता बनी रहती है, विभेदन सीमा कहलाती है।
मानव नेत्र का निकट बिंदु = 25 cm
मानव नेत्र की विभेदन सीमा = 0.1 mm
0.1 mm = 0.1 × 1000 µm = 100 µm
मानव नेत्र की विभेदन सीमा = 0.1 mm
0.1 mm = 0.1 × 1000 µm = 100 µm
कागज पर 0.1 mm की दूरी पर बने दो बिंदु, नेत्र से 25 cm दूर रखने पर, अभी भी दो दिखाई देते हैं। इससे पास लाने पर वे एक ही बिंदु प्रतीत होते हैं।
ऐसा क्यों होता है: विभेदन और आवर्धन एक ही बात नहीं हैं। आवर्धन केवल प्रतिबिंब को बड़ा करता है; विभेदन यह तय करता है कि बड़ा करने पर भी दोनों बिंदु अलग बने रहेंगे या नहीं। धुँधले चित्र को बड़ा करने से बड़ा धुँधलापन मिलता है, अधिक विवरण नहीं। इसीलिए वैज्ञानिकों ने सूक्ष्मदर्शी की तीनों विशेषताओं — विभेदन, विपर्यास और आवर्धन — पर काम किया, केवल आवर्धन पर नहीं।
स्वयं जाँचिए: एक प्ररूपी पादप या जंतु कोशिका 10–100 µm की होती है। नेत्र की सीमा 100 µm है, अतः केवल सबसे बड़ी कोशिकाएँ ही दृश्यता की सीमा पर आ सकती हैं — और वह भी बिना किसी आंतरिक विवरण के।