प्र1.
निर्जीव रसायनों के उपयोग द्वारा संश्लेषित कोशिकाओं के विकास का भविष्य क्या है?
उत्तर
सच्चा उत्तर यह है कि पूर्णतः संश्लेषित कोशिका अभी बनी नहीं है, और अध्याय स्वयं यह सावधानी से कहता है। अब तक जो हुआ है और आगे जो हो सकता है, वह इस प्रकार है।
| चरण | इसका अर्थ | हम कहाँ हैं |
|---|---|---|
| संश्लिष्ट डीएनए | प्रयोगशाला में संपूर्ण जीनोम की रासायनिक रचना | हो चुका — वेंटर के दल ने 2010 में माइकोप्लाज्मा माइकोइड्स का डीएनए संश्लेषित किया |
| विद्यमान कोशिका में संश्लिष्ट डीएनए | जीवाणु का अपना डीएनए निकालकर संश्लिष्ट प्रति डालना | हो चुका — कोशिका नए अनुदेशों पर बढ़ी और विभाजित हुई, जिससे सिद्ध हुआ कि डीएनए कोशिका की संरचना और गतिविधियों को नियंत्रित करता है |
| न्यूनतम कोशिका | जीनोम को घटाकर उतने ही जीन रखना जितने जीवन के लिए अनिवार्य हैं | प्रगति पर — इससे यह पहचानने में सहायता मिलती है कि कौन-से कार्य वास्तव में अनिवार्य हैं |
| पूर्णतः संश्लेषित कोशिका | झिल्ली, कोशिकाद्रव्य, राइबोसोम और डीएनए — सब निर्जीव रसायनों से | अभी नहीं — 2010 में केवल डीएनए संश्लिष्ट था; झिल्ली और कोशिकाद्रव्य पहले से विद्यमान जीवित कोशिका से लिए गए थे |
यदि यह संभव हुआ तो उपयोग बड़े होंगे — औषधियाँ और टीके सस्ते में बनाने वाले जीवाणु, तेल के रिसाव या प्लास्टिक अपशिष्ट को पचाने वाले जीवाणु, फसलों के लिए नाइट्रोजन स्थिरीकरण, या ईंधन बनाना। इससे जीवविज्ञानी यह भी परख सकेंगे कि जीवन के लिए वास्तव में क्या-क्या आवश्यक है — केवल तोड़कर नहीं, बनाकर।
ऐसा क्यों होता है: कठिन भाग डीएनए नहीं — रसायनज्ञ पहले ही जीनोम लिख सकते हैं। कठिन भाग बाकी सब कुछ है। कोशिका में एक कार्यशील झिल्ली, सही आंतरिक सांद्रताएँ, अनुदेश पढ़ने को तैयार राइबोसोम और पहली अभिक्रियाएँ आरंभ करने वाले एंजाइम चाहिए। ये सब स्वयं किसी जीवित कोशिका के उत्पाद हैं, अतः इस परियोजना के सामने एक चक्रीय समस्या है — डीएनए को पढ़ने वाली मशीनरी डीएनए के पढ़े जाने से पहले मौजूद होनी चाहिए। ठीक इसीलिए 2010 के प्रयोग को पात्र के लिए एक जीवित कोशिका उधार लेनी पड़ी, और इसीलिए कोशिका सिद्धांत का यह कथन अब भी टिका है कि सभी कोशिकाएँ पूर्वविद्यमान कोशिकाओं से बनती हैं।