प्र1.
कैंसर कोशिकाएँ किस प्रकार वृद्धि करती हैं और फैलती हैं?
उत्तर
वे इसलिए बढ़ती हैं क्योंकि उन्होंने सामान्य कोशिका विभाजन को रोकने वाले नियंत्रण खो दिए हैं, और वे आस-पास के ऊतकों में प्रवेश करके तथा शरीर के अन्य भागों तक पहुँचकर फैलती हैं।
सामान्य कोशिका: वृद्धि → कार्य → जीर्णता → मृत्यु → प्रतिस्थापन, सब नियंत्रण में
कैंसर कोशिका: नियंत्रण प्रणाली विफल
→ अनियंत्रित विभाजन, संपर्क अवरोध की अवहेलना
→ असामान्य कोशिकाओं का पिंड = अर्बुद (सुदम्य या दुर्दम)
→ दुर्दम अर्बुद आस-पास के ऊतकों में प्रवेश करता है
→ कोशिकाएँ अन्यत्र पहुँचकर नए अर्बुद बनाती हैं
कैंसर कोशिका: नियंत्रण प्रणाली विफल
→ अनियंत्रित विभाजन, संपर्क अवरोध की अवहेलना
→ असामान्य कोशिकाओं का पिंड = अर्बुद (सुदम्य या दुर्दम)
→ दुर्दम अर्बुद आस-पास के ऊतकों में प्रवेश करता है
→ कोशिकाएँ अन्यत्र पहुँचकर नए अर्बुद बनाती हैं
| सुदम्य अर्बुद | दुर्दम (कैंसरयुक्त) अर्बुद | |
|---|---|---|
| वृद्धि | एक ही स्थानीय पिंड के रूप में रहता है | आस-पास के ऊतक में प्रवेश करता है |
| अन्य अंगों में फैलाव | नहीं | हाँ — अन्यत्र नए अर्बुद बनाता है |
| जोखिम | सामान्यतः कम, जब तक किसी अंग पर दबाव न डाले | अधिक |
ऐसा क्यों होता है: अनेक जंतु कोशिकाओं में विभाजन सामान्यतः तब रुक जाता है जब कोशिका अपने पड़ोसियों के संपर्क में आती है — यही संपर्क अवरोध है। कैंसर कोशिका इस संकेत को नहीं मानती, अतः स्थान न होने पर भी विभाजित होती रहती है। वह अपने जीवनकाल के अंत में मरने का सामान्य निर्देश भी नहीं मानती। परिणाम एक बढ़ता हुआ पिंड है जो स्वस्थ ऊतक से भोजन और ऑक्सीजन छीन लेता है और दुर्दम होने पर ऊतकों की सीमाएँ तोड़कर दूर के अंगों तक पहुँच जाता है। इसके विपरीत पादप कोशिकाएँ संपर्क अवरोध दर्शाती ही नहीं — उनकी दृढ़ कोशिका भित्तियाँ उन्हें अपने स्थान पर बाँधे रखती हैं और वे वृद्धि के एक भिन्न प्रतिरूप का अनुसरण करती हैं, इसीलिए फैलते अर्बुद का प्रश्न पादपों में उसी रूप में उठता ही नहीं।