प्र1.
जंतु अपने परिवेश से भोजन प्राप्त कर सकते हैं यद्यपि पादप सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में भोजन संश्लेषित करते हैं। परंतु पादप अपना भोजन कहाँ संश्लेषित करते हैं एवं कोशिकीय गतिविधियों के लिए पादपों को ऊर्जा कहाँ से मिलती है?
उत्तर
पादप भोजन हरितलवक में बनाते हैं, जो एक प्रकार का लवक है, और फिर उस भोजन से ऊर्जा माइटोकॉन्ड्रिया में निर्मुक्त करते हैं — ठीक जैसे जंतु करते हैं।
सूर्य का प्रकाश + CO₂ + H₂O → (हरितलवक में, प्रकाश-संश्लेषण) → शर्करा
शर्करा + O₂ → (माइटोकॉन्ड्रिया में, कोशिकीय श्वसन) → एटीपी + CO₂ + H₂O
शर्करा + O₂ → (माइटोकॉन्ड्रिया में, कोशिकीय श्वसन) → एटीपी + CO₂ + H₂O
- हरितलवक के भीतर एक अर्ध-तरल पदार्थ होता है जिसे पीठिका (stroma) कहते हैं। उसके भीतर चक्रिका के आकार की झिल्लीनुमा संरचनाएँ होती हैं जिनमें पर्णहरित होता है — वही हरा वर्णक जो सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है।
- प्रकाश-संश्लेषण में बनी शर्करा स्टार्च के कणों के साथ पीठिका में संग्रहीत होती है।
- हरितलवक माइटोकॉन्ड्रिया की भाँति दोहरी झिल्ली-आबद्ध होते हैं।
- अन्य लवकों के अन्य कार्य हैं — वर्णीलवक में पीले, नारंगी या लाल वर्णक होते हैं; अवर्णी लवक में वर्णक नहीं होता और वे स्टार्च, तेल या प्रोटीन संग्रहीत करते हैं।
ऐसा क्यों होता है: इस प्रश्न में एक सामान्य भ्रांति छिपी है — कि पादप अपनी कोशिकाएँ चलाने के लिए सीधे सूर्य के प्रकाश का उपयोग करते हैं। ऐसा नहीं है। प्रकाश केवल पकड़ा जाता है और उसकी ऊर्जा शर्करा के रासायनिक बंधों में संग्रहीत हो जाती है। पादप कोशिका की हर गतिविधि — दिन हो या रात, जड़ हो या पत्ती — एटीपी से चुकाई जाती है जिसे माइटोकॉन्ड्रिया उसी शर्करा को तोड़कर बनाते हैं। इसीलिए पादप कोशिका में दोनों कोशिकांग होते हैं, और इसीलिए जड़ की कोशिका — जो कभी प्रकाश नहीं देखती और जिसमें हरितलवक नहीं होते — में भी माइटोकॉन्ड्रिया भरपूर होते हैं।
क्या आप जानते हैं? माइटोकॉन्ड्रिया और लवक दोनों में अपना डीएनए और अपने राइबोसोम होते हैं और वे अपने कुछ प्रोटीन स्वयं बना सकते हैं — ऐसी विशेषताएँ जो जीवाणुओं में भी हैं और जो संकेत देती हैं कि दोनों कोशिकांग एककोशिकीय जीवों के साथ एक विकासीय इतिहास साझा करते हैं।