प्र1.
क्या सफेद फूलों में कोई वर्णक होता है? कारण बताइए।
उत्तर
वास्तव में सफेद फूल की पंखुड़ियों में कोई रंगीन वर्णक नहीं होता। उनके लवक अवर्णी लवक होते हैं — ऐसे लवक जिनमें वर्णक नहीं होता और जो इसीलिए रंगहीन हैं।
- रंग तब बनता है जब कोई वर्णक प्रकाश की कुछ तरंगदैर्घ्यों को अवशोषित कर ले और शेष को परावर्तित कर दे। पर्णहरित लाल और नीला अवशोषित करके हरा परावर्तित करता है; वर्णीलवक का वर्णक नीला अवशोषित करके पीला, नारंगी या लाल परावर्तित करता है।
- सफेद पंखुड़ी लगभग कुछ भी अवशोषित नहीं करती। उसकी कोशिकाओं के बीच के वायु-अवकाश सभी तरंगदैर्घ्यों को एक साथ प्रकीर्णित और परावर्तित कर देते हैं, और सभी तरंगदैर्घ्यों वाला प्रकाश सफेद दिखता है।
- अतः सफेद कोई वर्णक है ही नहीं — यह उस पंखुड़ी की उपस्थिति है जिसमें वर्णक नहीं।
सभी तरंगदैर्घ्य अवशोषित → काला
लाल और नीला अवशोषित, हरा परावर्तित → हरा
सभी तरंगदैर्घ्य परावर्तित → सफेद
लाल और नीला अवशोषित, हरा परावर्तित → हरा
सभी तरंगदैर्घ्य परावर्तित → सफेद
ऐसा क्यों होता है: यही कारण है कि दूध का झाग, पिसी हुई बर्फ और बादल सफेद दिखते हैं, जबकि जल रंगहीन है — असंख्य छोटी सतहें हर रंग को समान रूप से प्रकीर्णित कर देती हैं। सफेद पंखुड़ी में ये प्रकीर्णक सतहें कोशिकाओं के बीच के वायु-अवकाश हैं। एक उपयोगी जाँच — सफेद पंखुड़ी को जल में मसलिए, कोई रंग नहीं निकलेगा, जबकि लाल गुलाब या गेंदे की पंखुड़ी तुरंत रंग छोड़ देगी।
क्या आप जानते हैं? चमेली जैसे अनेक ‘सफेद’ फूल उन कीटों के लिए बिलकुल सादे नहीं होते जो उन पर आते हैं — उनकी पंखुड़ियों पर पराबैंगनी प्रकाश में दिखने वाले प्रतिरूप होते हैं, जिन्हें मधुमक्खियाँ देख सकती हैं और हम नहीं।