प्र1.
एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति करने वाले जंतुओं की अपेक्षा एक स्थान पर स्थिर रहने वाले पादपों में कोशिका भित्ति की आवश्यकता के संबंध में आप क्या तर्क देंगे?
उत्तर
तर्क इस पर टिका है कि अवलंब और बचाव का मार्ग कहाँ से आता है। स्थिर जीव को सामर्थ्य हर कोशिका में बनानी पड़ती है; गतिशील जीव को हर कोशिका को आकार बदलने योग्य रखना पड़ता है।
| समस्या | पादप का समाधान | जंतु का समाधान |
|---|---|---|
| सीधे खड़े रहना, वायु और वर्षा सहना | हर कोशिका में दृढ़ सेल्युलोस भित्ति; स्फीत कोशिकाएँ एक-दूसरे पर दबाव डालती हैं | आंतरिक कंकाल और पेशियाँ |
| परासरण से बहुत अधिक जल भीतर आना | भित्ति प्रतिदाब देती है और आगे जल आना रुक जाता है — कोशिका फट नहीं सकती | वृक्क और रक्त शरीर के तरल को समपरासारी रखते हैं, अतः यह समस्या उठती ही नहीं |
| सूखे, ताप या परभक्षी से बचना | गति संभव नहीं; सहना ही पड़ता है | हटकर चला जाता है |
| गति, भ्रूण की वृद्धि, घाव भरना | आवश्यकता नहीं — वृद्धि निश्चित वर्धनशील बिंदुओं पर कोशिकाएँ जोड़कर होती है | भित्तिहीन कोशिकाएँ आकार बदलती हैं, एक-दूसरे पर सरकती हैं और स्थान बदलती हैं |
ऐसा क्यों होता है: भित्ति मुफ्त का उपहार नहीं, एक सौदा है। वह दृढ़ता और फटने से सुरक्षा देती है, पर गतिशीलता और लचीलापन छीन लेती है। मृदा में जड़े पादप के लिए दृढ़ता गतिशीलता से कहीं अधिक मूल्यवान है, अतः यह सौदा लाभ का है। जिस जंतु को दौड़ना, निगलना, पेशी सिकोड़ना और घाव भरना है, उसके लिए हर कोशिका के चारों ओर दृढ़ बक्सा यह सब असंभव कर देता — इसलिए जंतु केवल झिल्ली रखते हैं और सामर्थ्य कहीं और, अस्थि और उपास्थि में, जुटाते हैं। ध्यान दीजिए कि कवक और जीवाणु, जो अगतिशील या मंद गति वाले हैं, उन्होंने भी पादपों जैसा ही चुनाव किया और उनमें भी भित्ति है।