कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 2 क्रियाकलाप 2.3 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
प्याज की झिल्ली की कोशिकाएँ अथवा रोइओ की पत्ती की विशल्क कोशिकाएँ बॉक्स जैसे आकार की हैं और नियमित रूप से व्यवस्थित हैं, जबकि कपोल कोशिकाएँ अनियमित रूप से व्यवस्थित हैं। आपके विचार से यह भिन्नता क्यों दिखाई देती है?
उत्तर

क्योंकि पादप कोशिकाओं में दृढ़ कोशिका भित्ति होती है और जंतु कोशिकाओं में नहीं।

प्याज की झिल्ली / रोइओ की विशल्कमानव कपोल
सबसे बाहरी आवरणसेल्युलोस की कोशिका भित्ति, फिर कोशिका झिल्लीकेवल कोशिका झिल्ली
आकारबॉक्स जैसा, सीधी कोरों वाला, निश्चितगोलाई लिए, अनियमित, कोई निश्चित रूपरेखा नहीं
व्यवस्थानियमित, ईंटों की भाँति सटी हुईबिखरी हुई, प्रायः एक-दूसरे पर चढ़ी हुई
प्रयुक्त अभिरंजकसैफ्रेनीनमेथिलीन ब्लू
ऐसा क्यों होता है: भित्ति तब बनती है जब कोशिका ऊतक में अपने पड़ोसियों से जुड़ी होती है, अतः सटी हुई भित्तियाँ साझा होती हैं और कोशिकाएँ ईंटों जैसे निश्चित प्रतिरूप में जुड़ जाती हैं, जो विशल्क उतारने के बाद भी बना रहता है। कपोल कोशिकाएँ एक नम सतही परत से खुरचकर अलग की जाती हैं, उनके पास आकार बनाए रखने वाली भित्ति नहीं होती और पृष्ठ तनाव प्रत्येक मुक्त कोशिका को गोल रूपरेखा की ओर खींचता है। स्लाइड पर उनकी अनियमित व्यवस्था आंशिक रूप से कोशिकाओं के आकार के कारण है और आंशिक रूप से इसलिए कि वे ऊतक में जुड़ी न रहकर केवल जल की एक बूँद में फैलाई गई हैं।
सुझाव: दोनों स्लाइडों पर अलग-अलग अभिरंजक कारण सहित लगाए जाते हैं — सैफ्रेनीन सेल्युलोस भित्ति और पादप केंद्रक से अच्छी तरह जुड़ता है, जबकि मेथिलीन ब्लू लगभग पारदर्शी कपोल कोशिका के केंद्रक को दृश्य बनाता है।
प्र2.
रोइओ की पत्ती की विशल्क और मानव कपोल कोशिकाओं की दो स्लाइड पुनः तैयार कीजिए और उन पर 20 प्रतिशत चीनी का घोल डालिए। आधे घंटे पश्चात इन्हें सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखिए। आप क्या देखते हैं?
उत्तर

दोनों कोशिकाएँ जल खोती हैं, परंतु उसके बाद वे बिलकुल भिन्न दिखती हैं।

  • रोइओ (पादप) कोशिकाएँ — बाहरी आवरण ठीक वहीं बना रहता है, किंतु भीतरी अंतर्वस्तुएँ उससे दूर सिकुड़ जाती हैं। भीतरी और बाह्य आवरण के बीच एक स्पष्ट स्थान बढ़ जाता है। झिल्ली और अंतर्वस्तुओं का भित्ति से इस प्रकार दूर हटना जीवद्रव्यकुंचन (plasmolysis) कहलाता है।
  • कपोल (जंतु) कोशिकाएँ — पूरी कोशिका अत्यधिक संकुचित हो जाती है और झुर्रीदार दिखती है, क्योंकि आकार बनाए रखने वाली कोई बाहरी भित्ति है ही नहीं।
जल में पादप कोशिकाभित्ति और अंतर्वस्तुदोनों भरी हुई 20% चीनी के घोल मेंभित्ति अपरिवर्तित,अंतर्वस्तु सिकुड़ी जल में कपोल कोशिकागोल और भरी हुई चीनी के घोल मेंपूरी कोशिका सिकुड़ी
अतिपरासारी विलयन में दोनों कोशिकाएँ जल खोती हैं; केवल पादप कोशिका अपनी रूपरेखा बनाए रखती है, क्योंकि भित्ति नहीं सिकुड़ती।
ऐसा क्यों होता है: 20 प्रतिशत चीनी का घोल कोशिका-रस के लिए अतिपरासारी है, अतः दोनों कोशिकाओं से परासरण द्वारा जल निकलता है। पादप कोशिका में सेल्युलोस की भित्ति दृढ़ और पारगम्य है — चीनी का घोल भित्ति और झिल्ली के बीच के स्थान में भर जाता है, इसलिए जीवद्रव्य सिकुड़ने पर भी भित्ति अपना मूल बॉक्स आकार बनाए रखती है। कपोल कोशिका में झिल्ली ही सीमा है, अतः अंतर्वस्तु का जल घटते ही सीमा स्वयं धँस जाती है। अध्याय में यह अकेला प्रेक्षण सबसे स्पष्ट प्रमाण है कि पादप कोशिका में झिल्ली के बाहर कुछ ऐसा है जो जंतु कोशिका में नहीं।
स्वयं जाँचिए: जीवद्रव्यकुंचित रोइओ की स्लाइड पर साधारण जल डालिए। अंतर्वस्तुएँ फिर फूलकर भित्ति तक पहुँच जाती हैं — प्रक्रिया उलट जाती है, जिससे पता चलता है कि जीवद्रव्यकुंचन ने कोशिका को मारा नहीं है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ