प्र1.
प्याज की झिल्ली की कोशिकाएँ अथवा रोइओ की पत्ती की विशल्क कोशिकाएँ बॉक्स जैसे आकार की हैं और नियमित रूप से व्यवस्थित हैं, जबकि कपोल कोशिकाएँ अनियमित रूप से व्यवस्थित हैं। आपके विचार से यह भिन्नता क्यों दिखाई देती है?
उत्तर
क्योंकि पादप कोशिकाओं में दृढ़ कोशिका भित्ति होती है और जंतु कोशिकाओं में नहीं।
| प्याज की झिल्ली / रोइओ की विशल्क | मानव कपोल | |
|---|---|---|
| सबसे बाहरी आवरण | सेल्युलोस की कोशिका भित्ति, फिर कोशिका झिल्ली | केवल कोशिका झिल्ली |
| आकार | बॉक्स जैसा, सीधी कोरों वाला, निश्चित | गोलाई लिए, अनियमित, कोई निश्चित रूपरेखा नहीं |
| व्यवस्था | नियमित, ईंटों की भाँति सटी हुई | बिखरी हुई, प्रायः एक-दूसरे पर चढ़ी हुई |
| प्रयुक्त अभिरंजक | सैफ्रेनीन | मेथिलीन ब्लू |
ऐसा क्यों होता है: भित्ति तब बनती है जब कोशिका ऊतक में अपने पड़ोसियों से जुड़ी होती है, अतः सटी हुई भित्तियाँ साझा होती हैं और कोशिकाएँ ईंटों जैसे निश्चित प्रतिरूप में जुड़ जाती हैं, जो विशल्क उतारने के बाद भी बना रहता है। कपोल कोशिकाएँ एक नम सतही परत से खुरचकर अलग की जाती हैं, उनके पास आकार बनाए रखने वाली भित्ति नहीं होती और पृष्ठ तनाव प्रत्येक मुक्त कोशिका को गोल रूपरेखा की ओर खींचता है। स्लाइड पर उनकी अनियमित व्यवस्था आंशिक रूप से कोशिकाओं के आकार के कारण है और आंशिक रूप से इसलिए कि वे ऊतक में जुड़ी न रहकर केवल जल की एक बूँद में फैलाई गई हैं।
सुझाव: दोनों स्लाइडों पर अलग-अलग अभिरंजक कारण सहित लगाए जाते हैं — सैफ्रेनीन सेल्युलोस भित्ति और पादप केंद्रक से अच्छी तरह जुड़ता है, जबकि मेथिलीन ब्लू लगभग पारदर्शी कपोल कोशिका के केंद्रक को दृश्य बनाता है।