कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 3 चिंतन कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
जैव प्रक्रमों और मानव कल्याण को समझने के लिए कोशिकाओं और ऊतकों का अध्ययन किस प्रकार से महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर

क्योंकि प्रत्येक जैव प्रक्रम अंततः कोशिका के भीतर ही होता है, और किसी बड़े शरीर की कोई एक कोशिका सभी प्रक्रम एक साथ नहीं कर सकती।

अमीबा जैसे एककोशिकीय जीव में एक ही कोशिका पोषण, श्वसन, उत्सर्जन और गति — सब कुछ करती है। बहुकोशिकीय शरीर में यह संभव नहीं, अतः समान कोशिकाएँ ऊतक बनाकर एक ही कार्य सँभाल लेती हैं। ऊतकों का अध्ययन हमें बताता है कि प्रत्येक जैव प्रक्रम कहाँ होता है और उस कार्य के लिए वही संरचना क्यों उपयुक्त है —

  • पेशीय ऊतक → गति, क्योंकि इसकी कोशिकाएँ लंबे तंतु हैं जो संकुचित हो सकते हैं।
  • तंत्रिका ऊतक → नियंत्रण और समन्वय, क्योंकि न्यूरॉन का लंबा तंत्रिकाक्ष संदेश को दूर तक ले जाता है।
  • जाइलम → जल परिवहन, क्योंकि इसकी कोशिकाएँ मृत और खोखली नलिकाएँ हैं जिनमें प्रवाह रोकने वाली कोई भित्ति नहीं।
  • फ्लोएम → भोजन परिवहन, क्योंकि इसकी चालनी नलिकाएँ सजीव हैं और सहचर कोशिकाएँ उनमें शर्करा का भारण-अभारण करती हैं।
मानव कल्याण से संबंध: ऊतक की सामान्य संरचना ज्ञात हो तो यह भी पता चलता है कि उसमें विकार आने पर क्या होगा और उसे कैसे ठीक किया जाए। अस्थि मज्जा की मूल (stem) कोशिकाएँ ल्यूकेमिया और थैलेसीमिया के रोगियों में प्रत्यारोपित की जाती हैं। पादप ऊतक संवर्धन, जिसका आरंभ 1958 में एफ.सी. स्टीवर्ड द्वारा गाजर की एक फ्लोएम कोशिका से पूर्ण पादप उगाने से हुआ, आज रोगमुक्त पौध और उन्नत फसलें देता है। सिप्रा गुहा मुखर्जी और एस.सी. माहेश्वरी ने परागकोष संवर्धन से पूर्ण पादप विकसित किया, जो आज भी फसल सुधार में उपयोगी है।
संकेत: पदानुक्रम एक पंक्ति में याद रखिए — कोशिका → ऊतक → अंग → अंग तंत्र → जीव। प्रत्येक स्तर इसलिए बना है कि श्रम विभाजन और सूक्ष्म हो सके।
प्र2.
पादपों और जंतुओं के ऊतक किस प्रकार भिन्न हैं और क्यों?
उत्तर

अंतर इसलिए है कि पादपों और जंतुओं की जीवन-शैली भिन्न है — पादप एक स्थान पर स्थिर रहते हैं और अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, जबकि जंतु गतिशील हैं और भोजन बाहर से ग्रहण करते हैं।

बिंदुपादप ऊतकजंतु ऊतक
अवलंबकोशिका भित्ति दृढ़ता देती है; दृढ़ोतक और लिग्निन काष्ठीय ढाँचा बनाते हैं। पादप को मृत ऊतक सीधा खड़ा रखता है।कोशिका भित्ति नहीं, अतः कोशिकाएँ सरलता से आकार बदलती हैं। अवलंब सजीव अस्थि और उपास्थि से मिलता है।
वृद्धिवृद्धि केवल विभज्योतकों तक सीमित और आजीवन चलती है। वृक्ष प्रतिवर्ष परिधि बढ़ाता है।वृद्धि पूरे शरीर में फैली होती है और प्रायः परिपक्वता पर रुक जाती है।
पोषणप्रकाश-संश्लेषण करने वाले ऊतक — भोजन भीतर ही बनता है।पाचन और अवशोषण के ऊतक (आँत की उपकला) — भोजन बाहर से लिया जाता है।
परिवहनजाइलम और फ्लोएम — स्थिर नलिकाएँ; जाइलम मृत होता है।रक्त — एक तरल संयोजी ऊतक, जिसे हृदय पेशी पंप करती है।
ऊर्जा-व्ययअनेक सहायक कोशिकाएँ मृत हैं, अतः उनके अनुरक्षण पर कोई व्यय नहीं।लगभग सभी कोशिकाएँ सजीव हैं और उन्हें निरंतर आपूर्ति चाहिए।
ऐसा क्यों होता है: जंतु को मुड़ना, दौड़ना और आकार बदलना होता है, अतः वह प्रत्येक कोशिका के चारों ओर दृढ़ भित्ति नहीं रख सकता; इसके बदले वह सजीव कंकाल और निरंतर भोजन-आपूर्ति की कीमत चुकाता है। पादप को गति नहीं करनी, अतः वह अवलंब के लिए सस्ती, मृत, लिग्निनयुक्त कोशिकाएँ लगा देता है और आजीवन अपने अग्रभागों से बढ़ता रहता है।
प्र3.
बहुकोशिकीय जीवों में संगठन के विभिन्न स्तरों पर श्रम विभाजन किस प्रकार उनकी संरचना और कार्य से संबंधित है?
उत्तर

प्रत्येक स्तर की संरचना उसी एक कार्य के अनुसार ढली होती है जो उस स्तर को करना है — और प्रत्येक ऊपरी स्तर इसलिए बनता है कि वह उन कार्यों को जोड़ सके जिन्हें निचला स्तर अकेले नहीं जोड़ सकता।

स्तरसंरचनाजो प्रकार्य संभव होता है
कोशिकान्यूरॉन एक लंबे तंत्रिकाक्ष के रूप में खिंचा होता हैसंकेत को दूर तक पहुँचाना
ऊतकअनेक पेशी तंतु समांतर रूप से पूलों में बँधेउनके छोटे-छोटे खिंचाव जुड़कर बड़ा बल बनाते हैं
अंगहृदय — हृदय पेशी + उपकला + संयोजी ऊतक + तंत्रिकाएँजीवनपर्यंत लयबद्ध रूप से रक्त पंप करना
अंग तंत्रपेशी-कंकाल तंत्र — अस्थियाँ, पेशियाँ, कंडराएँ, स्नायु, उपास्थि, संधियाँमुद्रा, चलन और कोमल अंगों की सुरक्षा
जीवतंत्रिका नियंत्रण में कार्य करते सभी तंत्रएक पूर्ण, समन्वित जीवन

यही तर्क पादप में भी चलता है — बाह्यत्वचीय कोशिकाएँ चपटी और मोमी हैं (सुरक्षा), मृदूतक कोशिकाएँ पतली भित्ति वाली और अवकाशयुक्त हैं (भंडारण और गैस विसरण), जाइलम वाहिकाएँ खोखली नलिकाएँ हैं (संवहन) — और ये मिलकर त्वचीय, भरण तथा संवहन ऊतक तंत्र बनाती हैं।

श्रम विभाजन से कार्यक्षमता क्यों बढ़ती है: जो कोशिका केवल एक कार्य करती है, वह पूरी तरह उसी कार्य के लिए बनाई जा सकती है। केवल भोजन भंडारण करने वाली मृदूतक कोशिका को मोटी भित्ति की आवश्यकता नहीं; केवल दृढ़ता देने वाली दृढ़ोतक कोशिका को तो सजीव रहने की भी आवश्यकता नहीं। विशेषीकरण उन समझौतों को समाप्त कर देता है जो अमीबा जैसी सर्वकार्यी कोशिका को करने पड़ते हैं।
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