कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 3 क्रियाकलाप 3.2 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
तालिका 3.3 के पहले स्तंभ में दिए गए दैनिक अनुभवों का स्मरण कीजिए। अपने अवलोकन और प्रश्न अपनी नोट-बुक में लिखिए। अपने अवलोकनों की तालिका 3.3 में दिए गए अवलोकनों से तुलना कीजिए।
उत्तर

पूरी की गई तालिका 3.3 — पुस्तक द्वारा दिए गए अवलोकन और वे प्रश्न जो प्रत्येक अवलोकन से उठने चाहिए।

अनुभवअवलोकनउठने वाला प्रश्न
जब आपकी त्वचा थोड़ी-सी कट गई होकटे हुए स्थान से लाल रक्त निकलता है। कुछ समय पश्चात थक्का बन जाता है।रक्त का थक्का (स्कंदन) बनने का क्या कारण है?
जब आपको त्वचा में संक्रमण हुआ होवह क्षेत्र लाल हो जाता है और संभवतः सूजन भी हो जाती है। आपको ज्वर भी हो सकता है।संक्रमित क्षेत्र लाल और सूजा हुआ क्यों दिखता है — वहाँ कौन-सी रक्त कोशिकाएँ एकत्र होती हैं?
जब आप व्यायाम करते हैं या दौड़ते हैंआप तेजी से श्वास लेते हैं और आपका चेहरा लाल भी हो सकता है।व्यायाम के समय शरीर को अधिक ऑक्सीजन क्यों चाहिए और रक्त उसे तेजी से कैसे पहुँचाता है?

तीनों अनुभव एक ही ऊतक की ओर संकेत करते हैं — रक्त, एक संयोजी ऊतक जिसमें कोशिकाएँ प्लाज्मा नामक तरल आधात्री में तैरती हैं।

घटकरक्त में भागकार्य
प्लाज्माकुल आयतन का 55 प्रतिशततरल आधात्री — कोशिकाओं, पोषक तत्वों, हार्मोन और अपशिष्टों का वहन
निर्मित तत्व — RBC, WBC, बिंबाणुकुल आयतन का 45 प्रतिशतऑक्सीजन परिवहन, रक्षा, स्कंदन
लगभग 5 L रक्त वाले वयस्क के लिए —
प्लाज्मा का आयतन = 5 L का 55% = (55 ÷ 100) × 5 L = 2.75 L
निर्मित तत्वों का आयतन = 5 L का 45% = (45 ÷ 100) × 5 L = 2.25 L
रक्त संयोजी ऊतक क्यों है: संयोजी ऊतक की पहचान उसकी आधात्री से होती है — निर्जीव आधार पदार्थ में बिखरी कोशिकाएँ। अस्थि में यह आधात्री कैल्सियम और फॉस्फोरस यौगिकों के निक्षेपण के कारण कठोर और दृढ़ है; रक्त में वह जलीय और जेली जैसी है। अभिकल्प एक ही, संगतता बिल्कुल भिन्न — और इसीलिए कार्य भी बिल्कुल भिन्न।
प्र2.
रक्त का थक्का (स्कंदन) बनने का क्या कारण है?
उत्तर

बिंबाणु (platelets) — निर्मित तत्वों में सबसे छोटे — चोट के स्थान पर एकत्र होकर वह थक्का बनाते हैं जो घाव को बंद कर देता है।

कटने पर क्रम से यह होता है —

  1. रक्त वाहिका की भित्ति फट जाती है और रक्त बाहर निकलता है।
  2. बिंबाणु चोट के स्थान पर पहुँचकर फटे किनारों से और परस्पर चिपक जाते हैं तथा एक अस्थायी अवरोध बना देते हैं।
  3. वे स्कंदन की रासायनिक अभिक्रियाएँ आरंभ करते हैं जिनसे घाव पर तंतुओं का एक जाल बिछ जाता है।
  4. रक्त कोशिकाएँ इस जाल में फँस जाती हैं; यह पिंड कठोर हो जाता है और रक्तस्राव रुक जाता है।
अन्य अवलोकन भी इसी तर्क पर चलते हैं:
  • रक्त का लाल रंग — हीमोग्लोबिन, जो लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला लौह-समृद्ध प्रोटीन है। लाल रक्त कोशिकाएँ लगभग 4 महीने जीवित रहती हैं और नियमित रूप से प्रतिस्थापित होती रहती हैं।
  • संक्रमित भाग की लालिमा, सूजन और मवाद — श्वेत रक्त कोशिकाएँ संक्रमित क्षेत्र में एकत्र होकर सूक्ष्मजीवों से लड़ती हैं, जिससे शोथ और मवाद बनता है।
  • दौड़ते समय तीव्र श्वास और लाल चेहरा — माँसपेशियों को अधिक ऑक्सीजन चाहिए, अतः श्वास की गति बढ़ती है और रक्त प्रवाह भी; त्वचा के पास अधिक रक्त आने से चेहरा लाल दिखता है।
क्या आप जानते हैं? लगभग 4 महीने का अर्थ है लगभग 120 दिन की सेवा, जिसके बाद RBC विघटित होकर नई कोशिका से बदल दी जाती है — इसीलिए स्वस्थ वयस्क के लिए रक्तदान सुरक्षित है।
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