कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 3 क्रियाकलाप 3.4 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
हमारे शरीर के कुल भार का कितना प्रतिशत अस्थियों और पेशियों से बना है?
उत्तर

वयस्क शरीर के कुल भार का लगभग 12 – 15 प्रतिशत अस्थियों से आता है; मांसपेशी वयस्क पुरुषों में लगभग 40 – 50 प्रतिशत और वयस्क महिलाओं में लगभग 30 – 40 प्रतिशत होती है। अर्थात आपके भार का आधे से भी अधिक भाग पेशी-कंकाल तंत्र का है।

उदाहरण-गणना — 50 kg भार वाले विद्यार्थी के लिए (चरण 1 में तुला पर लिया गया अपना पाठ्यांक प्रयोग कीजिए) —

किसी भाग का भार = कुल शरीर भार × (प्रतिशत ÷ 100)

अस्थि (12 – 15%): न्यूनतम = 50 kg × 12/100 = 6.0 kg
              अधिकतम = 50 kg × 15/100 = 7.5 kg

मांसपेशी, वयस्क पुरुष (40 – 50%) = 50 kg × 40/100 से 50 kg × 50/100 = 20 kg से 25 kg
मांसपेशी, वयस्क महिला (30 – 40%) = 50 kg × 30/100 से 50 kg × 40/100 = 15 kg से 20 kg

अस्थि + मांसपेशी (पुरुष आँकड़ों से) = 6.0 kg + 20 kg = 26 kg  से  7.5 kg + 25 kg = 32.5 kg
कुल भार का अंश = 26 ÷ 50 = 0.52  से  32.5 ÷ 50 = 0.65, अर्थात कुल भार का 52% – 65%
स्वयं जाँचिए: कक्षा का औसत निकालने के लिए सभी विद्यार्थियों के अनुमानित अस्थि-भार जोड़कर विद्यार्थियों की संख्या से भाग दीजिए —
कक्षा का औसत अस्थि भार = (सभी विद्यार्थियों के अस्थि भार का योग, kg में) ÷ (विद्यार्थियों की संख्या)। मांसपेशी के लिए भी यही कीजिए।
उत्तर एक संख्या नहीं, एक परिसर क्यों है: ये प्रतिशत जनसंख्या के औसत हैं। आपका अपना मान आयु, लिंग, शारीरिक संरचना और नृजातीयता पर निर्भर करता है, अतः ईमानदार उत्तर एक अंतराल है, एक आँकड़ा नहीं। इसीलिए चरण 2 में कहा गया है कि भारतीय शरीर के प्रकार के लिए मान ज्ञात कीजिए, कहीं और का मान नहीं।
प्र2.
चर्चा कीजिए कि अस्थि और मांसपेशी द्रव्यमान विभिन्न व्यक्तियों में अलग-अलग क्यों होते हैं और वे शरीर के कुल भार में किस प्रकार योगदान करते हैं?
उत्तर

वे भिन्न क्यों होते हैं। अस्थि और मांसपेशी सजीव ऊतक हैं जिनका निर्माण और विघटन निरंतर चलता रहता है, और यह संतुलन व्यक्ति पर निर्भर करता है —

  • आयु — अस्थि द्रव्यमान बाल्यावस्था और किशोरावस्था में बढ़ता है, प्रारंभिक वयस्कता में शिखर पर होता है और बाद में धीरे-धीरे घटता है।
  • लिंग — वयस्क पुरुषों में औसतन अधिक मांसपेशी (40 – 50%) होती है, वयस्क महिलाओं में कम (30 – 40%)।
  • शारीरिक सक्रियता — पेशियाँ और अस्थियाँ भार के प्रति अनुक्रिया करती हैं। प्रतिदिन कबड्डी खेलने वाला या भार उठाने वाला किसान दिनभर बैठे रहने वाले व्यक्ति की तुलना में सघन अस्थि और बड़ी पेशी बनाता है।
  • पोषण — पेशी बनाने के लिए प्रोटीन तथा अस्थि की आधात्री के लिए कैल्सियम, फॉस्फोरस और विटामिन D आवश्यक हैं। अपर्याप्त आहार दोनों घटा देता है।
  • शारीरिक आमाप और संघटन — लंबे और भारी ढाँचे में कंकाल भी बड़ा होता है; समान भार पर भी अधिक वसा वाले व्यक्ति में मांसपेशी का प्रतिशत कम रहता है।
  • स्वास्थ्य — रोग, लंबी अचलता और हार्मोन संबंधी परिवर्तन दोनों को घटाते हैं।

कुल भार में योगदान। अस्थि इसलिए भारी है कि उसकी आधात्री कैल्सियम और फॉस्फोरस यौगिकों से भरी है; मांसपेशी इसलिए भारी है कि वह शरीर का सबसे बड़ा एकल ऊतक है। दोनों जोड़ने पर —

अस्थि (12 – 15%) + मांसपेशी (30 – 50%) = कुल शरीर भार का लगभग 42% से 65%
शेष भाग वसा, त्वचा, रक्त, अंग और शरीर द्रव हैं।
यह क्यों महत्त्वपूर्ण है: भार में परिवर्तन और स्वास्थ्य में परिवर्तन एक बात नहीं हैं। समान भार वाले दो विद्यार्थियों में पेशी और अस्थि की मात्रा बहुत भिन्न हो सकती है। नियमित व्यायाम, सही मुद्रा, उचित पोषण और योग पेशी तथा अस्थि का अंश बढ़ाते हैं — जिससे अस्थियाँ सुदृढ़, संधियाँ लचीली और शरीर दुर्नम्यता से सुरक्षित रहता है — भले ही तुला का पाठ्यांक लगभग वही रहे।
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