कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
क्या शरीर में अनैच्छिक गतियाँ भी होती हैं?
उत्तर

हाँ, और बहुत सारी। आँत में भोजन की गति और हृदय का स्पंदन बिना किसी सचेत नियंत्रण के होते रहते हैं।

कंकाल पेशीचिकनी पेशीहृदय पेशी
नियंत्रणऐच्छिकअनैच्छिकअनैच्छिक
कोशिका का आकारलंबी, बेलनाकार, अशाखिततर्कुरूपबेलनाकार और शाखित
केंद्रकअनेक (बहुकेंद्रकी)एकएक
धारियाँरेखित — स्पष्ट हल्की और गहरी पट्टियाँअनुपस्थितहल्की धारियाँ
कहाँकंकाल से जुड़ीआमाशय, आँत तथा अन्य अंगों मेंकेवल हृदय में
कार्यदौड़ना, लिखना, वस्तुएँ उठाना — प्रबल और तीव्र, किंतु शीघ्र थक जाती हैपाचन जैसी धीमी, सतत गतियाँजीवनपर्यंत अथक, लयबद्ध स्पंदन
हृदय कभी थकता क्यों नहीं: हृदय पेशी की कोशिकाएँ शाखित हैं और सिरे से सिरे तक जुड़ी हैं, अतः संकुचन की तरंग पूरे हृदय में एक इकाई की भाँति फैलती है। इनमें माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या बहुत अधिक होती है और रक्त की आपूर्ति प्रचुर, अतः ATP उतनी ही तेजी से बनता है जितनी तेजी से खर्च होता है और ऑक्सीजन-ऋण बनता ही नहीं। इसके विपरीत कंकाल पेशी अपनी ऑक्सीजन आपूर्ति से आगे निकल सकती है — इसीलिए दौड़ने के बाद टाँगों में पीड़ा होती है, हृदय में नहीं।
संकेत: पेशियाँ कभी स्वयं कार्य नहीं करतीं। ऐच्छिक हो या अनैच्छिक, प्रत्येक पेशी तंत्रिका ऊतक से अनुदेश लेती है — व्यायाम के समय मस्तिष्क ही हृदय को तेजी से धड़कने का संकेत देता है ताकि शरीर की बढ़ी हुई ऑक्सीजन आवश्यकता पूरी हो सके।
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