कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
आपने अवश्य देखा होगा कि हमारे शरीर के कुछ भाग सरलता से कई दिशाओं में गति कर सकते हैं जबकि अन्य केवल एक दिशा में ही गति करते हैं। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर

क्योंकि भिन्न स्थानों पर संधि का प्रकार भिन्न है, और संधि दो या अधिक अस्थियों के बीच का वह जोड़ है जो एक विशेष प्रकार से आकारित होता है।

संधिअस्थियाँ कैसे बैठती हैंसंभव गतिउदाहरण
कंदुक-खल्लिकाएक अस्थि का गोलाकार शीर्ष दूसरी के उथले गड्ढे में बैठता हैअग्र, पश्च, पार्श्व और गोलाकारकंधा, कूल्हा
कोरअस्थियों के सिरे ऐसे आकारित कि वे केवल एक तल में झूलें, दरवाजे के कब्जे की तरहएक ही दिशा में मुड़ना और सीधा होनाकोहनी, घुटना (जानुफलक से सुरक्षित)
धुराग्रएक अस्थि दूसरी द्वारा बने छल्ले के भीतर घूमती हैघूर्णन — दाएँ-बाएँ, दरवाजे के हैंडल की तरहमेरुदंड पर खोपड़ी (गर्दन)
अचलचपटी अस्थियाँ किनारे से किनारे जुड़ीकोई नहींखोपड़ी की अस्थियाँ
शरीर हर जगह कंदुक-खल्लिका संधि क्यों नहीं रखता: गति की स्वतंत्रता स्थिरता की कीमत पर मिलती है। कंधा हर दिशा में घूम सकता है और वही संधि सबसे सरलता से विस्थापित भी होती है। घुटने को पूरे शरीर का भार उठाना है, अतः वह एक ही तल में गति करने और शेष हर दिशा को अस्वीकार करने के लिए बना है — स्नायु यही सुनिश्चित करते हैं। और जहाँ कोई गति होनी ही नहीं चाहिए, जैसे मस्तिष्क के चारों ओर, वहाँ संधियाँ अचल हैं, ताकि दौड़ते-कूदते समय भी खोपड़ी एक दृढ़ सुरक्षा-कवच बनी रहे।
प्र2.
अतः अस्थियों की गति वस्तुतः किस कारण होती है?
उत्तर

पेशियों के कारण — वे संकुचित होकर कंडराओं द्वारा अस्थियों को खींचती हैं। संधियाँ गति की अनुमति भर देती हैं, उसे उत्पन्न नहीं कर सकतीं।

घटनाओं का क्रम —

  1. तंत्रिका तंत्र पेशी को आवेग भेजता है। (पेशी-कंकाल तंत्र तंत्रिका तंत्र के नियंत्रण में कार्य करता है।)
  2. पेशी संकुचित होती है — छोटी और मोटी हो जाती है।
  3. पेशी को अस्थि से जोड़ने वाली सुदृढ़, लचीली पट्टी अर्थात कंडरा उस खिंचाव को अस्थि तक पहुँचाती है।
  4. अस्थि संधि पर घूमती है, और संधि ही उस घूर्णन की दिशा और सीमा तय करती है।
  5. अस्थि को अस्थि से जोड़ने वाले स्नायु गति को सुरक्षित सीमा से आगे नहीं जाने देते; अस्थियों के सिरों की उपास्थि संपर्क को गद्दीदार बनाती है।
पेशी केवल खींच सकती है, धकेल नहीं — क्यों: पेशी बल केवल छोटी होकर उत्पन्न करती है। अतः किसी संधि को एक ओर मोड़कर वापस सीधा करने के लिए शरीर को अस्थि के दोनों ओर पेशियाँ चाहिए, जो बारी-बारी से खिंचें — एक संकुचित हो तो दूसरी शिथिल। इसीलिए पेशियाँ प्रायः संधि के आर-पार युग्मों में व्यवस्थित होती हैं।
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