कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 3 वैज्ञानिक की भाँति सोचिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
गाजर की फ्लोएम कोशिकाओं की विशेषताओं के संबंध में आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर

यह कि गाजर की परिपक्व फ्लोएम कोशिका पूर्णशक्त (totipotent) है — यद्यपि वह भोजन का संवहन करने वाली कोशिका के रूप में विभेदित हो चुकी है, फिर भी उसमें पूरा पादप बनाने का समग्र निर्देश-समूह सुरक्षित है और उसे पुनः प्रयोग में लाया जा सकता है।

स्टीवर्ड का 1958 का प्रयोग यह तीन चरणों में दिखाता है —

परिपक्व फ्लोएम कोशिका → निर्विभेदन (विभाजन की क्षमता पुनः प्राप्त)
    → विभाजित होकर अविशेषीकृत कोशिकाओं का अविभेदित पिंड
    → पुनःविभेदन से जड़, प्ररोह और अंततः पूर्ण गाजर का पादप

अतः विशेषताएँ ये हैं — कोशिका सजीव है (मृत जाइलम कोशिका यह कभी नहीं कर सकती), उसमें पूर्ण केंद्रक और समग्र आनुवंशिक सूचना सुरक्षित है, और उसकी विभेदित अवस्था उपयुक्त पोषक तत्वों, हार्मोन तथा परिस्थितियों में उत्क्रमणीय है।

यह इतना आश्चर्यजनक क्यों था: तब तक विभेदन को एकतरफा मार्ग माना जाता था — एक बार कोशिका फ्लोएम कोशिका बन गई तो कहानी वहीं समाप्त। स्टीवर्ड ने दिखाया कि पादपों में यह मार्ग दोनों ओर चलता है। गाजर की एक कोशिका वही कर सकती है जो युग्मनज करता है — विभाजित और विभेदित होकर एक पूर्ण जीव बन जाना।
प्र2.
तीनों में से किन संयोजनों में आपको सबसे अधिक और सबसे कम जैव मात्रा (biomass) प्राप्त होगी? इस अवलोकन के संभावित कारण क्या हो सकते हैं?
उत्तर

सबसे अधिक जैव मात्रा: संयोजन 2 — प्रकाश उपस्थित, वायु उपस्थित, तरल माध्यम + पोषक तत्व (20% वृद्धि)।
सबसे कम जैव मात्रा: संयोजन 1 और 3, जिनमें ताजा भार आरंभिक भार से भी कम हो गया।

#प्रकाशवायुमाध्यमताजा भार में परिवर्तनकिसकी कमी थी
1ठोस + पोषक तत्वकम हुआवायु नहीं — श्वसन के लिए ऑक्सीजन नहीं; ठोस माध्यम पोषक तत्वों से संपर्क भी सीमित करता है
2तरल + पोषक तत्व20% वृद्धि हुईकिसी की नहीं — तीनों कारक उपस्थित
3तरल + पोषक तत्वकम हुआप्रकाश नहीं
ध्यान दीजिए: हिंदी संस्करण की तालिका 3.6 की तीसरी पंक्ति में प्रकाश और वायु दोनों पर ✓ छपा है, जबकि अंग्रेज़ी संस्करण (Exploration, पृष्ठ 42) में वहाँ प्रकाश पर ✗ और वायु पर ✓ है। तर्क भी यही कहता है — यदि पंक्ति 2 और पंक्ति 3 की परिस्थितियाँ बिल्कुल समान होतीं तो परिणाम भिन्न नहीं हो सकते थे। अतः तीसरी पंक्ति प्रकाश अनुपस्थित, वायु उपस्थित ही मानी जानी चाहिए।

अब वृद्धि को संख्या में रखिए। संवर्धन 2-mg के टुकड़ों से आरंभ किया गया था (चित्र 3.19) —

ताजा भार में वृद्धि = आरंभिक भार × (प्रतिशत वृद्धि ÷ 100)
= 2 mg × (20 ÷ 100) = 0.4 mg
अंतिम ताजा भार = 2 mg + 0.4 mg = 2.4 mg

संयोजन 1 और 3 में परिवर्तन ऋणात्मक है, अतः अंतिम भार 2 mg से कम रहा।

कारण। केवल संयोजन 2 में कोशिकाओं को सब कुछ एक साथ मिला —

  • वायु ऑक्सीजन देती है, जो ऑक्सी-श्वसन के लिए आवश्यक है। वायु के बिना (संयोजन 1) कोशिकाएँ विभाजन के लिए पर्याप्त ऊर्जा मुक्त नहीं कर पातीं और अपना ही संचित भोजन खर्च करती हैं — अतः ताजा भार घट जाता है।
  • प्रकाश प्रकाश-संश्लेषण के लिए तथा वृद्धि और हरितीकरण के संकेत के रूप में आवश्यक है। प्रकाश के बिना (संयोजन 3) कोशिकाएँ श्वसन तो करती रहती हैं किंतु बनाती कुछ नहीं, अतः संचित पदार्थ पुनः समाप्त हो जाता है।
  • तरल माध्यम प्रत्येक कोशिका को चारों ओर से पोषक तत्वों से घेर देता है और उसे हिलाया भी जा सकता है — इसी हिलाने से एकल कोशिकाएँ अलग होकर निलंबन में आती हैं। ठोस माध्यम ऊतक के केवल एक तल को स्पर्श करता है।
भार केवल रुकता क्यों नहीं, घटता क्यों है: सजीव कोशिका को श्वसन तो करना ही है, चाहे वह बढ़ रही हो या नहीं। यदि वह भोजन न ले सके और न बना सके, तो वह अपने ही संचित पदार्थों का ऑक्सीकरण करती है और संवर्धन का ताजा भार आरंभिक भार से भी नीचे चला जाता है।
प्र3.
क्या गाजर की कोशिकाओं के स्थान पर जंतु कोशिकाओं को संवर्धित करने पर समान परिणाम प्राप्त होंगे?
उत्तर

नहीं। जंतु कोशिकाओं का संवर्धन किया जा सकता है, किंतु कोई विभेदित जंतु कोशिका उस प्रकार पूर्ण जंतु नहीं बनाती जिस प्रकार गाजर की फ्लोएम कोशिका पूर्ण पादप बना देती है।

गाजर (पादप) कोशिकाएँजंतु कोशिकाएँ
परिपक्व कोशिका की पूर्णशक्तताबनी रहती है — निर्विभेदित और पुनःविभेदित हो सकती हैविभेदन के बाद लगभग सभी काय कोशिकाओं में समाप्त हो जाती है
संवर्धन में क्या बनता हैकोशिकाओं का अविभेदित पिंड, जो आगे जड़, प्ररोह और पूर्ण पादप बनाता हैप्रायः एक ही प्रकार की कोशिकाओं की चादर — ऊतक, जीव नहीं
कोशिका भित्तिउपस्थित; पिंड को बँधा और आकारित रखने में सहायकअनुपस्थित; कोशिकाएँ आसंजन और पड़ोसी कोशिकाओं के संकेतों पर निर्भर
अनेक प्रकार बना सकने वाली कोशिकाएँलगभग कोई भी सजीव मृदूतक या फ्लोएम कोशिकाकेवल विशेष मूल (stem) कोशिकाएँ, जैसे अस्थि मज्जा की
यह अंतर क्यों है: जंतु की शरीर-योजना परिवर्धन के आरंभ में ही निर्धारित हो जाती है और उसकी कोशिकाएँ स्थायी रूप से एक ही नियति चुन लेती हैं; वे अपनी सटीक स्थिति, रक्त आपूर्ति और आस-पास के ऊतकों से मिलने वाले संकेतों पर भी निर्भर हैं, जिन्हें संवर्धन-पात्र में दोहराया नहीं जा सकता। पादप एक स्थान पर स्थिर है, अतः उसे अपना कोई भी खोया भाग पुनः बनाने में सक्षम रहना है — इसीलिए वह यह लचीलापन साधारण काय कोशिकाओं में भी आजीवन बनाए रखता है।
क्या आप जानते हैं? जंतुओं की मूल कोशिकाएँ इसका अपवाद हैं। अस्थि मज्जा की मूल कोशिकाएँ आज भी विभाजित होकर नई रक्त कोशिकाएँ बना सकती हैं, इसीलिए उन्हें स्वस्थ व्यक्ति से लेकर ल्यूकेमिया या थैलेसीमिया के रोगियों में प्रत्यारोपित किया जाता है।
प्र4.
उपर्युक्त अध्ययन के किन्हीं दो व्यावसायिक अनुप्रयोगों के विषय में सोचिए और बताइए।
उत्तर

दो स्पष्ट अनुप्रयोग —

  1. सूक्ष्मप्रवर्धन — समरूप, रोगमुक्त पौध का बड़े पैमाने पर उत्पादन। किसी एक उत्तम पादप के कुछ ग्राम ऊतक से छोटी-सी प्रयोगशाला में हजारों पादपक उगाए जा सकते हैं, वर्ष के किसी भी समय, और वे सभी जनक पादप के आनुवंशिक रूप से समरूप होते हैं। केला, गन्ना, आलू और ऑर्किड की रोपण सामग्री व्यावसायिक रूप से इसी विधि से बनाई जाती है।
  2. पादप रसायनों का औद्योगिक उत्पादन। संवर्धित कोशिकाओं को बड़े पात्रों में उगाकर मूल्यवान पादप रसायन (phytochemical) — औषधियाँ, वर्णक, सुगंध — बनाए जा सकते हैं, बिना पूरे पादप उगाए और नष्ट किए, और बिना ऋतु पर निर्भर हुए।

दो और जानने योग्य —

  • आनुवंशिक अभियांत्रिकी द्वारा फसल सुधार। वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया कि किरीट पिटिका रोग उत्पन्न करने वाला जीवाणु एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमिफेशियंस अपनी आनुवंशिक सामग्री पादप कोशिकाओं में किस प्रकार स्थानांतरित करता है। इसी ज्ञान और ऊतक संवर्धन के मेल से आज फसलों में वांछित जीन प्रविष्ट कराकर उन्नत और रोग-प्रतिरोधी किस्में बनाई जाती हैं।
  • परागकोष संवर्धन से अगुणित पादप — सिप्रा गुहा मुखर्जी और एस.सी. माहेश्वरी की कार्य-दिशा, जो नई किस्मों के प्रजनन को तेज कर देती है।
इन सबकी कुंजी पूर्णशक्तता ही क्यों है: इनमें से प्रत्येक अनुप्रयोग एक ही तथ्य पर टिका है — कि परिपक्व पादप कोशिका को पुनः पूर्ण पादप बनने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इसके बिना संवर्धित कोशिका से केवल उसी प्रकार की और कोशिकाएँ ही मिलतीं।
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