प्र1.
तालिका 4.3 का संदर्भ लीजिए। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि किस राशि (समय अथवा स्थिति) को इन दोनों में से किस अक्ष के अनुदिश दर्शाया जाए।
उत्तर
समय को X-अक्ष के अनुदिश और स्थिति को Y-अक्ष के अनुदिश दर्शाइए।
ऐसा क्यों होता है: समय वह राशि है जिसे हम स्वयं नियमित रूप से पढ़ते जाते हैं — वाहन कुछ भी करे, समय अपनी गति से बीतता ही रहता है। स्थिति वह राशि है जो समय के अनुसार बदलती है। हर ग्राफ की परिपाटी यही है कि नियंत्रक (स्वतंत्र) राशि X-अक्ष पर और परिवर्तित होने वाली (आश्रित) राशि Y-अक्ष पर रखी जाए। इससे प्रवणता, अर्थात ऊर्ध्वाधर परिवर्तन ÷ क्षैतिज परिवर्तन, स्वयं ही "स्थिति में परिवर्तन ÷ समय में परिवर्तन" बन जाती है — जो वेग है, और वही हमें चाहिए। अक्ष बदल दीजिए तो प्रवणता "समय प्रति मीटर" बन जाएगी, जिसका कोई उपयोग नहीं।
सुझाव: यही नियम आगे वेग-समय ग्राफ को अर्थ देता है — X पर समय और Y पर वेग होने से प्रवणता त्वरण देती है और क्षेत्रफल विस्थापन।