प्र1.
स्थिति-समय ग्राफ की आकृति, गति की प्रकृति के संबंध में क्या इंगित करती है?
उत्तर
आकृति तुरंत बता देती है कि वेग नियत है या बदल रहा है, क्योंकि स्थिति-समय ग्राफ की प्रवणता ही वेग है।
| स्थिति-समय ग्राफ की आकृति | अर्थ | कारण |
|---|---|---|
| ढलवाँ सरल रेखा | नियत वेग (एकसमान गति) | समान समय अंतरालों में समान विस्थापन, अत: प्रवणता अपरिवर्तित |
| समय-अक्ष के समांतर सरल रेखा | वस्तु विरामावस्था में | स्थिति समय के साथ बदलती ही नहीं, अत: प्रवणता शून्य |
| उत्तरोत्तर ढलवाँ होता वक्र | वेग बढ़ रहा है — त्वरित गति | क्रमागत समान अंतरालों में विस्थापन बढ़ते जाते हैं |
| उत्तरोत्तर चपटा होता वक्र | वेग घट रहा है | क्रमागत समान अंतरालों में विस्थापन घटते जाते हैं |
पुस्तक के दोनों उदाहरण इसे स्पष्ट करते हैं। चित्र 4.13 (क) में वस्तु 2 s से 3 s के बीच 20 m और 5 s से 6 s के बीच भी 20 m चलती है — समान समय में समान विस्थापन, अत: ग्राफ सरल रेखा और वेग नियत। चित्र 4.13 (ख) में 4 s से 6 s के बीच का विस्थापन 10 s से 12 s के बीच के विस्थापन से कम है — ग्राफ ऊपर की ओर वक्रित है और वेग बढ़ रहा है।
ऐसा क्यों होता है: वेग की परिभाषा है स्थिति में परिवर्तन ÷ समय में परिवर्तन, और इस ग्राफ पर "स्थिति में परिवर्तन" ऊर्ध्वाधर वृद्धि है तथा "समय में परिवर्तन" क्षैतिज वृद्धि। अत: वेग ही ढलान है। जिस आकृति का ढलान नियत हो उसका वेग नियत होगा; जिसका ढलान बदले उसका वेग बदल रहा है — और वही त्वरण है।