प्र1.
वेग-समय ग्राफ की आकृति गति की प्रकृति के संबंध में क्या बताती है?
उत्तर
यहाँ प्रवणता त्वरण है, इसलिए आकृति बताती है कि वेग किस प्रकार बदल रहा है।
| वेग-समय ग्राफ की आकृति | अर्थ | पुस्तक का उदाहरण |
|---|---|---|
| समय-अक्ष के समांतर सरल रेखा | वेग नियत, त्वरण शून्य | चित्र 4.17 (क) — 20 m s⁻¹ पर चलती कार |
| ऊपर की ओर ढलवाँ सरल रेखा | वेग नियत दर से बढ़ रहा है; त्वरण नियत और वेग की दिशा में | चित्र 4.17 (ख) — 30 s में 0 से 15 m s⁻¹ |
| नीचे की ओर ढलवाँ सरल रेखा | वेग नियत दर से घट रहा है; त्वरण नियत और वेग के विपरीत | चित्र 4.17 (ग) — 30 s में 15 m s⁻¹ से 0 |
| वक्रित रेखा | त्वरण स्वयं बदल रहा है | इस अध्याय में इस पर चर्चा नहीं |
तालिका 4.5 बताती है कि चित्र 4.17 (ख) सरल रेखा क्यों है — प्रत्येक 5 s अंतराल में वेग ठीक 2.5 m s⁻¹ बढ़ता है, अर्थात समान समय में समान परिवर्तन।
a = (2.5 m s⁻¹ − 0 m s⁻¹) / (5 s − 0 s) = 0.5 m s⁻²
a = (5.0 m s⁻¹ − 2.5 m s⁻¹) / (10 s − 5 s) = 0.5 m s⁻² … पूरे समय वही
a = (5.0 m s⁻¹ − 2.5 m s⁻¹) / (10 s − 5 s) = 0.5 m s⁻² … पूरे समय वही
ऐसा क्यों होता है: त्वरण है वेग में परिवर्तन ÷ समय में परिवर्तन, जो इन अक्षों पर ऊर्ध्वाधर वृद्धि ÷ क्षैतिज वृद्धि, अर्थात प्रवणता है। नियत प्रवणता का अर्थ नियत त्वरण, और शून्य प्रवणता का अर्थ त्वरण बिलकुल नहीं — चाहे वेग कितना भी बड़ा क्यों न हो।