कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 4 क्रियाकलाप 4.4 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
आपके द्वारा आलेखित स्थिति-समय ग्राफ (चित्र 4.11 ग) से इसका कोई भाग (माना AB) लीजिए, जैसा चित्र 4.14 में दर्शाया गया है। बिंदु A से एक रेखा X-अक्ष के समांतर और दूसरी Y-अक्ष के समांतर खींचिए। ऐसा ही बिंदु B से कीजिए।
उत्तर

चित्र 4.11 (ग) की सरल रेखा पर A को t₁ = 2 s (स्थिति s₁ = 40 m) और B को t₂ = 4 s (स्थिति s₂ = 80 m) पर लीजिए।

A से Y-अक्ष के समांतर खींची रेखा समय-अक्ष पर t₁ अंकित करती है और X-अक्ष के समांतर खींची रेखा स्थिति-अक्ष पर s₁। B से भी वैसा ही करने पर t₂ और s₂ अंकित हो जाते हैं।

ABC t₁ = 2 st₂ = 4 s 40 m80 m CA = 2 sBC = 40 m समय (s)स्थिति (m)
A और B से लंब गिराने पर समय अंतराल CA और स्थिति में परिवर्तन BC अंकित हो जाते हैं।
सुझाव: प्रत्येक बिंदु से खींची गई ये दो बिंदुदार रेखाएँ केवल A और B के निर्देशांक पढ़ने का साधन हैं। ये किसी गति को नहीं दर्शातीं।
प्र2.
बिंदु A से खींची गई क्षैतिज रेखा को आगे बढ़ाइए जिससे त्रिभुज ABC निर्मित होता है। त्रिभुज की भुजाएँ BC एवं CA क्या निरूपित करती हैं?
उत्तर

समकोण त्रिभुज ABC में ग्राफ-रेखा AB कर्ण है। इसकी दो लंब भुजाएँ हैं —

  • CA — क्षैतिज भुजा — समय में परिवर्तन t₂ − t₁ को निरूपित करती है।
  • BC — ऊर्ध्वाधर भुजा — स्थिति में परिवर्तन s₂ − s₁ को निरूपित करती है, अर्थात उन दो क्षणों के बीच का विस्थापन।
CA = t₂ − t₁ = 4 s − 2 s = 2 s
BC = s₂ − s₁ = 80 m − 40 m = 40 m
ऐसा क्यों होता है: CA उस दिशा में है जिसमें X-अक्ष समय मापता है, अत: उसकी लंबाई समय अंतराल ही हो सकती है; BC उस दिशा में है जिसमें Y-अक्ष स्थिति मापता है, अत: उसकी लंबाई स्थिति में परिवर्तन ही होगी। त्रिभुज खींचने का लाभ यही है — यह अमूर्त "प्रवणता" को दो ऐसी भुजाओं में बदल देता है जिन्हें ग्राफ के अपने मापक्रम से नापा जा सकता है।
प्र3.
समीकरण (4.2 क) के अनुसार स्थिति में परिवर्तन (BC) को समय में परिवर्तन (CA) से विभाजित करने पर आपको माध्य वेग प्राप्त होता है।
उत्तर

हाँ — त्रिभुज की दोनों भुजाओं का भागफल ठीक माध्य वेग की परिभाषा दोहरा देता है।

माध्य वेग = स्थिति में परिवर्तन / समय अंतराल   [समीकरण 4.2 क]
यहाँ स्थिति में परिवर्तन = BC तथा समय अंतराल = CA

v = BC / CA = (s₂ − s₁) / (t₂ − t₁)
ऐसा क्यों होता है: ज्यामिति की दृष्टि से BC ÷ CA रेखा AB की प्रवणता है — वह कितनी ढलवाँ है। भौतिकी की दृष्टि से वही अनुपात विस्थापन ÷ समय है, अर्थात वेग। इसलिए "स्थिति-समय ग्राफ की प्रवणता" और "वेग" याद रखने योग्य दो अलग तथ्य नहीं हैं; ये एक ही अनुपात के दो नाम हैं। सामान्यत: किसी भी ग्राफ की प्रवणता, X-राशि के सापेक्ष Y-राशि में परिवर्तन की दर देती है।
प्र4.
ग्राफ से समय t₁ एवं t₂ तथा दूरियों s₁ एवं s₂ के मान लेकर माध्य वेग का मान परिकलित किया जा सकता है।
उत्तर

चित्र 4.14 से पढ़े गए चारों मान प्रतिस्थापित कीजिए —

v = (s₂ − s₁) / (t₂ − t₁)
= (80 m − 40 m) / (4 s − 2 s)
= 40 m / 2 s
= 20 m s⁻¹

ग्राफ सरल रेखा है, इसलिए बिंदुओं का कोई भी अन्य युग्म वही उत्तर देगा। t₁ = 0 s, t₂ = 6 s से जाँचिए —

v = (120 m − 0 m) / (6 s − 0 s) = 120 m / 6 s = 20 m s⁻¹ ✓
ऐसा क्यों होता है: सरल रेखा की प्रवणता हर जगह एक ही होती है। "नियत वेग" का अर्थ ठीक यही है, और इसीलिए यहाँ AB खंड का चयन कोई अंतर नहीं डालता। वक्रित स्थिति-समय ग्राफ में अंतर पड़ता — भिन्न खंड भिन्न माध्य वेग देते, क्योंकि वहाँ वेग स्वयं बदल रहा होता है।
स्वयं जाँचिए: ऊपर की भाँति मात्रक भी साथ ले चलिए। मीटर में सेकंड का भाग देने पर m s⁻¹ अपने आप आ जाता है — यह जाँचने का सरल तरीका है कि भाग उलटा तो नहीं दे दिया।
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