प्र1.
कीप की भीतरी दीवार को ध्यान से देखिए। क्या कोई ठोस निक्षेप (deposit) दिखाई देता है?
उत्तर
हाँ — उल्टी रखी कीप की ठंडी भीतरी दीवार पर श्वेत ठोस कर्पूर की परत जम जाती है, जबकि रेत चीनी मिट्टी की प्याली में ही रह जाती है।
कर्पूर (ठोस) —तापन→ कर्पूर की वाष्प —कीप की दीवार पर शीतलन→ कर्पूर (ठोस)
ठोस → वाष्प सीधे = ऊर्ध्वपातन
वाष्प → ठोस सीधे = निक्षेपण
ठोस → वाष्प सीधे = ऊर्ध्वपातन
वाष्प → ठोस सीधे = निक्षेपण
ऐसा क्यों होता है: धीरे गर्म करने पर (गलनांक से नीचे रखते हुए) कर्पूर द्रव अवस्था में गए बिना सीधे ठोस से वाष्प अवस्था में चला जाता है — उसके कणों को ठोस के पृष्ठ से सीधे मुक्त होने जितनी ऊर्जा मिल जाती है। वाष्प ऊपर उठकर कीप की दीवार से मिलती है, जो कक्ष की वायु के संपर्क में होने के कारण कहीं ठंडी है। वहाँ वाष्प ऊर्जा खोकर सीधे ठोस अवस्था में लौट आती है। रेत इन तापमानों पर ऊर्ध्वपातित नहीं होती, इसलिए वह प्याली में शेष रह जाती है। मिश्रण इसलिए पृथक हो जाता है क्योंकि एक घटक ऊर्ध्वपातित होता है और दूसरा नहीं।
संकेत: कीप की नलिका में लगा रूई का फाहा केवल सजावट नहीं है — वह कर्पूर की वाष्प को बाहर निकलने से रोकता है जिससे वह सारी कीप के भीतर ही संघनित हो जाए। नैफ्थलीन, अमोनियम क्लोराइड और शुष्क बर्फ (ठोस कार्बन डाइऑक्साइड) भी ऊर्ध्वपातित होते हैं और इसी प्रकार प्रयोग में लाए जा सकते हैं।