प्र1.
क्या ऐसा कृत्रिम रक्त बनाया जा सकता है जो सभी रोगियों के लिए वास्तविक रक्त की भाँति ही कार्य करे?
उत्तर
अभी तक नहीं — परंतु वैज्ञानिक इस पर कार्य कर रहे हैं, और कठिनाई ठीक वही है जिसकी चर्चा यह अध्याय करता है: रक्त अनेक कार्य करने वाला एक कोलॉइड है, कोई एक पदार्थ नहीं जिसे बोतल में भरा जा सके।
कृत्रिम रक्त को क्या-क्या करना पड़ेगा
| वास्तविक रक्त का कार्य | यह कौन-सा घटक करता है | इसकी नकल कितनी कठिन है |
|---|---|---|
| प्रत्येक ऊतक तक ऑक्सीजन पहुँचाना और कार्बन डाइऑक्साइड लौटाना | लाल रक्त कणिकाओं के भीतर हीमोग्लोबिन | आंशिक रूप से हल — ऑक्सीजन वाहक विकल्प उपलब्ध हैं |
| घाव को थक्का बनाकर बंद करना | प्लेटलेट तथा स्कंदन-प्रोटीन | अत्यंत कठिन |
| संक्रमण से लड़ना | श्वेत रक्त कणिकाएँ | अभी संभव नहीं |
| पोषक तत्वों, हार्मोनों तथा अपशिष्टों का परिवहन | प्लाज्मा | आंशिक रूप से संभव |
विज्ञान अभी कहाँ है। दो दिशाओं में प्रयास हो रहे हैं। एक में लाल कणिकाओं से निकाले गए हीमोग्लोबिन को रासायनिक रूप से परिवर्तित किया जाता है जिससे वह अकेले ही सुरक्षित रूप से ऑक्सीजन वहन कर सके। दूसरे में परफ्लुओरोकार्बन पायसों का उपयोग होता है — ऐसे कोलॉइड जिनमें ऑक्सीजन सरलता से घुलती है और ऊतकों तक पहुँचकर मुक्त हो जाती है। दोनों कुछ आपात स्थितियों में समय पाने के लिए प्रयुक्त भी होने लगे हैं, परंतु न कोई थक्का बनाता है, न संक्रमण से लड़ता है, न वास्तविक रक्त जितनी देर टिकता है।
ऐसा कृत्रिम विकल्प इतना महत्वपूर्ण क्यों होगा: उसे रक्त समूह से मिलाना नहीं पड़ता, अतः वह किसी को भी तुरंत दिया जा सकता; उसे बिना प्रशीतन लंबे समय तक भंडारित करके दूरस्थ स्थानों तक ले जाया जा सकता; और उससे संक्रमण फैलने का कोई भय नहीं होता। तब तक उत्तर वही है जो पृष्ठ 87 पर दिया है — रक्तदान कीजिए। अपकेंद्रण द्वारा प्लाज्मा, प्लेटलेट, श्वेत तथा लाल कणिकाओं में बाँटा गया एक ही दान एक साथ कई रोगियों के काम आ सकता है।
पता लगाइए: आपके विद्यालय के सबसे निकट रक्त बैंक कौन-सा है और वह प्रत्येक पृथक किए गए घटक को किस प्रकार भंडारित करता है? भिन्न-भिन्न घटकों के लिए भिन्न तापमान चाहिए और उनकी भंडारण-अवधि भी बहुत भिन्न होती है।