कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 5 परियोजना कार्य के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
विभिन्न कोलॉइडों का उपयोग करते हुए टिंडल प्रभाव प्रदर्शित कीजिए। प्रयोगों की एक ऐसी शृंखला बनाइए जो यह दर्शाए कि किस प्रकार कोलॉइडों में प्रकाश का प्रकीर्णन प्रकाश किरण पुँज को दृश्यमान बनाता है। प्रदर्शन के लिए लेसर संकेतक, (सुरक्षा सर्वप्रथम— किसी वयस्क के निरीक्षण में इसका उपयोग करें) क्षणदीपों अथवा अन्य प्रकाश स्रोतों का उपयोग कीजिए।
उत्तर

अच्छे प्रदर्शन में क्या-क्या होना चाहिए: नियंत्रण के रूप में कम-से-कम एक वास्तविक विलयन, कई कोलॉइड, और प्रत्येक बार किरणपुंज का पार्श्व से लंबवत दिशा में अवलोकन — जिससे परिणाम एक तुलना बने, केवल एक अवलोकन नहीं।

नमूना योजना

  1. पाँच एक-जैसे काँच के गिलास लीजिए और उनमें भरिए: (1) सादा जल, (2) स्वच्छ चीनी अथवा नमक का विलयन, (3) जल में दुग्ध की दो बूँदें, (4) साबुन के विलयन की कुछ बूँदों वाले जल में तेल की एक बूँद डालकर हिलाया हुआ मिश्रण, (5) जल में अत्यंत तनु स्टार्च का लेप।
  2. कक्ष को अंधेरा कीजिए। प्रत्येक गिलास में से बारी-बारी से लेसर संकेतक अथवा टॉर्च का संकीर्ण किरणपुंज गुजारिए और किरणपुंज को पार्श्व से, उसके लंबवत दिशा में देखिए।
  3. प्रत्येक के लिए अभिलेखित कीजिए: क्या किरणपुंज का मार्ग दिखाई देता है? वह चमकीला है अथवा मंद?
प्रतिदर्शमिश्रण का प्रकारअपेक्षित अवलोकन
जल; चीनी का विलयनविलयनकिरणपुंज का मार्ग दिखाई नहीं देता
तनु किया हुआ दुग्धकोलॉइड (पायस)किरणपुंज का मार्ग स्पष्ट दिखाई देता है
जल में साबुन और तेलकोलॉइड (पायस)किरणपुंज का मार्ग दिखाई देता है
तनु स्टार्च का लेपकोलॉइडकिरणपुंज का मार्ग दिखाई देता है
यह प्रदर्शन क्या सिद्ध करता है: सभी प्रतिदर्श आँख को स्वच्छ अथवा लगभग स्वच्छ दिखते हैं, फिर भी किरणपुंज उनमें बिल्कुल भिन्न व्यवहार करता है। यह अंतर केवल कणों के आकार से ही आ सकता है — कोलॉइडी कण प्रकाश प्रकीर्णित करने योग्य बड़े हैं, घुले हुए कण नहीं। अतः टिंडल प्रभाव कोलॉइड को वास्तविक विलयन से पहचानने का व्यावहारिक परीक्षण है, जहाँ आँख असमर्थ रहती है।
सुरक्षा सर्वोपरि: लेसर किरणपुंज में कभी न देखिए और न ही उसे किसी की ओर कीजिए। इसका उपयोग केवल किसी वयस्क के निरीक्षण में कीजिए।
प्र2.
विभिन्न यौगिकों (जैसे— साधारण नमक, एप्सम लवण, चीनी, बोरेक्स, निकेल सल्फेट इत्यादि) के क्रिस्टल बनाइए। उनका किसी आवर्धित लेंस अथवा सूक्ष्मदर्शी से अवलोकन कीजिए। उनके रंगों तथा आकारों को नोट कीजिए।
उत्तर

विधि। प्रत्येक यौगिक को गुनगुने जल में तब तक घोलिए जब तक और न घुले — अर्थात संतृप्त विलयन बन जाए। उसे गर्म अवस्था में ही छानिए, स्वच्छ पात्र में डालकर ढक दीजिए और स्थिर रखकर धीरे-धीरे ठंडा होने दीजिए। एक-दो दिन बाद क्रिस्टल निकालिए, थोड़े ठंडे जल से धोइए और वॉच ग्लास पर सुखाइए। प्रत्येक को आवर्धक लेंस से देखिए और उसका चित्र बनाइए।

यौगिकरंगक्रिस्टल का सामान्य आकार
साधारण नमक (सोडियम क्लोराइड)रंगहीन / श्वेतघन
चीनीरंगहीनलंबे छह-फलकीय खंड (जैसे मिश्री में)
एप्सम लवण (मैग्नीशियम सल्फेट)रंगहीनलंबी सूइयाँ
बोरेक्सश्वेतछोटे प्रिज़्म
कॉपर सल्फेट / निकेल सल्फेटनीला / हरातिरछे मोटे खंड
प्रत्येक यौगिक का अपना आकार क्यों होता है: क्रिस्टल वह ठोस है जिसके कण एक नियमित ज्यामितीय प्रतिरूप में सज्जित होते हैं। यह प्रतिरूप कणों के आकार और उनके पारस्परिक आकर्षण से तय होता है, और प्रत्येक यौगिक के लिए भिन्न होता है। चूँकि यह प्रतिरूप सभी दिशाओं में एक-सा दोहराया जाता है, क्रिस्टल का बाहरी आकार भीतरी व्यवस्था को ही दर्शाता है — इसीलिए मेज पर पड़े नमक का प्रत्येक दाना एक नन्हा घन होता है। विलयनों को धीरे-धीरे ठंडा कीजिए: यह ठीक क्रियाकलाप 5.3 वाला प्रयोग है, और धीमा शीतलन ही बड़े तथा सुरूपित क्रिस्टल देता है।
प्र3.
क्या लाल पत्तियों में भी हरित वर्णक होता है? कागज वर्णलेखिकी द्वारा इसकी जाँच कीजिए।
उत्तर

अपेक्षित उत्तर: हाँ, अधिकांश लाल पत्तियों में क्लोरोफिल भी होता है — लाल वर्णक उसे केवल ढक देता है। कागज वर्णलेखिकी उस हरे रंग को उजागर कर सकती है।

विधि

  1. कुछ लाल पत्तियाँ (क्रोटन, लाल चौलाई अथवा लाल कोलियस की पत्ती) खरल में थोड़ी रेत और 5 mL ऐल्कोहॉल के साथ पीसकर रंगीन सत्व बनाइए। नियंत्रण के रूप में एक सामान्य हरी पत्ती के साथ भी यही कीजिए।
  2. वर्णलेखन कागज की पट्टी पर निचले सिरे से 2 cm ऊपर पेंसिल से रेखा खींचिए और उस पर सत्व का एक छोटा बिंदु लगाइए। सूखने पर उसी स्थान पर कई बार और बिंदु लगाइए, जिससे बिंदु छोटा परंतु सांद्र रहे।
  3. पट्टी को ऐसे जार में खड़ा कीजिए जिसमें ऐल्कोहॉल की पतली परत हो और विलायक का स्तर बिंदु से नीचे रहे। जार ढककर स्थिर रखिए।
  4. जब विलायक लगभग शीर्ष तक चढ़ जाए तो पट्टी निकालकर विलायक-अग्रभाग को चिह्नित कीजिए और सूखने दीजिए।

आपको क्या दिखना चाहिए: एक ही बिंदु कई पट्टियों में बँट जाता है — प्रायः एक लाल अथवा बैंगनी पट्टी, क्लोरोफिल की एक हरी पट्टी और अक्सर कैरोटिनॉइड की एक पीली-नारंगी पट्टी। हरी पट्टी ही यह सिद्ध करती है कि लाल पत्ती में क्लोरोफिल है।

वर्णक पृथक क्यों होते हैं: प्रत्येक वर्णक को कागज अलग-अलग सीमा तक रोकता है और ऐल्कोहॉल अलग-अलग सीमा तक घोलता है। जो वर्णक सरलता से घुलता है और दुर्बलता से चिपकता है वह पट्टी पर बहुत ऊपर तक चला जाता है; जो प्रबलता से चिपकता है वह आरंभ के पास रह जाता है। चूँकि किन्हीं दो वर्णकों का यह संतुलन एक जैसा नहीं होता, प्रत्येक अपनी ऊँचाई पर रुक जाता है। और लाल पत्ती में हरा वर्णक अदृश्य क्यों रहता है? क्योंकि लाल वर्णक कहीं अधिक प्रबलता से प्रकाश अवशोषित और परावर्तित करता है और हरे को आँख से छिपा देता है — परंतु वर्णलेखिकी वर्णकों को भौतिक रूप से अलग कर देती है, अतः छिपना संभव नहीं रहता।
प्र4.
आप खाद्य वर्णकों (हरा, नारंगी, पीला इत्यादि) अथवा रंगीन मुखवासों (सौंफ) में उपस्थित संघटकों की संख्या ज्ञात करने के लिए वर्णलेखिकी का प्रयोग कर सकते हैं।
उत्तर

विधि। थोड़ा-सा खाद्य वर्णक, अथवा चीनी-लिपटी रंगीन सौंफ के कुछ दानों से उतारा गया रंग, जल की कुछ बूँदों में घोलिए। इस रंगीन द्रव का बिंदु वर्णलेखन पट्टी की पेंसिल-रेखा पर लगाइए, सुखाइए, और पट्टी को जल (अथवा 2 % m/v लवण विलयन) में इस प्रकार खड़ा कीजिए कि विलायक का स्तर बिंदु से नीचे रहे। विलायक को ऊपर चढ़ने दीजिए, फिर पट्टी सुखा लीजिए।

परिणाम कैसे पढ़ें

  • धब्बे गिनिए। अलग-अलग रंगीन धब्बों की संख्या ही उस रंग में उपस्थित घटकों (रंजकों) की संख्या है।
  • क्रम देखिए। सबसे ऊपर वाला धब्बा उस रंजक का है जिसे विलायक सबसे अधिक आकर्षित करता है और कागज सबसे कम रोकता है।
  • रंगों की तुलना कीजिए। हरे और पीले खाद्य रंग को साथ-साथ चलाइए; प्रायः पाएँगे कि हरा एक नीले और एक पीले धब्बे में बँट जाता है और पीला धब्बा शुद्ध पीले रंजक से मेल खाता है।
प्रतिदर्शसामान्य परिणामनिष्कर्ष
हरा खाद्य रंगदो धब्बे — नीला और पीलादो रंजकों का मिश्रण
नारंगी खाद्य रंगप्रायः एक लाल और एक पीला धब्बाएक मिश्रण
रंगीन सौंफ का आवरणब्रांड के अनुसार एक अथवा अधिक धब्बेबताता है कि कौन-से रंजक प्रयुक्त हुए हैं
वर्णलेखिकी घटक गिन क्यों सकती है: यह विधि चलने की गति के आधार पर पृथक करती है, और प्रत्येक पदार्थ की अपनी गति होती है। अतः तैयार पट्टी पर एक धब्बे का अर्थ है एक पदार्थ। इसी कारण खाद्य-परीक्षण प्रयोगशालाओं में यह जाँचने के लिए वर्णलेखिकी प्रयुक्त होती है कि किसी मिठाई अथवा पेय में कौन-से रंग मिलाए गए हैं, और चिकित्सालयों में रक्त तथा मूत्र के पदार्थों की पहचान के लिए भी।
प्र5.
ऐसे शैक्षिक खेल की अभिकल्पना कीजिए जिसमें खिलाड़ी पारस्परिक चुनौतियों और व्यावहारिक क्रियाकलापों द्वारा विभिन्न मिश्रणों को पहचानने एवं पृथक्करण करने की तकनीकों का अनुप्रयोग कर सकें।
उत्तर

अच्छे खेल में क्या होना चाहिए: एक मिश्रण, यह सोचने का कारण कि उसके घटकों में कौन-सा गुणधर्म भिन्न है, और तुरंत यह प्रतिक्रिया कि चुनी गई तकनीक वास्तव में काम करेगी या नहीं।

नमूना उत्तर — “पृथक्करण जोड़ी”

  • सामग्री। दो प्रकार के कार्ड। मिश्रण-कार्ड: रेत + नमक, तेल + जल, कर्पूर + रेत, पंकिल जल, रक्त, काली स्याही, समुद्री जल, ऐसीटोन + जल, पीतल, चीनी + जल। तकनीक-कार्ड: निस्यंदन, ऊर्ध्वपातन, पृथक्कारी कीप, अपकेंद्रण, स्कंदन, वर्णलेखिकी, आसवन, वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण, “भौतिक विधियों से पृथक नहीं किया जा सकता”।
  • कैसे खेलें। एक मिश्रण-कार्ड पलटिए। जो खिलाड़ी सबसे पहले सही तकनीक-कार्ड रखे वह जोड़ी जीतता है — परंतु तभी, जब वह उस गुणधर्म का नाम भी बता सके जिसका उपयोग हो रहा है (आकार, विलेयता, घनत्व, क्वथनांक, ऊर्ध्वपातित होने की क्षमता, कागज पर चलने की गति)। कारण गलत तो अंक नहीं।
  • शृंखला चक्र। कुछ मिश्रण-कार्ड, जैसे रेत + नमक + नैफ्थलीन, तीन तकनीक-कार्ड सही क्रम में माँगते हैं। सही क्रम पर दुगुने अंक।
  • जाल-कार्ड। पीतल का उत्तर है “भौतिक विधियों से पृथक नहीं किया जा सकता” — धातुएँ परमाणुओं के स्तर पर मिली हुई हैं। जो इसके लिए कोई तकनीक-कार्ड रखे उसकी एक बारी छूट जाती है।
  • व्यावहारिक चक्र। प्रत्येक पाँचवीं बारी पर पूरा समूह उपलब्ध उपकरणों से वह पृथक्करण प्रयोगशाला में वास्तव में करके दिखाता है।
यह खेल अध्याय क्यों सिखाता है: यह वही एक आदत डालता है जो सबसे महत्वपूर्ण है — तकनीक चुनने से पहले यह पूछना कि घटकों में कौन-सा गुणधर्म भिन्न है। गुणधर्म का नाम बताना विधि का नाम बताने से अधिक मूल्यवान है, क्योंकि किसी नई, अनदेखी स्थिति में विद्यार्थी को यही तर्क दोहराना पड़ता है।
प्र6.
यदि आप किसी खुले स्थान में शिविर लगा रहे हैं और स्वच्छ जल कम पड़ जाए तो आप आसवन विधि द्वारा स्वच्छ जल प्राप्त कर सकते हैं। क्या आप वहाँ उपलब्ध वस्तुओं से ऐसी व्यवस्था बनाने के विषय में सोच सकते हैं?
उत्तर

हाँ। शिविर के आसवन उपकरण के लिए केवल तीन चीजें चाहिए: मैले जल को गर्म करने का साधन, वाष्प के संघनित होने के लिए एक ठंडी सतह, और बूँदें पकड़ने के लिए एक पात्र

नमूना उत्तर — बर्तन और ढक्कन वाला आसवन उपकरण

  1. एक बड़े पतीले को आधा पंकिल अथवा खारे जल से भरिए। पतीले के भीतर एक पत्थर पर एक छोटी खाली कटोरी इस प्रकार रखिए कि उसका किनारा जल-स्तर से ऊपर रहे।
  2. पतीले को उसके ढक्कन से उल्टा करके ढकिए, जिससे ढक्कन बीच की ओर ढलान बनाए और उसका सबसे निचला बिंदु ठीक कटोरी के ऊपर आए।
  3. उल्टे ढक्कन पर कुछ ठंडे पत्थर अथवा ठंडे जल में भिगोया कपड़ा रख दीजिए जिससे वह ठंडा बना रहे।
  4. पतीले को शिविर की आग पर धीरे-धीरे गर्म कीजिए। जल वाष्प बनता है, वाष्प ऊपर उठकर ठंडे ढक्कन से टकराती है, बूँदों में संघनित होती है, ढक्कन के सबसे निचले बिंदु तक बहकर कटोरी में टपकती है।
  5. कुछ समय बाद कटोरी निकाल लीजिए। उसमें स्वच्छ आसुत जल है; मैल, नमक और रोगाणु पतीले में ही रह जाते हैं।

यदि आग न हो तो सौर व्यवस्था। एक गड्ढा खोदिए, बीच में पात्र रखिए, उसके चारों ओर मैला जल डालिए, और गड्ढे पर पारदर्शी प्लास्टिक की चादर तानकर उसके केंद्र पर एक छोटा पत्थर रख दीजिए। सूर्य जल को वाष्पित करता है, वाष्प चादर के नीचे संघनित होकर उसके निचले बिंदु से पात्र में टपकती है।

टपकने वाला जल सुरक्षित क्यों है: वाष्प केवल जल ही बनता है। घुले हुए लवण, मिट्टी के कण और अधिकांश रोगाणु अवाष्पशील हैं — वे वाष्प में जा ही नहीं सकते, अतः पतीले में ही रह जाते हैं। इसलिए ठंडी सतह पर जो संघनित होता है वह केवल जल है। चित्र 5.12 के प्रयोगशाला आसवन उपकरण का सिद्धांत ठीक यही है: उल्टा ढक्कन संघनित्र का काम कर रहा है और कटोरी एकत्रण-पात्र का।
सुरक्षा सर्वोपरि: गर्म ढक्कन कपड़े से पकड़िए, और आग किसी वयस्क के नियंत्रण में ही रहे।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ