प्र1.
समान घनत्व के दो अमिश्रणीय द्रवों को पृथक्करण कीप में मिलाया जाए तो उसमें परतें कैसे बनेंगी?
उत्तर
वे एक के ऊपर एक स्पष्ट परतें बनाएँगे ही नहीं, और पृथक्कारी कीप उन्हें पृथक करने में असफल रहेगी।
ऐसा क्यों होता है: पृथक्कारी कीप केवल इसलिए कार्य करती है कि गुरुत्व अधिक घनत्व वाले द्रव पर प्रबलता से लगकर हल्के द्रव को ऊपर धकेल देता है। यदि दोनों घनत्व समान हों तो किसी भी द्रव पर कोई नेट ऊपरी या निचला धक्का नहीं रहता — किसी के पास तैरने अथवा डूबने का कोई कारण नहीं बचता। एक द्रव की बूँदें दूसरे में बिखरी रह जाती हैं, अतः मिश्रण बहुत समय तक धुँधला बना रहता है और यदि अंततः बैठ भी जाए तो सीमा धुँधली रहती है और उसका स्थान अनिश्चित। द्रव तब भी मिलते नहीं (वे अमिश्रणीय ही रहते हैं और अलग बूँदें बनाते हैं), परंतु वे परतों में सजते नहीं।
इसके स्थान पर क्या किया जा सकता है:
- अपकेंद्रण — नलिका को घुमाने पर गुरुत्व से कई गुना प्रबल बल उत्पन्न होता है, और तब घनत्व का बहुत थोड़ा अंतर भी एक द्रव को बाहर की ओर धकेलने के लिए पर्याप्त होता है।
- किसी एक का घनत्व बदल दीजिए — उदाहरणार्थ जलीय परत में कोई लवण घोलकर उसे अधिक घना बना दीजिए, जिससे दोनों सामान्य रूप से पृथक हो जाएँ।
- आसवन, यदि दोनों द्रवों के क्वथनांकों में पर्याप्त अंतर हो, क्योंकि यह विधि घनत्व पर निर्भर ही नहीं करती।