प्र1.
इसे प्रयोगशाला स्टैंड पर स्थिर रहने दीजिए। (चित्र 5.16) आप क्या देखते हैं?
उत्तर
उँडेलने से आरंभ में धुँधला दिखने वाला मिश्रण शीघ्र ही दो स्पष्ट पृथक परतों में बँट जाता है — रंगहीन जल (20 mL) की परत पर तैरती पीले सरसों के तेल (5 mL) की परत, और दोनों के बीच सपाट, स्पष्ट दिखाई देने वाली सीमा।
ऐसा क्यों होता है: सरसों का तेल और जल अमिश्रणीय हैं: उनके अणु अपनी ही जाति के अणुओं को दूसरी जाति की तुलना में कहीं अधिक आकर्षित करते हैं, अतः वे एक-दूसरे में फैलते नहीं। स्थिर रखने पर गुरुत्व दोनों द्रवों को केवल घनत्व के आधार पर छाँट देता है — अधिक घनत्व वाला नीचे बैठता है और हल्का ऊपर तैरता है — और एक बार छँट जाने के बाद उन्हें फिर मिलाने वाला कुछ नहीं रहता।