कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 6 अभ्यास प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
एक क्षैतिज बल F का उपयोग करके किसी मेज को फर्श पर नियत वेग से गति प्रदान की जाती है। फर्श द्वारा मेज पर लगाया गया घर्षण बल कितना है?
उत्तर

घर्षण बल F है — परिमाण में लगाए गए बल के बराबर और दिशा में विपरीत।

वेग नियत है → a = 0 m s–2
परिणामी क्षैतिज बल = ma = m × 0 = 0 N

क्षैतिज बल: लगाया गया बल F (आगे), घर्षण बल F (पीछे)
F – F = 0
F = F, गति की विपरीत दिशा में
ऐसा क्यों होता है: नियत वेग परिणामी बल शून्य होने का लक्षण है (न्यूटन का प्रथम नियम)। मेज पर केवल दो ही क्षैतिज बल हैं — आपका बल और घर्षण बल — अतः वे ठीक-ठीक निरस्त होने चाहिए। ध्यान दीजिए कि यहाँ घर्षण बल आपके बल से "कम" नहीं है; कम होता तो मेज त्वरित हो रही होती।
संकेत: यदि F घर्षण बल से बड़ा होता तो मेज त्वरित होती; छोटा होता तो मंदित होती। नियत वेग दोनों को बराबर होने पर बाध्य कर देता है।
प्र2.
एक चिकनी घर्षण रहित सतह पर गतिमान गेंद के लिए सही शब्द का चयन कर निम्नलिखित कथनों को सत्य कथन बनाइए। (i) यदि गेंद पर कोई परिणामी बल नहीं लगाया जाता है तो गेंद का वेग समान रहेगा/ बढ़ेगा/ घटेगा। (ii) यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण समान रहेगा/ बढ़ेगा/ घटेगा। (iii) यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा के विपरीत दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण समान रहेगा/ बढ़ेगा/ घटेगा।
उत्तर
भागसही विकल्पकारण
(i) कोई परिणामी बल नहींसमान रहेगाa = F/m = 0 ÷ m = 0 m s–2; वेग बदल ही नहीं सकता (न्यूटन का प्रथम नियम)
(ii) गति की दिशा में परिणामी बलबढ़ेगात्वरण वेग की दिशा में है, अतः गेंद तेज होती है
(iii) गति की विपरीत दिशा में परिणामी बलघटेगात्वरण वेग के विपरीत है — मंदन, अतः गेंद धीमी होती है
बल की दिशा ही सब कुछ क्यों तय करती है: न्यूटन का द्वितीय नियम कहता है कि त्वरण सदैव परिणामी बल की दिशा में होता है। यदि वह दिशा वेग से मेल खाती है तो प्रत्येक सेकंड चाल बढ़ाता है; यदि वेग के विपरीत है तो प्रत्येक सेकंड चाल घटाता है। "घर्षण रहित" इसलिए कहा गया है ताकि आप जान लें कि कोई छिपा हुआ विरोधी बल नहीं है — जो कुछ होगा वह पूर्णत: बताए गए परिणामी बल के कारण होगा।
प्र3.
एक चिकनी क्षैतिज सतह पर विद्यमान दो गुटके P और Q चित्र 6.36 (क) और चित्र 6.36 (ख) में दर्शाए गए हैं। गुटके P पर 4 N और 5 N परिमाण के दो बल विपरीत दिशाओं में कार्य कर रहे हैं जबकि गुटका Q नियत वेग से गतिमान है। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है? (i) P पर परिणामी बल लगता है और Q पर परिणामी बल नहीं लगता है। (ii) P पर परिणामी बल नहीं लगता है और Q पर परिणामी बल लगता है। (iii) P और Q दोनों पर परिणामी बल लगता है। (iv) न तो P और न ही Q पर परिणामी बल लगता है।
उत्तर

सही कथन (i) — P पर परिणामी बल लगता है और Q पर परिणामी बल नहीं लगता है है।

गुटका P: 5 N दाईं ओर, 4 N बाईं ओर (चित्र 6.36 क)
बल विपरीत हैं, अतः घटाइए
परिणामी बल = 5 N – 4 N = 1 N, दाईं ओर → शून्येतर

गुटका Q: नियत वेग से गतिमान (चित्र 6.36 ख)
a = 0 m s–2 → परिणामी बल = ma = 0 N
P 5 N 4 N परिणामी 1 N → (क) Q नियत वेग → परिणामी बल = 0 (ख)
P पर बल असंतुलित हैं (परिणामी 1 N दाईं ओर); Q नियत वेग से चल रहा है, अतः उस पर परिणामी बल शून्य है।
Q गतिमान होते हुए भी परिणामी बल-रहित क्यों है: गति के लिए बल की आवश्यकता नहीं होती, केवल गति में परिवर्तन के लिए होती है। Q का वेग नियत है, अतः उसका त्वरण शून्य है, और F = ma से उस पर परिणामी बल भी शून्य होना चाहिए।
प्र4.
सर्प नौका दौड़ (केरल में वल्लुम कल्ली) के अभ्यास के समय 100 नाविक एक नौका को एक साथ खे (चला) रहे हैं। इनमें से 95 नाविक नौका को आगे बढ़ाने के लिए पीछे की ओर चप्पू चलाते हैं। त्रुटिवश 5 नाविक विपरीत दिशा में चप्पू चलाते हैं। यदि प्रत्येक नाविक 200 N का क्षैतिज बल लगाता है तो बताइए सर्प नौका पर लगने वाला परिणामी बल कितना है? (कर्षण बल (drag force), वायु घर्षण आदि की उपेक्षा कीजिए।)
उत्तर

परिणामी बल 18 000 N, आगे की दिशा में है।

प्रत्येक नाविक का बल = 200 N

आगे बढ़ाने वाला समूह: 95 नाविक
Fआगे = 95 × 200 N = 19 000 N

विरोध करने वाला समूह: 5 नाविक
Fपीछे = 5 × 200 N = 1 000 N

दोनों समूह विपरीत दिशाओं में धकेलते हैं, अतः घटाइए
परिणामी बल = 19 000 N – 1 000 N = 18 000 N, आगे की ओर
ऐसा क्यों होता है: एक ही दिशा के बल परिमाण में जुड़ते हैं और विपरीत दिशा के घटते हैं, तथा परिणामी बल बड़े योग की दिशा में होता है। त्रुटिवश उल्टा चप्पू चलाने वाले 5 नाविक केवल सहायता नहीं करते, बल्कि 5 सही नाविकों का प्रभाव भी निरस्त कर देते हैं — अतः सभी 100 के सही चलाने (20 000 N) की तुलना में 2 × 1 000 N = 2 000 N की हानि होती है।
स्वयं जाँचिए: प्रभावी नाविकों की संख्या 95 – 5 = 90 है, और 90 × 200 N = 18 000 N — वही उत्तर, और भी शीघ्र।
प्र5.
जब किसी वस्तु पर परिणामी बल लगता है तो हम देखते हैं कि वस्तु त्वरित होती है— (i) त्वरण बल की दिशा के विपरीत दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है। (ii) त्वरण बल की दिशा के विपरीत दिशा में और वस्तु के द्रव्यमान के समानुपाती होता है। (iii) त्वरण बल की दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। (iv) त्वरण बल की दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है।
उत्तर

सही विकल्प (iv) — त्वरण बल की दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है है।

न्यूटन का द्वितीय नियम: a = F ÷ m, अर्थात F = ma
a की दिशा = परिणामी बल F की दिशा
m नियत होने पर: a ∝ F (बल दोगुना, त्वरण दोगुना)
F नियत होने पर: a ∝ 1 ÷ m (द्रव्यमान दोगुना, त्वरण आधा)
विकल्पनिर्णयक्या गलत है
(i)गलतदिशा गलत है; त्वरण परिणामी बल की ही दिशा में होता है
(ii)गलतदिशा भी गलत, और a द्रव्यमान का समानुपाती नहीं, व्युत्क्रमानुपाती है
(iii)गलतa बल का समानुपाती है, व्युत्क्रमानुपाती नहीं
(iv)सहीa = F/m से पूर्णत: मेल खाता है
इसके पीछे का प्रमाण: क्रियाकलाप 6.3 ने दिखाया कि द्रव्यमान नियत रखकर बल दोगुना करने पर त्वरण लगभग दोगुना हो जाता है। क्रियाकलाप 6.4 ने दिखाया कि बल नियत रखकर द्रव्यमान दोगुना करने पर त्वरण लगभग आधा रह जाता है। दोनों मिलकर a = F/m देते हैं।
प्र6.
एक सीधी रेखा के अनुदिश गतिमान चार वस्तुओं A, B, C और D के लिए स्थिति-समय ग्राफ (चित्र 6.37) में दर्शाए गए हैं। इनमें से किस पर एक परिणामी बल कार्य करता है — (i) वस्तु A (ii) वस्तु B (iii) वस्तु C (iv) वस्तु D
उत्तर

सही विकल्प (iii) — वस्तु C है।

वस्तुस्थिति-समय ग्राफ का आकारढाल क्या बताती हैपरिणामी बल
Aऊपर की ओर झुकी सीधी रेखानियत धनात्मक वेगशून्य
Bक्षैतिज सीधी रेखास्थिति नहीं बदल रही — वस्तु विरामावस्था में हैशून्य
Cउत्तरोत्तर तीव्र होती वक्र रेखावेग बढ़ रहा है — वस्तु त्वरित हो रही हैशून्येतर
Dनीचे की ओर झुकी सीधी रेखानियत ऋणात्मक वेग (एकसमान दर से पीछे लौटना)शून्य
स्थिति-समय ग्राफ की ढाल = वेग
सीधी रेखा (A, B, D) → नियत ढाल → नियत वेग → a = 0 → परिणामी F = ma = 0 N
वक्र रेखा (C) → बदलती ढाल → बदलता वेग → a ≠ 0 → परिणामी F ≠ 0
वस्तु A वस्तु B वस्तु C वस्तु D प्रत्येक ग्राफ में ऊर्ध्वाधर अक्ष पर स्थिति और क्षैतिज अक्ष पर समय है
केवल C वक्र है। बदलती ढाल का अर्थ है बदलता वेग, और केवल बदलते वेग के लिए ही परिणामी बल चाहिए।
इस प्रश्न का छल: D नीचे की ओर झुकी है जो देखने में नाटकीय लगती है, परंतु किसी भी ढाल की सीधी रेखा का अर्थ है नियत वेग — वस्तु बस ऋणात्मक दिशा में एकसमान दर से चल रही है। रेखा की तीव्रता चाल बताती है; वक्रता त्वरण बताती है।
प्र7.
कोई नाविक किसी छोटी नौका से तट पर कूदता है (चित्र 6.38)। जैसे ही नाविक आगे की ओर कूदता है तो क्या नौका गति करेगी? यदि हाँ, तो किस दिशा में और क्यों?
उत्तर

हाँ — नौका पीछे की ओर, अर्थात तट से दूर की ओर गति करेगी।

नाविक आगे कूदने के लिए नौका को पीछे की ओर बल F से धकेलता है
न्यूटन के तृतीय नियम से नौका नाविक को आगे की ओर उतने ही बल F से धकेलती है
जल बहुत कम घर्षण देता है, अतः नौका पर पीछे का बल लगभग निर्विरोध है
aनौका = F ÷ mनौका, तट से दूर की दिशा में
नौका की गति इतनी स्पष्ट क्यों दिखती है: नौका छोटी है, अतः उसका द्रव्यमान नाविक के द्रव्यमान से बहुत अधिक नहीं है, और वह जल पर तैर रही है जहाँ घर्षण लगभग नगण्य है। इसलिए वही बराबर और विपरीत बल नौका में सरलता से दिखने वाला त्वरण उत्पन्न कर देता है। यदि नाविक घाट से बँधे किसी भारी जहाज से कूदता तो उतना ही बल कहीं कम त्वरण देता और आपको दिखाई ही न देता।
संकेत: इसीलिए नाविक को पहले नौका बाँधने को कहा जाता है। यदि धक्का देते समय नौका पीछे खिसक जाए तो आपके बल का कुछ भाग व्यर्थ चला जाता है और आप जल में गिर सकते हैं।
प्र8.
ऊँची कूद प्रतियोगिता में खिलाड़ी सतह पर सुरक्षित गिरें इसके लिए रेत या फोम के गद्दे की व्यवस्था की जाती है (चित्र 6.39)। इसके पीछे का कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर

गद्दा उस समय को बढ़ा देता है जिसमें खिलाड़ी का वेग घटकर शून्य होता है, जिससे त्वरण और इसलिए खिलाड़ी पर लगने वाला बल घट जाता है।

खिलाड़ी नीचे की ओर वेग u से गिरता है और v = 0 पर रुकता है
a = (v – u) ÷ t = –u ÷ t
F = ma = –mu ÷ t

सतह कठोर हो या नरम, m और u वही रहते हैं
नरम गद्दा → t बहुत अधिक → |a| बहुत कम → |F| बहुत कम

प्रभाव का परिमाण देखिए। मान लीजिए m = 60 kg और u = 6 m s–1

गिरने की सतहरुकने का समय ta = u ÷ tF = ma
कठोर भूमि0.02 s300 m s–218 000 N
फोम का गद्दा / रेत0.50 s12 m s–2720 N
ऐसा क्यों होता है: गद्दा यह नहीं बदल सकता कि खिलाड़ी कितने वेग से आ रहा है, केवल यह बदल सकता है कि वह कितनी सौम्यता से रुकेगा। फोम या रेत दबते हैं, इसलिए वही वेग-परिवर्तन कहीं अधिक समय में होता है, त्वरण घट जाता है और F = ma से हड्डियों तथा जोड़ों पर लगने वाला बल इस उदाहरण में लगभग 25 गुना कम हो जाता है। यही तर्क गेंद लपकते समय हाथ पीछे खींचने, कार के एयरबैग और काँच की बुलबुलों वाली पैकिंग पर भी लागू होता है।
प्र9.
सब्जियों से भरी हुई एक ठेलागाड़ी किसी अन्य प्रत्येक दृष्टि से उसी के समान परंतु खाली ठेलागाड़ी से टकराती है। टकराव के समय— (i) भरी हुई ठेलागाड़ी, खाली ठेलागाड़ी पर अधिक परिमाण का बल लगाती है। (ii) खाली ठेलागाड़ी, भरी हुई ठेलागाड़ी पर अधिक परिमाण का बल लगाती है। (iii) दोनों में से कोई भी ठेलागाड़ी दूसरी ठेलागाड़ी पर बल नहीं लगाती है। (iv) भरी हुई ठेलागाड़ी और खाली ठेलागाड़ी दोनों एक-दूसरे पर समान परिमाण का बल लगाती हैं।
उत्तर

सही विकल्प (iv) — दोनों ठेलागाड़ियाँ एक-दूसरे पर समान परिमाण का बल लगाती हैं है।

न्यूटन का तृतीय नियम: जब भी कोई वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है,
दूसरी वस्तु भी उसी समय पहली पर बराबर और विपरीत बल लगाती है

F (भरी → खाली) = F (खाली → भरी), परिमाण में
दोनों बल दिशा में विपरीत हैं और अलग-अलग ठेलागाड़ियों पर लगते हैं

परंतु त्वरण बराबर नहीं होते —
aखाली = F ÷ mखाली, aभरी = F ÷ mभरी
mभरी > mखालीaखाली > aभरी
यह उत्तर पहले गलत क्यों लगता है: हम खाली ठेलागाड़ी को दूर छिटकते देखते हैं और मान लेते हैं कि उस पर अधिक बल लगा। वस्तुतः हम उसका अधिक त्वरण देख रहे होते हैं, अधिक बल नहीं। बल बराबर हैं; द्रव्यमान बराबर नहीं हैं, और शेष काम a = F/m कर देता है। न्यूटन का तृतीय नियम परस्पर क्रिया करने वाली वस्तुओं के द्रव्यमान का उल्लेख तक नहीं करता।
क्या आप जानते हैं? यही तर्क उदाहरण 6.7 को समझाता है — पृथ्वी और फल एक-दूसरे को बराबर बल से खींचते हैं, परंतु पृथ्वी का विशाल द्रव्यमान उसके त्वरण को इतना कम कर देता है कि वह संज्ञान में ही नहीं आता।
प्र10.
विभिन्न द्रव्यमानों वाली वस्तुओं पर लगाए गए किसी बल द्वारा उत्पन्न त्वरण के संगत त्वरण-द्रव्यमान ग्राफ चित्र 6.40 में दर्शाया गया है। इस स्थिति के लिए बल-द्रव्यमान ग्राफ आलेखित कीजिए।
उत्तर

बल-द्रव्यमान ग्राफ F = 10 N पर एक क्षैतिज सरल रेखा होगा, क्योंकि प्रत्येक वस्तु पर वही बल लगाया गया था।

चित्र 6.40 से मानों के युग्म पढ़िए और F = ma लगाइए —

m = 1 kg, a = 10.0 m s–2 → F = 1 kg × 10.0 m s–2 = 10 N
m = 2 kg, a = 5.0 m s–2 → F = 2 kg × 5.0 m s–2 = 10 N
m = 4 kg, a = 2.5 m s–2 → F = 4 kg × 2.5 m s–2 = 10 N
m = 5 kg, a = 2.0 m s–2 → F = 5 kg × 2.0 m s–2 = 10 N

प्रत्येक द्रव्यमान के लिए F = 10 N
10 5 15 1 2 3 4 5 द्रव्यमान (kg) बल (N) F = 10 N, नियत
चित्र 6.40 के लिए बल-द्रव्यमान ग्राफ — F = 10 N पर द्रव्यमान-अक्ष के समानांतर एक सरल रेखा।
दोनों ग्राफ इतने भिन्न क्यों दिखते हैं: चित्र 6.40 का त्वरण-द्रव्यमान ग्राफ गिरती हुई वक्र रेखा है क्योंकि a = F/m — F नियत होने पर a, m का व्युत्क्रमानुपाती है, अतः वक्र पहले तेजी से गिरता है और फिर चपटा हो जाता है। प्रत्येक बिंदु को उसी के द्रव्यमान से गुणा करने पर यह व्युत्क्रम संबंध ठीक-ठीक निरस्त हो जाता है और गुणनफल F हर जगह एक-सा आता है। इसलिए क्षैतिज बल-द्रव्यमान रेखा इसी बात का ग्राफीय कथन है कि "प्रत्येक वस्तु पर एक ही बल लगाया गया था"।
प्र11.
सरल रेखा में गतिमान 10 kg द्रव्यमान की किसी वस्तु का वेग-समय ग्राफ चित्र 6.41 में दर्शाया गया है। ग्राफ का उपयोग करके वस्तु पर लगने वाले बल का परिकलन कीजिए।
उत्तर

वस्तु पर लगने वाला बल 25 N है, गति की दिशा में।

चित्र 6.41 से, ग्राफ इन बिंदुओं से होकर जाने वाली सरल रेखा है —
(t = 0 s, v = 10 m s–1), (t = 4 s, v = 20 m s–1), (t = 8 s, v = 30 m s–1)

त्वरण = वेग-समय ग्राफ की ढाल = (v – u) ÷ t
a = (30 m s–1 – 10 m s–1) ÷ (8 s – 0 s)
a = 20 m s–1 ÷ 8 s = 2.5 m s–2

न्यूटन का द्वितीय नियम: F = ma
F = 10 kg × 2.5 m s–2
F = 25 kg m s–2 = 25 N
स्वयं जाँचिए: दूसरे बिंदु-युग्म से — a = (20 – 10) m s–1 ÷ (4 – 0) s = 2.5 m s–2। वही उत्तर, जो पुष्टि करता है कि रेखा वास्तव में सरल है और त्वरण नियत है।
ढाल त्वरण क्यों देती है: त्वरण की परिभाषा ही है वेग में परिवर्तन बटा लिया गया समय, और वेग-समय ग्राफ पर "ऊर्ध्वाधर वृद्धि बटा क्षैतिज वृद्धि" ठीक यही मापती है। रेखा सरल है, इसलिए ढाल — और इसलिए बल — पूरी गति में समान रहता है। वक्र वेग-समय ग्राफ का अर्थ बदलता हुआ बल होता।
प्र12.
100 m s–1 के वेग से गतिमान 50 g द्रव्यमान की कोई गोली एक स्थिर भारी लकड़ी के गुटके में प्रवेश करती है और 50 cm की दूरी तक भेदने के पश्चात रुक जाती है। गोली पर लगने वाले अवरोधक बल का आकलन कीजिए (मान लीजिए कि गुटके के भीतर गोली का त्वरण अचर है)।
उत्तर

अवरोधक बल 500 N है, जो गोली की गति की विपरीत दिशा में लगता है।

पहले SI मात्रकों में बदलिए
m = 50 g = 0.05 kg, u = 100 m s–1, v = 0 m s–1, s = 50 cm = 0.5 m

चरण 1 — त्वरण ज्ञात कीजिए, v2 = u2 + 2as से
(0 m s–1)2 = (100 m s–1)2 + 2 × a × 0.5 m
0 = 10 000 m2 s–2 + (1.0 m) a
a = –10 000 m2 s–2 ÷ 1.0 m = –10 000 m s–2

चरण 2 — बल ज्ञात कीजिए, F = ma से
F = 0.05 kg × (–10 000 m s–2)
F = –500 N
ऋण चिह्न दर्शाता है कि बल गति का विरोध करता है; इसका परिमाण 500 N है
बल इतना बड़ा क्यों है: गोली अपना पूरा 100 m s–1 का वेग लकड़ी में केवल आधे मीटर के भीतर खो देती है। इतनी कम दूरी में इतना बड़ा वेग-परिवर्तन विशाल मंदन देता है, और F = ma उसे बड़े बल में बदल देता है — यद्यपि गोली का द्रव्यमान केवल 50 g है, जिसका भार लगभग 0.49 N ही है। अवरोधक बल गोली के अपने भार से हजार गुना से भी अधिक है।
संकेत: प्रतिस्थापन से पहले ग्राम को किलोग्राम और सेंटीमीटर को मीटर में बदलना अनिवार्य है, अन्यथा उत्तर न्यूटन में नहीं आएगा। 50 g = 0.05 kg और 50 cm = 0.5 m।
प्र13.
एक श्रेष्ठ फुटबॉलर ने फुटबॉल पर 108 km h–1 के वेग से प्रहार करके उसको मिले क्षतिपूरक निशाने (penalty shot) को गोल में परिवर्तित कर दिया। उसके द्वारा लगाया गया अनुमानित बल 800 N था। फुटबॉल का द्रव्यमान 0.4 kg था। उसके पैर और गेंद के मध्य संपर्क समय की गणना कीजिए।
उत्तर

संपर्क समय 0.015 s, अर्थात 15 मिलीसेकंड है।

चरण 1 — वेग को SI मात्रक में बदलिए
v = 108 km h–1 = 108 × 1000 m ÷ 3600 s = 30 m s–1
गेंद विरामावस्था से चलती है, अतः u = 0 m s–1

चरण 2 — त्वरण ज्ञात कीजिए, F = ma से
a = F ÷ m = 800 N ÷ 0.4 kg
a = 2000 kg m s–2 ÷ kg = 2000 m s–2

चरण 3 — संपर्क समय ज्ञात कीजिए, v = u + at से
30 m s–1 = 0 m s–1 + (2000 m s–2) t
t = 30 m s–1 ÷ 2000 m s–2
t = 0.015 s = 15 ms
समय इतना कम क्यों है: केवल 0.4 kg द्रव्यमान पर 800 N का बल 2000 m s–2 का विशाल त्वरण देता है — लगभग g का 200 गुना। इस दर पर गेंद पलक झपकने के अंश में 30 m s–1 तक पहुँच जाती है। इसीलिए फुटबॉल जूते से लगभग तत्काल छूट जाती है और पैर से दबकर उसका आकार बदलते देखने के लिए उच्च गति के कैमरे चाहिए।
संकेत: km h–1 को m s–1 में बदलने के लिए 5/18 से गुणा कीजिए। यहाँ 108 × 5/18 = 30 m s–1
प्र14.
2 kg द्रव्यमान की एक वस्तु 10 m s–1 के नियत वेग से गतिमान है। यह एक खुरदरे क्षेत्र में प्रवेश करती है जहाँ वस्तु पर घर्षण बल 7 N है। उसी समय वस्तु पर उसकी गति का विरोध करते हुए 3 N का एक अतिरिक्त नियत बल लगाया जाता है। खुरदरे क्षेत्र में प्रवेश करने के पश्चात वस्तु विरामावस्था में आने से पूर्व कितनी दूरी तय करती है?
उत्तर

वस्तु खुरदरे क्षेत्र में रुकने से पहले 10 m दूरी तय करती है।

चरण 1 — परिणामी बल ज्ञात कीजिए। दोनों बल गति का विरोध करते हैं, अतः जुड़ते हैं।
Fपरिणामी = 7 N + 3 N = 10 N, गति के विपरीत दिशा में

चरण 2 — त्वरण ज्ञात कीजिए, F = ma से
a = F ÷ m = –10 N ÷ 2 kg
a = –5 m s–2 (ऋणात्मक, क्योंकि यह गति को मंद करता है)

चरण 3 — दूरी ज्ञात कीजिए, v2 = u2 + 2as से, जहाँ u = 10 m s–1, v = 0
(0 m s–1)2 = (10 m s–1)2 + 2 × (–5 m s–2) × s
0 = 100 m2 s–2 – (10 m s–2) s
s = 100 m2 s–2 ÷ 10 m s–2 = 10 m
दोनों बल जुड़ते क्यों हैं: घर्षण बल गति की विपरीत दिशा में लगता है और प्रश्न में कहा गया है कि अतिरिक्त 3 N का बल भी गति का विरोध कर रहा है। एक ही दिशा के बल सदैव परिमाण में जुड़ते हैं, अतः वस्तु पर एक ही 10 N का अवरोधक बल लगता है। खुरदरे क्षेत्र से पहले वस्तु का वेग नियत था, जिसका अर्थ है वहाँ परिणामी बल शून्य था — खुरदरा क्षेत्र ही परिणामी बल को शून्येतर बनाता है।
स्वयं जाँचिए: रुकने में लगा समय t = (v – u)/a = (0 – 10 m s–1) ÷ (–5 m s–2) = 2 s, और औसत वेग (10 + 0)/2 = 5 m s–1। दूरी = 5 m s–1 × 2 s = 10 m ✓
प्र15.
कोई ट्रैक्टर m1 द्रव्यमान के हैरो (जुताई उपकरण) को परिणामी बल F से खींचता है जिसके परिणामस्वरूप हैरो में a1 त्वरण उत्पन्न होता है। वही ट्रैक्टर m2 द्रव्यमान की किसी ट्रॉली को F बल से खींचता है जिसके परिणामस्वरूप ट्रॉली में a2 त्वरण उत्पन्न होता है। यदि ट्रैक्टर अब हैरो को ट्रॉली पर रखकर उसे उसी बल F से खींचता है तो a1 और a2 के पदों में परिणामी त्वरण का व्यंजक प्राप्त कीजिए। घर्षण को नगण्य मान लीजिए।
उत्तर

परिणामी त्वरण a = a1a2 ÷ (a1 + a2) होगा।

चरण 1 — प्रत्येक द्रव्यमान को F और उसके त्वरण के पदों में लिखिए, F = ma से
केवल हैरो: F = m1a1 → m1 = F ÷ a1
केवल ट्रॉली: F = m2a2 → m2 = F ÷ a2

चरण 2 — हैरो + ट्रॉली को एक निकाय मानिए (समीकरण 6.4)
a = F ÷ (m1 + m2)

चरण 3 — द्रव्यमान प्रतिस्थापित कीजिए
a = F ÷ (F/a1 + F/a2)
a = F ÷ [ F (1/a1 + 1/a2) ]
a = 1 ÷ (1/a1 + 1/a2)
a = a1a2 ÷ (a1 + a2)

संख्याओं से त्वरित जाँच। मान लीजिए a1 = 6 m s–2 और a2 = 3 m s–2

a = (6 × 3) ÷ (6 + 3) m s–2 = 18 ÷ 9 = 2 m s–2
यह a1 और a2 दोनों से कम है — होना भी यही चाहिए, क्योंकि अब वही बल अधिक कुल द्रव्यमान खींच रहा है
व्युत्क्रम क्यों आते हैं: द्रव्यमान जुड़ते हैं, त्वरण नहीं। चूँकि a = F/m है, नियत बल पर द्रव्यमान त्वरण का व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसलिए द्रव्यमानों को जोड़ने का अर्थ है त्वरणों के व्युत्क्रम जोड़ना — यही कारण है कि उत्तर का रूप समांतर क्रम के प्रतिरोधों या संपर्क में रखे लेंसों जैसा है।
प्र16.
जब किसी दंड चुंबक के ध्रुव को चुंबकीय दिक्सूचक (magnetic compass) के निकट लाया जाता है तो दंड चुंबक और दिक्सूचक सुई (जो स्वयं भी एक चुंबक है) एक-दूसरे पर चुंबकीय बल लगाते हैं। न्यूटन के गति के तृतीय नियमानुसार दोनों बल परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते हैं। तथापि दिक्सूचक सुई (compass needle) गति करता है जबकि दंड चुंबक गति नहीं करता है (चित्र 6.42)। ऐसा क्यों होता है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर

क्योंकि बराबर बल बराबर त्वरण उत्पन्न नहीं करते — दिक्सूचक सुई का द्रव्यमान बहुत कम है और उस पर घर्षण भी लगभग नहीं है, अतः वही बल उसे सरलता से घुमा देता है।

न्यूटन का तृतीय नियम: |सुई पर बल| = |दंड चुंबक पर बल| = F

न्यूटन का द्वितीय नियम: a = F ÷ m
सुई: बहुत कम द्रव्यमान mसुईबड़ा त्वरण
दंड चुंबक: कहीं अधिक द्रव्यमान mचुंबक → अत्यंत कम त्वरण
  • द्रव्यमान। दिक्सूचक की सुई चुंबकित धातु की एक पतली-सी पत्ती होती है जिसका द्रव्यमान ग्राम के अंश जितना होता है; दंड चुंबक उससे कई गुना भारी होता है। a = F/m के अनुसार वही F सुई को कहीं बड़ा त्वरण देता है।
  • घर्षण। सुई एक नुकीली कीलक (pivot) पर संतुलित रहती है, अतः उसके घूमने का लगभग कोई विरोध नहीं होता। दंड चुंबक मेज पर रखा है, जहाँ उसके और सतह के बीच का घर्षण छोटे चुंबकीय बल को सरलता से संतुलित कर देता है और उस पर परिणामी बल शून्य बना रहता है।
सामान्य सिद्धांत: न्यूटन का तृतीय नियम केवल बलों को नियत करता है, परिणामों को नहीं। इसके बाद प्रत्येक वस्तु क्या करेगी यह उसके अपने द्रव्यमान और उस पर लगने वाले अन्य बलों पर निर्भर करता है। उदाहरण 6.7 यही बात विशाल पैमाने पर कहता है — पृथ्वी और फल एक-दूसरे को बराबर खींचते हैं, परंतु पृथ्वी का विशाल द्रव्यमान उसका त्वरण अमाप्य बना देता है। उदाहरण 6.8 इसे बंदूक और गोली से कहता है — वही 2 N गोली को 20 m s–2 देता है परंतु बंदूक को केवल 0.4 m s–2
यह कीजिए: दंड चुंबक को किसी चिकनी सतह पर ढीला रखिए, अथवा जल में थर्मोकोल के टुकड़े पर तैराइए, और दिक्सूचक पास लाइए। अब चुंबक भी गति करता दिखेगा — क्योंकि आपने उसे रोके रखने वाला घर्षण हटा दिया है।
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