घर्षण बल F है — परिमाण में लगाए गए बल के बराबर और दिशा में विपरीत।
परिणामी क्षैतिज बल = ma = m × 0 = 0 N
क्षैतिज बल: लगाया गया बल F (आगे), घर्षण बल Fघ (पीछे)
F – Fघ = 0
Fघ = F, गति की विपरीत दिशा में
अद्यतन2026-09-08
घर्षण बल F है — परिमाण में लगाए गए बल के बराबर और दिशा में विपरीत।
| भाग | सही विकल्प | कारण |
|---|---|---|
| (i) कोई परिणामी बल नहीं | समान रहेगा | a = F/m = 0 ÷ m = 0 m s–2; वेग बदल ही नहीं सकता (न्यूटन का प्रथम नियम) |
| (ii) गति की दिशा में परिणामी बल | बढ़ेगा | त्वरण वेग की दिशा में है, अतः गेंद तेज होती है |
| (iii) गति की विपरीत दिशा में परिणामी बल | घटेगा | त्वरण वेग के विपरीत है — मंदन, अतः गेंद धीमी होती है |
सही कथन (i) — P पर परिणामी बल लगता है और Q पर परिणामी बल नहीं लगता है है।
परिणामी बल 18 000 N, आगे की दिशा में है।
सही विकल्प (iv) — त्वरण बल की दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है है।
| विकल्प | निर्णय | क्या गलत है |
|---|---|---|
| (i) | गलत | दिशा गलत है; त्वरण परिणामी बल की ही दिशा में होता है |
| (ii) | गलत | दिशा भी गलत, और a द्रव्यमान का समानुपाती नहीं, व्युत्क्रमानुपाती है |
| (iii) | गलत | a बल का समानुपाती है, व्युत्क्रमानुपाती नहीं |
| (iv) | सही | a = F/m से पूर्णत: मेल खाता है |
सही विकल्प (iii) — वस्तु C है।
| वस्तु | स्थिति-समय ग्राफ का आकार | ढाल क्या बताती है | परिणामी बल |
|---|---|---|---|
| A | ऊपर की ओर झुकी सीधी रेखा | नियत धनात्मक वेग | शून्य |
| B | क्षैतिज सीधी रेखा | स्थिति नहीं बदल रही — वस्तु विरामावस्था में है | शून्य |
| C | उत्तरोत्तर तीव्र होती वक्र रेखा | वेग बढ़ रहा है — वस्तु त्वरित हो रही है | शून्येतर |
| D | नीचे की ओर झुकी सीधी रेखा | नियत ऋणात्मक वेग (एकसमान दर से पीछे लौटना) | शून्य |
हाँ — नौका पीछे की ओर, अर्थात तट से दूर की ओर गति करेगी।
गद्दा उस समय को बढ़ा देता है जिसमें खिलाड़ी का वेग घटकर शून्य होता है, जिससे त्वरण और इसलिए खिलाड़ी पर लगने वाला बल घट जाता है।
प्रभाव का परिमाण देखिए। मान लीजिए m = 60 kg और u = 6 m s–1।
| गिरने की सतह | रुकने का समय t | a = u ÷ t | F = ma |
|---|---|---|---|
| कठोर भूमि | 0.02 s | 300 m s–2 | 18 000 N |
| फोम का गद्दा / रेत | 0.50 s | 12 m s–2 | 720 N |
सही विकल्प (iv) — दोनों ठेलागाड़ियाँ एक-दूसरे पर समान परिमाण का बल लगाती हैं है।
बल-द्रव्यमान ग्राफ F = 10 N पर एक क्षैतिज सरल रेखा होगा, क्योंकि प्रत्येक वस्तु पर वही बल लगाया गया था।
वस्तु पर लगने वाला बल 25 N है, गति की दिशा में।
अवरोधक बल 500 N है, जो गोली की गति की विपरीत दिशा में लगता है।
संपर्क समय 0.015 s, अर्थात 15 मिलीसेकंड है।
वस्तु खुरदरे क्षेत्र में रुकने से पहले 10 m दूरी तय करती है।
परिणामी त्वरण a = a1a2 ÷ (a1 + a2) होगा।
संख्याओं से त्वरित जाँच। मान लीजिए a1 = 6 m s–2 और a2 = 3 m s–2।
क्योंकि बराबर बल बराबर त्वरण उत्पन्न नहीं करते — दिक्सूचक सुई का द्रव्यमान बहुत कम है और उस पर घर्षण भी लगभग नहीं है, अतः वही बल उसे सरलता से घुमा देता है।