तीनों प्रश्नों का उत्तर है — हाँ। प्रत्येक को प्रयोग से कैसे सिद्ध करें और क्या मिलेगा, नीचे दिया है।
| प्रश्न | जाँच कैसे करें | क्या मिलेगा |
|---|---|---|
| क्या घर्षण इस पर निर्भर है कि सतहें कितनी दृढ़ता से दबती हैं? | उसी लकड़ी के गुटके को कमानीदार तुला से खींचिए, फिर उसके ऊपर वैसा ही दूसरा गुटका रखकर उसी सतह पर पुनः खींचिए | हाँ — दबाव दोगुना होने पर पाठ्यांक लगभग दोगुना हो जाता है |
| क्या गति आरंभ होने से पूर्व का घर्षण बाद के घर्षण से अधिक है? | तुला को ध्यान से देखिए — फिसलन के ठीक क्षण का उच्चतम पाठ्यांक, फिर फिसलते समय का स्थिर पाठ्यांक | हाँ — फिसलन आरंभ होते ही पाठ्यांक थोड़ा गिर जाता है (स्थैतिक घर्षण > सर्पी घर्षण) |
| क्या लुढ़कने का घर्षण फिसलने के घर्षण से कम है? | पहले गुटके को घसीटिए, फिर उसे चार कंचों या खिलौना गाड़ी के पहियों पर रखकर उसी तुला से खींचिए | हाँ — लुढ़कने वाला पाठ्यांक कहीं कम आता है |
अच्छे सूचनालेख में क्या होना चाहिए:
- कमानीदार तुला वाले परीक्षण का नामांकित चित्र, जिसमें पाठ्यांक N में अंकित हो।
- आपके पाठ्यांकों की दंड-आकृति (bar chart) — एक गुटका बनाम दो गुटके; गति आरंभ होने से पूर्व बनाम फिसलते हुए; फिसलना बनाम लुढ़कना।
- प्रत्येक तुलना के नीचे एक स्पष्ट निष्कर्ष-वाक्य।
- एक "तो इससे क्या" पट्टी — साइकिल के हब में बॉल बेयरिंग, ठेलों और सूटकेस के पहिए, और ब्रेक तथा टायर के खाँचों को अधिक घर्षण क्यों चाहिए।