कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 6 परियोजना कार्य के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
आप जानते हैं कि घर्षण बल संपर्क में आने वाली सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है। क्या यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि सतहें एक-दूसरे को कितनी दृढ़ता से दबाती हैं? क्या गति आरंभ होने से पूर्व किसी वस्तु पर लगने वाला घर्षण बल गति आरंभ होने के पश्चात लगने वाले घर्षण बल से अधिक होता है? क्या लुढ़कती हुई वस्तु पर लगने वाला घर्षण बल फिसलती हुई वस्तु पर लगने वाले घर्षण बल से कम होता है? इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़िए और एक सूचनालेख बनाइए। ऐसे अवलोकन यह समझाने में सहायता करते हैं कि पहिए का आविष्कार मानव इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर क्यों था।
उत्तर

तीनों प्रश्नों का उत्तर है — हाँ। प्रत्येक को प्रयोग से कैसे सिद्ध करें और क्या मिलेगा, नीचे दिया है।

प्रश्नजाँच कैसे करेंक्या मिलेगा
क्या घर्षण इस पर निर्भर है कि सतहें कितनी दृढ़ता से दबती हैं?उसी लकड़ी के गुटके को कमानीदार तुला से खींचिए, फिर उसके ऊपर वैसा ही दूसरा गुटका रखकर उसी सतह पर पुनः खींचिएहाँ — दबाव दोगुना होने पर पाठ्यांक लगभग दोगुना हो जाता है
क्या गति आरंभ होने से पूर्व का घर्षण बाद के घर्षण से अधिक है?तुला को ध्यान से देखिए — फिसलन के ठीक क्षण का उच्चतम पाठ्यांक, फिर फिसलते समय का स्थिर पाठ्यांकहाँ — फिसलन आरंभ होते ही पाठ्यांक थोड़ा गिर जाता है (स्थैतिक घर्षण > सर्पी घर्षण)
क्या लुढ़कने का घर्षण फिसलने के घर्षण से कम है?पहले गुटके को घसीटिए, फिर उसे चार कंचों या खिलौना गाड़ी के पहियों पर रखकर उसी तुला से खींचिएहाँ — लुढ़कने वाला पाठ्यांक कहीं कम आता है
पहिए ने इतिहास क्यों बदल दिया: लुढ़कने का घर्षण फिसलने के घर्षण का एक छोटा-सा अंश ही होता है, क्योंकि लुढ़कती वस्तु को सतह की असमानताओं पर घसीटना नहीं पड़ता — वह उन्हें पार कर जाती है और किसी भी क्षण संपर्क केवल एक छोटे क्षेत्र में होता है। लदे हुए स्लेज को भूमि पर घसीटने में बड़ा और निरंतर बल चाहिए; उसे पहियों पर रख देने से यह बल अत्यंत कम हो जाता है, अतः एक बैल या एक व्यक्ति उतना भार खींच लेता है जिसके लिए अन्यथा कई चाहिए होते।

अच्छे सूचनालेख में क्या होना चाहिए:

  • कमानीदार तुला वाले परीक्षण का नामांकित चित्र, जिसमें पाठ्यांक N में अंकित हो।
  • आपके पाठ्यांकों की दंड-आकृति (bar chart) — एक गुटका बनाम दो गुटके; गति आरंभ होने से पूर्व बनाम फिसलते हुए; फिसलना बनाम लुढ़कना।
  • प्रत्येक तुलना के नीचे एक स्पष्ट निष्कर्ष-वाक्य।
  • एक "तो इससे क्या" पट्टी — साइकिल के हब में बॉल बेयरिंग, ठेलों और सूटकेस के पहिए, और ब्रेक तथा टायर के खाँचों को अधिक घर्षण क्यों चाहिए।
प्र2.
समान द्रव्यमान वाली दो खिलौना गाड़ियाँ लीजिए और प्रत्येक के ऊपर एक छड़ चुंबक चिपका दीजिए (चित्र 6.32)। एक चिकनी सतह पर मीटर स्केल लगाइए। गाड़ियों को मीटर स्केल के मध्य बिंदु के पास इस प्रकार रखिए कि उनके सजातीय ध्रुव एक-दूसरे को स्पर्श करें। गाड़ियों को छोड़िए और दो विराम घड़ियों का उपयोग करके विरामावस्था में आने में उनके द्वारा लिए गए समय और प्रत्येक द्वारा रुकने से पहले तय की गई दूरी अभिलेखित कीजिए। दोनों गाड़ियों में समान द्रव्यमान जोड़ने के पश्चात प्रयोग को दोहराइए। क्या गाड़ियों ने विपरीत दिशाओं में समान दूरी तय की है? तय की गई दूरी-द्रव्यमान का ग्राफ बनाइए। अपने निष्कर्षों का विश्लेषण कीजिए और उन पर चर्चा कीजिए।
उत्तर

हाँ — दोनों गाड़ियाँ विपरीत दिशाओं में लगभग बराबर दूरी तय करती हैं, और द्रव्यमान बढ़ाने पर दोनों दूरियाँ घट जाती हैं।

सजातीय ध्रुव प्रतिकर्षित करते हैं, अतः प्रत्येक गाड़ी दूसरी को दूर धकेलती है
न्यूटन का तृतीय नियम: |गाड़ी A पर बल| = |गाड़ी B पर बल| = F
द्रव्यमान समान → दोनों का a = F ÷ m समान → चाल समान, दिशाएँ विपरीत

दोनों में समान द्रव्यमान जोड़ने पर: F अपरिवर्तित, m अधिक
→ a कम → प्रत्येक गाड़ी कम चाल से चलती है → कम दूरी

ग्राफ कैसा दिखेगा। तय की गई दूरी (y-अक्ष) बनाम एक गाड़ी का कुल द्रव्यमान (x-अक्ष) आलेखित कीजिए। आपको गिरता हुआ वक्र मिलेगा — अधिक द्रव्यमान, कम दूरी — सरल रेखा नहीं।

प्रयासप्रत्येक गाड़ी का द्रव्यमानगाड़ी A द्वारा तय दूरीगाड़ी B द्वारा तय दूरी
1mसबसे अधिकA के लगभग बराबर
22mकमA के लगभग बराबर
33mसबसे कमA के लगभग बराबर
विश्लेषण: बराबर दूरियाँ न्यूटन के तृतीय नियम की पुष्टि करती हैं — दोनों गाड़ियों पर चुंबकीय धक्का बराबर है। घटती दूरियाँ द्वितीय नियम की पुष्टि करती हैं — समान बल पर भारी गाड़ी को कम त्वरण मिलता है, अतः वह कम चाल से चलना आरंभ करती है और घर्षण उसे शीघ्र रोक देता है। एक ही प्रयास में दोनों गाड़ियों के बीच के छोटे अंतर पर ईमानदारी से चर्चा कीजिए — चुंबकों की असमान प्रबलता, पहियों का भिन्न घर्षण, असमतल सतह अथवा दोनों विराम घड़ियों में प्रतिक्रिया-समय का अंतर।
संकेत: दोनों गाड़ियों को ठीक एक ही क्षण छोड़िए और दोनों विराम घड़ियाँ साथ चालू कीजिए। प्रत्येक प्रयास तीन बार दोहराकर औसत लीजिए — ऐसे प्रयोग का एक ही प्रयास विश्वसनीय नहीं होता।
प्र3.
एक वृक्ष की खुरदरी शाखा या खंभे के चारों ओर एक बार रस्सी लपेटिए। एक भारी बाल्टी को एक सिरे से बाँधिए और दूसरे सिरे से उसे रोकने का प्रयास कीजिए (चित्र 6.43)। अब रस्सी को एक बार और लपेटिए तथा प्रयास दोहराइए। आप पाएँगे कि जितनी अधिक बार आप रस्सी को लपेटते हैं रस्सी और शाखा के मध्य पकड़ बढ़ती जाती है जिससे घर्षण बढ़ता है और भार को थामे रखने के लिए आवश्यक बल कम हो जाता है। परिणामस्वरूप भार को थामे रखना बहुत सरल हो जाता है। केवल एक बार लपेटने से प्रयास में कमी, उस कमी से कहीं अधिक होगी जितनी आपने अपेक्षा की होगी। यह दर्शाता है कि घर्षण एक सरल रैखिक ढंग से नहीं बढ़ता है, संपर्क में छोटे परिवर्तन भी बल में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं। इसी प्रकार रस्सी और खंभे के मध्य घर्षण बड़े जहाजों को घाट पर सुरक्षित रूप से रोके रखने में सक्षम बनाता है।
उत्तर

आप क्या देखेंगे: बिना लपेटे आपको बाल्टी का लगभग पूरा भार थामना पड़ता है। एक बार लपेटने पर यह स्पष्ट रूप से सरल हो जाता है; दो बार लपेटने पर उसी बाल्टी को आप बहुत कम प्रयास से थाम लेते हैं; तीन-चार बार लपेटने पर दो अँगुलियों से ही काम चल जाता है।

लपेटों की संख्याउसी बाल्टी को थामने में आवश्यक प्रयासक्या हो रहा है
0लगभग पूरा भारखंभे से कोई घर्षण नहीं; केवल आपका हाथ भार सँभाल रहा है
1स्पष्ट रूप से कमलिपटी हुई लंबाई पर लगने वाला घर्षण भार का कुछ भाग उठा लेता है
2बहुत कमदूसरे लपेट का घर्षण पहले से ही घटे हुए तनाव पर लगता है
3 या अधिकनाममात्रकमी लपेट-दर-लपेट गुणित होती जाती है
कमी अपेक्षा से इतनी अधिक क्यों होती है: घर्षण रस्सी की उस पूरी लंबाई पर लगता है जो खंभे के संपर्क में है, और प्रत्येक बिंदु पर वह शेष बचे तनाव का एक अंश हटा देता है। इसलिए हर नया लपेट कोई नियत बल नहीं घटाता — वह पिछले लपेट के बाद बचे तनाव को गुणा करके घटा देता है। किसी भिन्न से बार-बार गुणा करने पर मान बहुत तेजी से गिरता है, और "घर्षण सरल रैखिक ढंग से नहीं बढ़ता" का अर्थ यहाँ यही है।
सुरक्षा और ईमानदार प्रतिवेदन: पहले हल्की बाल्टी से आरंभ कीजिए, पैर हटाकर खड़े रहिए, और यदि संभव हो तो प्रयास को अनुमान से नहीं, कमानीदार तुला से अभिलेखित कीजिए। फिर लिखिए कि यही विचार और कहाँ काम करता है — घाट पर बोलार्ड के चारों ओर लिपटी जहाज की रस्सी, पर्वतारोही की बिलेइंग, और बैलगाड़ी की रस्सी का खूँटे पर लपेटा जाना।
प्र4.
यह देखना प्राय: शिक्षाप्रद होता है कि समय के साथ वैज्ञानिक विचार किस प्रकार से विकसित होते हैं। यदि आप रुचि रखते हैं तो न्यूटन द्वारा गति के नियमों को प्रतिपादित करने के प्रकारों का पता लगाने के लिए उनकी मूल कृति प्रिंसिपिया के अंश पढ़िए। इस ग्रंथ का मूल पाठ और उस पर की गई टीकाएँ दोनों ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
उत्तर

इस परियोजना की विधि: अनुवाद में एक छोटा अंश पढ़िए, न्यूटन के अपने शब्दों की तुलना इस अध्याय के आधुनिक कथन से कीजिए, और लिखिए कि क्या बदला और क्या नहीं।

  1. Philosophiæ Naturalis Principia Mathematica (1687) का कोई अंग्रेजी अनुवाद खोजिए और आरंभ में दिए "Axioms, or Laws of Motion" वाले भाग को ही पढ़िए — यह मुश्किल से दो पृष्ठ का है।
  2. ध्यान दीजिए कि न्यूटन ने अपना द्वितीय नियम गति (motion) के पदों में कहा था — जिसे आज हम संवेग अर्थात द्रव्यमान × वेग कहते हैं — F = ma के रूप में नहीं। इस अध्याय के खंड 6.5 के "आइए, और चिंतन करें" बॉक्स में यही पूर्ण रूप दिया गया है।
  3. विचार को पीछे तक खोजिए — गैलीलियो का योगदान क्या था और न्यूटन ने उसमें क्या जोड़ा?
  4. न्यूटन के कथन और अध्याय के कथन की नियम-दर-नियम तुलना करते हुए एक पृष्ठ लिखिए।

नमूना उत्तर (जिस पर आप अपना कार्य बना सकते हैं):

विचारन्यूटन से पहलेन्यूटन का योगदान
गति का कारणयह गलत धारणा थी कि वस्तु को नियत वेग से गतिमान रखने के लिए भी बल चाहिएबल केवल वेग के परिवर्तन के लिए चाहिए; एकसमान गति के लिए नहीं
जड़त्वगैलीलियो ने विचार प्रयोग से तर्क दिया कि बाधाएँ हटा दी जाएँ तो वस्तु गतिमान बनी रहेगीन्यूटन ने इस गुण को जड़त्व नाम दिया और उसे प्रथम नियम बनाया
बल और त्वरणकोई संख्यात्मक नियम नहींद्वितीय नियम — संवेग में परिवर्तन की दर परिणामी बल के समानुपाती
परस्पर क्रियाबल को एक ही वस्तु पर लगने वाला माना जाता थातृतीय नियम — बल सदैव दो अलग वस्तुओं पर बराबर और विपरीत युग्मों में
यह करना क्यों उपयोगी है: इससे पता चलता है कि तीनों नियम स्वत:स्पष्ट नहीं थे। उन्होंने लगभग दो हजार वर्षों से चली आ रही एक धारणा का स्थान लिया, और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि विचार प्रयोगों तथा सावधान प्रेक्षणों ने उस धारणा का खंडन किया। मूल ग्रंथ पढ़ने से यह भी दिखता है कि भौतिकी का कितना बड़ा भाग सावधान परिभाषाओं का है — न्यूटन एक भी नियम कहने से पहले द्रव्यमान, संवेग और बल की परिभाषाओं में कई पृष्ठ लगाते हैं।
क्या आप जानते हैं? न्यूटन के नियम आज भी दैनंदिक वस्तुओं से लेकर ग्रहों और तारों तक गति का वर्णन करते हैं। इनमें संशोधन केवल अत्यंत भारी पिंडों के निकट, प्रकाश की गति के समीप की चालों पर, और परमाणु के आकार के अत्यंत सूक्ष्म कणों के लिए आवश्यक होता है।
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