कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 7 परियोजना कार्य के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
एक पेन के दोनों सिरों को हटा दीजिए ताकि रिफिल नली के भीतर स्वतंत्र रूप से सरक सके (चित्र 7.40)। पेन के ढक्कन को नली की साइड में स्थिर (Fix) कीजिए और ढक्कन के क्लिप पर एक रबड़ बैंड जोड़ दीजिए। रबड़ बैंड के मुक्त सिरे को सेफ्टी पिन का उपयोग करके रिफिल से जोड़ दीजिए। रबड़ बैंड को खींचिए और छोड़ दीजिए। रिफिल तेजी से बाहर निकलती है जो प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा का गतिज ऊर्जा में रूपांतरण दर्शाती है। भिन्न-भिन्न खिंचाव के साथ इसे दोहराइए और देखिए कि रिफिल द्वारा तय की गई दूरी में किस प्रकार परिवर्तन आता है। क्या खिंचाव और तय की गई दूरी में कोई संबंध है?
उत्तर

हाँ। बैंड जितना अधिक खींचा जाएगा, रिफिल उतनी ही दूर जाएगी — और दूरी खिंचाव की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ती है, लगभग खिंचाव के वर्ग के अनुपात में।

प्रयोग को ठीक ढंग से कैसे करें

  1. नली पर सेंटीमीटर के निशान लगाइए ताकि हर बार रिफिल को मापी हुई दूरी x तक पीछे खींचा जा सके।
  2. हर बार रिफिल को एक ही ऊँचाई से और एक ही स्थान से क्षैतिज दिशा में छोड़िए — पेन को मेज के किनारे पर टेप से चिपका दीजिए।
  3. मेज के किनारे से उस स्थान तक क्षैतिज दूरी R मापिए जहाँ रिफिल पहली बार गिरती है।
  4. प्रत्येक खिंचाव पर तीन बार छोड़िए और औसत लीजिए, जिससे त्रुटि कम हो।
खिंचाव x (cm)दूरी R (cm) — नमूना पाठ्यांकR ÷ xR ÷ x²
2402010
3903010
41604010
R, x2 के अनुपात में क्यों बढ़ता है
तने हुए बैंड में संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा विस्तार के वर्ग के अनुपात में बढ़ती है: U ∝ x2
यह पूरी ऊर्जा रिफिल की गतिज ऊर्जा बन जाती है: ½mv2 = U ∝ x2
अतः v2 ∝ x2, अर्थात v ∝ x

मेज से क्षैतिज छोड़ने पर उड़ान का समय t नियत रहता है, अतः R = v × t ∝ v ∝ x
किंतु कोण बनाकर छोड़ने पर प्रक्षेप्य सूत्र से R ∝ v2x2
अपने आँकड़ों में क्या अपेक्षित है: मेज से क्षैतिज छोड़ने पर R, x के अनुपात में बढ़ेगा। फर्श पर कोण बनाकर छोड़ने पर R लगभग x² के अनुपात में बढ़ेगा। दोनों ही स्थितियों में खिंचाव दोगुना करने पर दूरी दोगुनी से अधिक बढ़ती है — और R बनाम x (या x²) का सीधी रेखा वाला ग्राफ ही इसका प्रमाण है।
सुरक्षा: रिफिल को कभी किसी के चेहरे की ओर मत छोड़िए, और यदि चश्मा हो तो अवश्य पहनिए। फर्श के साथ-साथ या किसी गत्ते के डिब्बे में छोड़िए।
प्र2.
सरलता से उपलब्ध सामग्रियों, जैसे— कार्डबोर्ड, लकड़ी के पहिए या पैमाने, पेंसिल या बोल्ट (जो आलंब का कार्य करें), धागा या रस्सी, छोटी घिरनी (या एक साथ जोड़े गए दो बोतलों के ढक्कन) और छोटे-मोटे भार उठाने के लिए कागज के गिलास आदि का उपयोग करके एक या अधिक सरल मशीनें या उनका संयोजन (उत्तोलक, घिरनी और आनत तल) बनाइए। अभिकल्प (design) बनाने में कल्पनाशील रहिए। अपने मॉडल का उपयोग किसी छोटे भार को उठाने या चलाने में कीजिए, आयास और भार को मापिए और यांत्रिक लाभ का परिकलन कीजिए।
उत्तर

इनमें से कोई एक बनाइए, फिर कमानीदार तुला से (या एक जैसे सिक्के गिनकर) आयास मापिए और यांत्रिक लाभ = भार ÷ आयास का उपयोग कीजिए।

मशीनकैसे बनाएँक्या मापेंअपेक्षित यांत्रिक लाभ
उत्तोलकपेंसिल पर टिका 30 cm का पैमाना। भार (कागज के गिलास में पत्थर) पेंसिल के पास, आयास दूर वाले सिरे पर।भार भुजा d₂, आयास भुजा d₁ तथा आवश्यक आयासयांत्रिक लाभ = d₁/d₂; d₁ = 24 cm व d₂ = 6 cm पर = 4
आनत तलफर्श से पुस्तकों के चट्टे (ऊँचाई h) तक L लंबाई का कड़ा गत्ते का पटरा। कमानीदार तुला से खिलौना गाड़ी ऊपर खींचिए।L, h तथा कमानीदार तुला का पाठ्यांकयांत्रिक लाभ = L/h; L = 60 cm व h = 15 cm पर = 4
घिरनीकील की धुरी पर पीठ से पीठ चिपकाए दो बोतलों के ढक्कन, हुक से लटकाइए। खाँचे पर धागा, एक ओर भार, दूसरी ओर आयास।भार का मान तथा मुक्त सिरे पर आवश्यक बलएक स्थिर घिरनी के लिए लगभग 1 — वह केवल दिशा बदलती है
नमूना उत्तर — पैमाने वाला उत्तोलक
भार = 200 g का पत्थर, अतः भार = mg = 0.2 kg × 10 m s–2 = 2 N
भार भुजा d2 = 6 cm, आयास भुजा d1 = 24 cm
अपेक्षित आयास: F1 = F2 × d2 ÷ d1 = 2 N × 6 ÷ 24 = 0.5 N
मापा गया आयास (कमानीदार तुला) = 0.6 N
यांत्रिक लाभ = भार ÷ आयास = 2 N ÷ 0.6 N = 3.3
आदर्श यांत्रिक लाभ = d1 ÷ d2 = 24 ÷ 6 = 4
मापा गया यांत्रिक लाभ आदर्श मान से सदा कुछ कम क्यों आता है: आपके आयास का कुछ भाग आलंब, पटरे की सतह या घिरनी की धुरी के घर्षण को पार करने में तथा पैमाने या रस्सी को स्वयं उठाने में चला जाता है। यह भाग भार पर कोई उपयोगी कार्य नहीं करता। चिकनी सतहें और हल्के पुर्जे दोनों मानों को पास ले आते हैं — किंतु कोई मशीन आदर्श मान से आगे कभी नहीं जाती।
यह करके देखिए: दो मशीनों को जोड़िए — उत्तोलक से भार को आनत तल पर चढ़ाइए, फिर उसे लुढ़काइए। यांत्रिक लाभ गुणा हो जाते हैं, और इसी तरह वास्तविक क्रेन तथा जैक बहुत बड़े मान प्राप्त करते हैं।
प्र3.
कम्प्यूटर अनुकार (Computer Simulation) ऐसी भौतिक राशियों को समझने में सहायता कर सकते हैं जिनकी कल्पना करना कठिन होता है। PhET अनुकार (https://phet.colorado.edu) अन्योन्य क्रियात्मक मॉडल प्रदान करते हैं जैसे कि ‘ऊर्जा स्केट पार्क (Energy Skate Park)’, ‘ऊर्जा के रूप और रूपांतरण (Energy Forms and Changes)’, ‘दोलक प्रयोगशाला (Pendulum Lab)’, और ‘द्रव्यमान तथा स्प्रिंग (Masses and Springs)’। इनका उपयोग करके यह देखिए कि द्रव्यमान, ऊँचाई और घर्षण जैसे कारकों को परिवर्तित करने पर ऊर्जा के विभिन्न रूपों में किस प्रकार परिवर्तन होता है।
उत्तर

प्रत्येक अनुकार गति के साथ-साथ ऊर्जा का दंड-आरेख भी दिखाता है। एक बार में एक ही राशि बदलिए और देखिए कौन-सा दंड बढ़ता है और कौन-सा घटता है — यही पूरा अध्याय परदे पर है।

अनुकारक्या बदलेंक्या देखेंकौन-सी संकल्पना सिद्ध होती है
Energy Skate Parkघर्षण शून्य कीजिए; स्केटर को अलग-अलग ऊँचाइयों से छोड़िएगतिज और स्थितिज ऊर्जा के दंड आपस में बदलते हैं, किंतु कुल दंड टस से मस नहीं होतायांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण (अनुभाग 7.4.3)
Energy Skate Parkअब घर्षण चालू कीजिएतापीय ऊर्जा का दंड प्रकट होकर बढ़ता जाता है; स्केटर का उच्चतम बिंदु हर चक्कर में नीचे आता हैरोलर कोस्टर के शीर्ष क्रमशः नीचे क्यों (प्रश्न 8, पृष्ठ 129)
Energy Skate Parkऊँचाई वही रखकर स्केटर का द्रव्यमान बदलिएसभी दंड एक साथ बड़े हो जाते हैं, किंतु नीचे की चाल अपरिवर्तित रहती हैv = √(2gh) द्रव्यमान पर निर्भर नहीं (चिंतन कीजिए, पृष्ठ 116)
Pendulum Labगोलक को अलग-अलग कोणों से, घर्षण सहित तथा रहित छोड़िएघर्षण रहित स्थिति में वह हर दोलन में उसी ऊँचाई तक लौटता है; घर्षण के साथ हर बार कुछ कमक्रियाकलाप 7.2, पृष्ठ 127
Masses and Springsस्प्रिंग को भिन्न-भिन्न मात्रा में खींचिएप्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा का दंड खिंचाव की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ता हैविकृति द्वारा संचित ऊर्जा (अनुभाग 7.4.2)
Energy Forms and Changesजलचक्र, जनित्र और बल्ब को जोड़िएऊर्जा के चिह्न शृंखला में आगे बढ़ते हैं; कुछ भाग सदैव ऊष्मा बनकर निकल जाता हैऊर्जा के रूप, चित्र 7.10; पृष्ठ 136 का घराट
क्या अंकित कीजिए: Energy Skate Park में घर्षण बंद करके 2 m, 4 m और 6 m की गिरावट पर स्केटर की निम्नतम बिंदु की चाल नोट कीजिए। वे लगभग 6.3, 8.9 तथा 10.8 m s⁻¹ आनी चाहिए — ठीक √(2gh), g = 9.8 m s⁻² लेकर। अनुकार का आपकी अपनी गणना से मिल जाना ही इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य है।
ध्यान दीजिए: यदि वेबसाइट न खुले तो यही विचार लचीले प्लास्टिक पाइप को U आकार में पकड़कर उसमें कंचा छोड़कर देखा जा सकता है। एक भुजा से छोड़िए और देखिए कि वह दूसरी भुजा में कितना ऊपर चढ़ता है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ