| क्रम | कथन | सत्य / असत्य | कारण |
|---|---|---|---|
| (i) | कार्य तब होता है जब बल लगाया जाए, भले ही वस्तु गति न करे | असत्य | W = F × s। s = 0 होने पर कार्य शून्य है, चाहे आप कितना ही जोर लगाएँ (चित्र 7.5, दीवार धकेलना)। |
| (ii) | बाल्टी को ऊर्ध्वाधरतः ऊपर उठाने पर उस पर धनात्मक कार्य होता है | सत्य | आपका बल ऊपर की ओर है और विस्थापन भी ऊपर की ओर — एक ही दिशा, अतः W धनात्मक। |
| (iii) | कार्य और ऊर्जा दोनों का SI मात्रक जूल (J) है | सत्य | किया गया कार्य ऊर्जा में परिवर्तन के रूप में प्रकट होता है, अतः मात्रक एक ही होना चाहिए। 1 J = 1 N m = 1 kg m² s⁻²। |
| (iv) | स्थिर तनी हुई रबड़ की पट्टी में गतिज ऊर्जा होती है | असत्य | K = ½mv² और v = 0, अतः K = 0। उसमें विकृति के कारण प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा संचित है। |
| (v) | ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है | सत्य | बल्ब में विद्युत → प्रकाश, माँसपेशियों में रासायनिक → यांत्रिक, घंटी में यांत्रिक → ध्वनि (अनुभाग 7.3)। |
कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 7 अभ्यास प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-08
| क्रम | उत्तर | कहाँ से |
|---|---|---|
| (i) | बल × विस्थापन | समीकरण 7.1 / 7.2: W = F × s |
| (ii) | 1 | 1 J = 1 N × 1 m, पृष्ठ 118 |
| (iii) | ½mv² | समीकरण 7.6 |
| (iv) | mgh | समीकरण 7.8 |
| (v) | दर | समीकरण 7.11: P = W/t |
W = F × s → N × m = J
K = ½mv² → kg × (m s–1)2 = kg m2 s–2 = J
U = mgh → kg × m s–2 × m = kg m2 s–2 = J
P = W/t → J ÷ s = W (वाट)
सही कथन हैं (iii) तथा (iv)।
| क्रम | कथन | सही? | कारण |
|---|---|---|---|
| (i) | गेंद पर लगने वाला बल शून्य है | नहीं | गुरुत्व कभी बंद नहीं होता। उच्चतम बिंदु पर भी भार mg नीचे की ओर लग रहा है। |
| (ii) | गेंद का त्वरण शून्य है | नहीं | a = F/m = mg/m = g = 10 m s⁻², नीचे की ओर — उस क्षण भी जब v = 0 है। |
| (iii) | इसकी गतिज ऊर्जा शून्य है | हाँ | उच्चतम बिंदु पर v = 0, अतः K = ½mv² = 0। |
| (iv) | इसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम है | हाँ | वहीं h सबसे अधिक है, अतः U = mgh सबसे अधिक। |
फेंकते समय: K = ½mu2, U = 0
उच्चतम बिंदु पर: K = 0, U = mghmax
बराबर करने पर: mghmax = ½mu2 → hmax = u2 ÷ 2g
| क्रम | स्थिति | ऊर्जा रूपांतरण | वास्तव में क्या होता है |
|---|---|---|---|
| (i) | ट्रक का पहाड़ी पर चढ़ना | रासायनिक → गतिज + गुरुत्वीय स्थितिज (+ तापीय) | डीजल जलता है; इंजन पहिए चलाता है और ट्रक ऊँचाई भी प्राप्त करता है, अतः mgh मिलता है। शेष घर्षण व गर्म निकास में चला जाता है। |
| (ii) | घड़ी की स्प्रिंग का खुलना | प्रत्यास्थ स्थितिज → यांत्रिक (गतिज) | लपेटी हुई स्प्रिंग विकृत होकर ऊर्जा संचित करती है; खुलते समय वह गियर और सुइयाँ घुमाती है। |
| (iii) | हरे पत्तों द्वारा प्रकाश संश्लेषण | प्रकाश (सौर) → रासायनिक | पर्णहरित द्वारा अवशोषित सूर्य का प्रकाश ग्लूकोस के बंधों में संचित हो जाता है — यही आहार शृंखला का ऊर्जा भंडार है। |
| (iv) | बाँध से बहता हुआ जल | गुरुत्वीय स्थितिज → गतिज (→ टरबाइन में विद्युत) | जलाशय में ऊँचाई पर रखे जल में mgh है; गिरने पर वह ½mv² बन जाती है और टरबाइन घुमाती है। |
| (v) | माचिस की तीली का जलना | रासायनिक → तापीय + प्रकाश | तीली के सिरे के रसायन अभिक्रिया करके संचित बंध ऊर्जा ऊष्मा और लौ के रूप में मुक्त करते हैं। |
| (vi) | पटाखे में विस्फोट | रासायनिक → तापीय + प्रकाश + ध्वनि + गतिज | अत्यंत तीव्र अभिक्रिया; गर्म गैसें बाहर की ओर धकेलती हैं, अतः टुकड़ों और वायु को गतिज ऊर्जा भी मिलती है। |
| (vii) | माइक्रोफोन में बोलना | ध्वनि → विद्युत | वायु के कंपन एक झिल्ली को कंपित करते हैं और कंपित झिल्ली उसी के अनुरूप विद्युत संकेत उत्पन्न करती है। |
| (viii) | दीप्त विद्युत बल्ब | विद्युत → प्रकाश + तापीय | धारा तंतु को इतना गर्म कर देती है कि वह चमकने लगता है। तंतु वाले बल्ब में अधिकांश ऊर्जा प्रकाश नहीं, ऊष्मा बनकर निकलती है। |
| (ix) | सौर-पैनल | प्रकाश (सौर) → विद्युत | प्रकाश-सेल सूर्य के प्रकाश को सीधे विद्युत धारा में बदल देते हैं। |
(i) 36 250 J। (ii) 36 250 J — बिल्कुल उतनी ही। (iii) गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा केवल प्राप्त ऊँचाई पर निर्भर करती है, तय किए गए रास्ते पर नहीं।
सूत्र: ΔU = mgh
ΔU = 50 kg × 10 m s–2 × 72.5 m
ΔU = 36 250 J = 3.625 × 104 J (लगभग 36.25 kJ)
(ii) सीढ़ियों द्वारा
आरंभिक और अंतिम ऊँचाई वही हैं, अतः h अब भी 72.5 m है
ΔU = 50 kg × 10 m s–2 × 72.5 m = 36 250 J — कोई अंतर नहीं
(iii) निष्कर्ष: किसी वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा केवल चुने गए संदर्भ तल से उसकी ऊर्ध्वाधर ऊँचाई पर निर्भर करती है। वह रास्ते पर निर्भर नहीं करती — सीधे ऊपर, सीढ़ियों से, घुमावदार ढलान से या पहाड़ी सड़क से — सभी में mgh समान ही रहता है।
ऊर्जा दोगुनी चाहिए — अर्थात 100 % अधिक। शक्ति ठीक उतनी ही चाहिए — बिल्कुल भी अधिक नहीं।
पहली बार — 10वें तल तक
ऊँचाई = 10h0
E1 = mg × 10h0
P1 = E1 ÷ t = 10mgh0 ÷ t
दूसरी बार — 20वें तल तक, 2t समय में
ऊँचाई = 20h0
E2 = mg × 20h0 = 2E1
P2 = E2 ÷ (2t) = 20mgh0 ÷ 2t = 10mgh0 ÷ t = P1
अतिरिक्त आवश्यक ऊर्जा = E2 – E1 = 10mgh0, अर्थात 100 % अधिक
अतिरिक्त आवश्यक शक्ति = P2 – P1 = 0 W
ऊर्जा झंडे के द्रव्यमान, ध्वजदंड की ऊँचाई तथा g पर निर्भर करती है। गति से किए गए कार्य में कोई अंतर नहीं पड़ता। गति दोगुनी करने पर आवश्यक शक्ति दोगुनी हो जाती है।
E = mgh, अतः निर्भर है—
• m — झंडे का (तथा साथ उठने वाली रस्सी का) द्रव्यमान
• h — ध्वजदंड की ऊँचाई
• g — गुरुत्वीय त्वरण
स्थिर घिरनी का यांत्रिक लाभ 1 होता है; वह केवल आपके नीचे की ओर खिंचाव को ऊपर की ओर उठाव में बदलती है, न बल बदलती है न ऊर्जा।
धीरे या शीघ्र?
W = mgh में t है ही नहीं। दोनों स्थितियों में किया गया कार्य समान है।
गति दोगुनी करने पर
P = W ÷ t। गति दोगुनी होने पर समय आधा: t′ = t/2
P′ = W ÷ (t/2) = 2W ÷ t = 2P — शक्ति की आवश्यकता दोगुनी
संख्याओं से स्पष्ट कीजिए। 0.5 kg का झंडा, 10 m ऊँचा दंड, g = 10 m s–2—
| किस प्रकार उठाया गया | किया गया कार्य | समय | शक्ति |
|---|---|---|---|
| धीरे, 0.5 m s⁻¹ से | 0.5 × 10 × 10 = 50 J | 20 s | 2.5 W |
| दोगुनी गति से, 1 m s⁻¹ | 50 J — अपरिवर्तित | 10 s | 5 W — दोगुनी |
पहले दिन और दूसरे दिन प्रयुक्त ईंधन का अनुपात 4 : 5 होगा।
कुल द्रव्यमान M1 = 60 kg + 100 kg = 160 kg
विरामावस्था से आरंभ, अंतिम चाल v:
E1 = ½M1v2 = ½ × 160 kg × v2 = 80v2 जूल (v, m s–1 में)
दूसरा दिन — व्यक्ति + पुत्र + स्कूटर
कुल द्रव्यमान M2 = 60 kg + 40 kg + 100 kg = 200 kg
E2 = ½M2v2 = ½ × 200 kg × v2 = 100v2 जूल
ईंधन का अनुपात (सारी ऊर्जा ईंधन से आती है और कोई अन्य हानि नहीं)
E1 : E2 = 80v2 : 100v2 = 80 : 100 = 4 : 5
संतुलन के लिए बच्चे को आलंब से वयस्क की तुलना में दोगुनी दूरी पर बैठना होगा। यदि वयस्क d दूरी पर बैठे तो बच्चा 2d दूरी पर बैठेगा।
आयास × आयास भुजा = भार × भार भुजा
मान लीजिए बच्चे का भार W और वयस्क का 2W है।
W × dबच्चा = 2W × dवयस्क
W कट जाता है: dबच्चा = 2 × dवयस्क
अतः यदि वयस्क आलंब से 1 m दूर बैठे तो बच्चे को 2 m दूर बैठना होगा।
जाँच: 300 N × 2 m = 600 N m तथा 600 N × 1 m = 600 N m ✔
(i) ऊपर जाते समय ऋणात्मक, नीचे आते समय धनात्मक। (ii) ऊपर चढ़ते समय वायु प्रतिरोध ने गेंद पर –12 J कार्य किया।
गुरुत्व सदैव नीचे की ओर कार्य करता है।
ऊपर जाते समय: विस्थापन ऊपर, बल के विपरीत → ऋणात्मक कार्य (गेंद धीमी होती है और गतिज ऊर्जा खोती है)
नीचे आते समय: विस्थापन नीचे, बल की दिशा में → धनात्मक कार्य (गेंद तेज होती है और गतिज ऊर्जा पाती है)
m = 2 kg, u = 20 m s–1, h = 19.4 m, g = 10 m s–2
फेंकते समय गतिज ऊर्जा:
Ki = ½mu2 = ½ × 2 kg × (20 m s–1)2 = 400 J
उच्चतम बिंदु पर गतिज ऊर्जा: Kf = 0 J (गेंद क्षण भर के लिए रुक जाती है)
चढ़ाई में गुरुत्व द्वारा किया गया कार्य:
Wगुरुत्व = –mgh = –(2 kg × 10 m s–2 × 19.4 m) = –388 J
पूरी चढ़ाई पर कार्य-ऊर्जा प्रमेय:
Wगुरुत्व + Wवायु = Kf – Ki
(–388 J) + Wवायु = 0 J – 400 J = –400 J
Wवायु = –400 J + 388 J = –12 J
(i) 0 m पर 6 m s⁻¹। (ii) 4 m पर लगभग 8.12 m s⁻¹। नहीं — त्वरण कभी ऋणात्मक नहीं होता, यद्यपि 3 m से 4 m के बीच वह घटता अवश्य है।
K = ½mv2 → v = √(2K ÷ m)
v = √(2 × 180 J ÷ 10.0 kg) = √(36 m2 s–2) = 6 m s–1
0 m से 4 m तक बल द्वारा किया गया कार्य = ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल
आकृति समलंब है: समांतर भुजाएँ 4 m (नीचे) तथा 2 m (ऊपर का सपाट भाग, 1 m से 3 m), ऊँचाई 50 N।
W = ½ × (4 m + 2 m) × 50 N = ½ × 6 m × 50 N = 150 J
खंडों से जाँच: ½(1 m)(50 N) + (2 m)(50 N) + ½(1 m)(50 N) = 25 + 100 + 25 = 150 J ✔
(ii) 4 m पर चाल — कार्य-ऊर्जा प्रमेय से
4 m पर K = 0 m पर K + किया गया कार्य = 180 J + 150 J = 330 J
v = √(2 × 330 J ÷ 10.0 kg) = √(66 m2 s–2) = 8.12 m s–1
क्या त्वरण कहीं ऋणात्मक है? नहीं।
0 से 1 m: F 0 → 50 N बढ़ता है, अतः a 0 → 5 m s–2 बढ़ता है
1 से 3 m: F = 50 N, अतः a = 50 N ÷ 10.0 kg = 5 m s–2, नियत
3 से 4 m: F 50 N → 0 घटता है, अतः a 5 m s–2 → 0 घटता है — कम, किंतु फिर भी धनात्मक
गेंद चंद्रमा पर 48 m तक जाएगी — छह गुनी ऊँचाई।
उच्चतम बिंदु पर वह पूरी स्थितिज ऊर्जा बन जाती है:
½mu2 = mgh → h = u2 ÷ 2g
पृथ्वी पर
hपृ = u2 ÷ (2gपृ) = 8 m
चंद्रमा पर, gचं = gपृ ÷ 6
hचं = u2 ÷ (2gचं) = u2 ÷ (2 × gपृ/6) = 6 × u2 ÷ (2gपृ) = 6 hपृ
hचं = 6 × 8 m = 48 m
संख्याओं से, gपृ = 10 m s–2 लेकर—
gचं = 10 ÷ 6 ≈ 1.67 m s–2
hचं = u2 ÷ (2gचं) = 160 ÷ (2 × 1.67) = 48 m ✔
(i) A और B के बीच कार सरल रेखा में 35 m s–1 की नियत चाल से चलती है।
त्वरण = 0, अतः कार पर नेट बल शून्य है — ब्रेक अभी लगाए ही नहीं गए।
यह एक सेकंड चालक का प्रतिक्रिया काल है — बाधा देखने और पैडल दबाने के बीच का समय।
इस बीच तय दूरी = 35 m s–1 × 1 s = 35 m, अर्थात ब्रेक लगने से पहले ही इतनी दूरी निकल जाती है।
K = ½mv2
K = ½ × 1000 kg × (35 m s–1)2
K = 500 kg × 1225 m2 s–2
K = 6,12,500 J = 6.125 × 105 J
B पर कार के पास अब भी 6,12,500 J है (चाल 35 m s–1 ही है)।
C पर कार विरामावस्था में है: K = 0 J।
कार्य-ऊर्जा प्रमेय: किया गया कार्य = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
W = 0 J – 6,12,500 J = –6,12,500 J
ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि ब्रेक का बल गति का विरोध करता है।
प्रति-जाँच: ब्रेक लगने के बाद तय दूरी = त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½ × 2 s × 35 m s–1 = 35 m
ब्रेक बल = 6,12,500 J ÷ 35 m = 17,500 N
और न्यूटन के द्वितीय नियम से: a = (0 – 35) ÷ 2 = –17.5 m s–2, F = 1000 × 17.5 = 17,500 N ✔
(iv) गतिज ऊर्जा मुख्यतः तापीय ऊर्जा में बदल जाती है — ब्रेक पैड व डिस्क, टायरों तथा सड़क की सतह में ऊष्मा — और साथ में थोड़ी ध्वनि ऊर्जा (टायरों की चरचराहट)।
P पर गेंद लगभग 6.3 m s⁻¹ से गतिमान है, Q पर वह क्षण भर के लिए विरामावस्था में है (0 m s⁻¹), और R तक वह कभी पहुँच ही नहीं सकती।
O पर: v = 0 m s–1, अतः K = 0 J; और U = 30 J
कुल यांत्रिक ऊर्जा E = K + U = 0 + 30 = 30 J
पथ घर्षण रहित है, अतः E हर जगह 30 J ही रहेगी।
चरण 2 — प्रत्येक बिंदु पर K = E – U, फिर v = √(2K ÷ m), जहाँ m = 0.5 kg
| बिंदु | ग्राफ से U | K = 30 J – U | v = √(2K ÷ m) |
|---|---|---|---|
| P | 20 J | 10 J | √(2 × 10 ÷ 0.5) = √40 ≈ 6.3 m s⁻¹ |
| Q | 30 J | 0 J | 0 m s⁻¹ — क्षण भर के लिए विराम |
| R | 40 J | –10 J | असंभव — गेंद R तक पहुँचती ही नहीं |
v = √(2K ÷ m) = √(2 × 10 J ÷ 0.5 kg) = √(40 m2 s–2) = 6.32 m s–1
Q पर: K = 30 J – 30 J = 0 J
v = √0 = 0 m s–1
R पर: K = 30 J – 40 J = –10 J
किंतु K = ½mv2 कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती, अतः R तक पहुँचा नहीं जा सकता।
(i) लगभग 14.1 m s⁻¹। (ii) गड्ढे की गहराई लगभग 0.05 m अर्थात 5 cm होगी।
m = 1.5 kg, h = 10 m, g = 10 m s–2
नारियल विरामावस्था से गिरता है और केवल गुरुत्व कार्य करता है, अतः यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित है:
शिखर पर स्थितिज ऊर्जा = रेत पर गतिज ऊर्जा
mgh = ½mv2
m कट जाता है: v2 = 2gh = 2 × 10 m s–2 × 10 m = 200 m2 s–2
v = √200 = 14.14 m s–1 ≈ 14.1 m s–1
नारियल रेत तक जो ऊर्जा लाता है:
E = mgh = 1.5 kg × 10 m s–2 × 10 m = 150 J
(जाँच: ½mv2 = ½ × 1.5 kg × 200 m2 s–2 = 150 J ✔)
रेत F = 3000 N बल से गहराई d तक विरोध करती है और नारियल पर ऋणात्मक कार्य करती है:
रेत द्वारा किया गया कार्य = –F × d
नारियल रुक जाता है, अतः इस कार्य को पूरी 150 J हटानी होगी:
F × d = 150 J
3000 N × d = 150 J
d = 150 J ÷ 3000 N = 150 N m ÷ 3000 N
d = 0.05 m = 5 cm