कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 8 परियोजना कार्य के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या, इलेक्ट्रॉनों की संख्या, प्रोटॉनों की संख्या, न्यूट्रॉनों की संख्या और संयोजकता के आधार पर एक ‘परमाणु पूर्वानुमान बोर्ड’ गेम बनाइए। विद्यार्थी इन परमाणु संकेतों का उपयोग करके तत्वों का पूर्वानुमान लगा सकते हैं।
उत्तर

इसे कैसे बनाएँ। तालिका 8.4 के प्रथम अठारह तत्वों के लिए 18 कार्ड बनाइए। प्रत्येक कार्ड के पीछे चार संकेत लिखिए जो नीचे जाते-जाते आसान होते जाएँ।

संकेतयहाँ पहचानने पर अंकनमूना कार्ड
संकेत 1 (कठिनतम)4“मेरी संयोजकता 2 है और मेरे 3 कोश हैं।”
संकेत 23“मेरी द्रव्यमान संख्या 32 है और मेरे पास 16 न्यूट्रॉन हैं।”
संकेत 32“मेरा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 6 है।”
संकेत 4 (सरलतम)1“मेरा परमाणु क्रमांक 16 है और मेरे प्रतीक में एक ही अक्षर है।”

नियम। पाठक एक कार्ड उलटकर संकेत 1 पढ़ता है। कोई भी खिलाड़ी उत्तर दे सकता है। गलत उत्तर देने पर वह खिलाड़ी उस कार्ड के शेष दौर से बाहर हो जाता है। जब तक कोई सही उत्तर न दे, संकेत पढ़ते जाइए। जो खिलाड़ी उत्तर देता है उसे उस समय चल रहे संकेत के अंक मिलते हैं।

इसे और कठिन बनाइए — 'संबंध' कार्ड जोड़कर: “मैं 4020Ca का समभारिक हूँ और मेरा परमाणु क्रमांक 18 है: मैं कौन हूँ?” (आर्गन) अथवा “मैं 6 प्रोटॉन वाले तत्व का समस्थानिक हूँ और जीवाश्मों की आयु ज्ञात करने में काम आता हूँ” (146C)।

संकेत: उत्तर-कुंजी कार्ड पर नहीं, अलग पन्ने पर लिखिए ताकि कार्ड पुनः उपयोग हो सके। खेलने से पहले प्रत्येक कार्ड को तालिका 8.4 से मिलाकर जाँच लीजिए — गलत संकेत गलत तथ्य सिखाता है।
प्र2.
एक रिपोर्ट तैयार कीजिए जिसमें बताया गया हो कि परमाणुओं के गुणधर्म हमारे दैनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे— स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, कृषि और प्रौद्योगिकी पर कैसे प्रभाव डालते हैं।
उत्तर

अच्छी रिपोर्ट में क्या होना चाहिए: प्रत्येक क्षेत्र के लिए उस परमाणु-गुणधर्म का नाम लीजिए जो काम में आता है, कोई ठोस भारतीय उदाहरण दीजिए, और दोनों के बीच का संबंध समझाइए। केवल अनुप्रयोगों की सूची मत बनाइए — यह दिखाइए कि कौन-सा गुणधर्म प्रत्येक अनुप्रयोग को संभव बनाता है।

क्षेत्रप्रयुक्त परमाणु-गुणधर्मअनुप्रयोग
स्वास्थ्य सेवारेडियोधर्मी समस्थानिक भेदक विकिरण उत्सर्जित करते हैं; रासायनिक रूप से स्थायी समस्थानिक के समान होने से शरीर उन्हें वैसे ही ग्रहण करता हैकैंसर की रेडियोथेरेपी में 6027Co; घेंघा एवं थायरॉइड कैंसर के उपचार में 13153I, क्योंकि थायरॉइड ग्रंथि आयोडीन अवशोषित करती है
ऊर्जाभारी नाभिकों का खंडन ऊर्जा मुक्त करता है; न्यूट्रॉन अनावेशित होने से नाभिक में प्रवेश कर सकता हैतारापुर एवं कुडनकुलम जैसे नाभिकीय शक्ति संयंत्रों में ईंधन के रूप में 23592U
कृषिसमस्थानिक अनुज्ञापक (ट्रेसर) का काम करते हैं — रसायन वही, परंतु द्रव्यमान अथवा विकिरण से पहचान संभवफसल वास्तव में कितनी उर्वरक ग्रहण करती है यह पता लगाना; बीजों का विकिरणन कर उन्नत किस्में विकसित करना; उपज का विकिरणन कर उसे अधिक समय तक सुरक्षित रखना
प्रौद्योगिकीसंयोजकता इलेक्ट्रॉन विद्युत व्यवहार तय करते हैं; सिलिकॉन (2, 8, 4) में ठीक चार होते हैंप्रत्येक फोन एवं कंप्यूटर की सिलिकॉन चिप; BARC में न्यूट्रॉन प्रकीर्णन से परमाणु व्यवस्था का अध्ययन कर बनाई गई मिश्र धातुएँ
पुरातत्व एवं भूविज्ञानरेडियोधर्मी समस्थानिक एक निश्चित दर से क्षय होता हैजीवाश्मों, काष्ठ एवं कलाकृतियों की आयु ज्ञात करने हेतु 146C

ढाँचा जो अपनाएँ: (1) संक्षिप्त प्रस्तावना जिसमें बताइए कि आप किन परमाणु-गुणधर्मों का उपयोग करेंगे — समस्थानिक, संयोजकता इलेक्ट्रॉन, नाभिकीय ऊर्जा; (2) प्रत्येक क्षेत्र पर एक खंड जिसमें तालिका की पंक्ति को अनुच्छेद के रूप में विस्तार दीजिए; (3) रेडियोधर्मी पदार्थों के जोखिम एवं सुरक्षित रख-रखाव पर एक अनुच्छेद; (4) आपके स्रोत।

संकेत: भारतीय उदाहरणों के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग एवं BARC की वेबसाइटों का उपयोग कीजिए और जहाँ संभव हो रिएक्टर अथवा अस्पताल का ठीक नाम लिखिए। एक विशिष्ट उदाहरण दस सामान्य कथनों से अधिक मूल्यवान होता है।
प्र3.
‘एक यात्रा— परमाणु के भीतर’ तथा परमाणु संरचना की खोज करने वाले और उसकी पहचान में योगदान देने वाले वैज्ञानिकों पर किसी भूमिका-निर्वाह, मंचीय नाटक अथवा कहानी की रचना कीजिए।
उत्तर

नाटक तभी प्रभावी होगा जब प्रत्येक वैज्ञानिक मंच पर अपना दावा रखे और अगला वैज्ञानिक उसे चुनौती दे। नीचे एक दृश्य-योजना दी गई है जिस पर आप आगे बढ़ सकते हैं।

दृश्यपात्रवह संवाद जो विज्ञान को आगे ले जाता है
1आचार्य कणाद“द्रव्य को बार-बार बाँटते जाइए, आप परमाणु तक पहुँचेंगे — परंतु मैं यह तर्क से कहता हूँ, माप से नहीं।”
2जॉन डाल्टन (1808)“मैं भी यही कहता हूँ, परंतु अब प्रयोग के आधार पर: परमाणु द्रव्य के अविभाज्य निर्माण खंड हैं।”
3जे. जे. टॉमसन (1897)“मेरे कैथोड से कोई ऋणावेशित और अत्यंत हल्की वस्तु निकलती है — चाहे मैं कोई भी धातु लूँ। आपका परमाणु अविभाज्य नहीं है।”
4गाइगर एवं मार्सडेन (1911)“महोदय, कुछ अल्फा कण लौट आए हैं।” रदरफोर्ड: “यह उतना ही अविश्वसनीय है जितना किसी टिशू पेपर से गोले का लौट आना।”
5नील्स बोर (1913)“आपका नाभिक सही है, परंतु आपका इलेक्ट्रॉन तो गिर जाना चाहिए था। कक्षाओं को ठीक करने दीजिए — केवल कुछ निश्चित कोश, और उनमें ऊर्जा का कोई क्षय नहीं।”
6जेम्स चैडविक (1932)“हीलियम में दो प्रोटॉन हैं परंतु द्रव्यमान हाइड्रोजन का चार गुना। यह अनुपस्थित द्रव्यमान एक उदासीन कण है — न्यूट्रॉन।”
7होमी जहाँगीर भाभा“भारत अपने रिएक्टर और अपनी संस्थाएँ — TIFR एवं BARC — स्वयं बनाएगा, ताकि हम ये प्रश्न स्वयं पूछ सकें।”
8सूत्रधार“बोर भी अंतिम शब्द नहीं थे। आज इलेक्ट्रॉन एक मेघ है, और यह यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई।”

मंचन के सुझाव। कोश के लिए एक बड़ा घेरा (हूप) लीजिए और नीले कार्ड पकड़े विद्यार्थियों को उसमें चलाइए, जबकि बीच में लाल (प्रोटॉन) और हरे (न्यूट्रॉन) कार्ड पकड़े विद्यार्थी 'नाभिक' बनकर खड़े रहें। बड़े कोण का विक्षेपण दिखाने के लिए एक 'अल्फा कण' सीधी रेखा में चले और नाभिक के पास पहुँचकर तेज़ी से मुड़ जाए। बोर की छलाँग दिखाने के लिए इलेक्ट्रॉन भीतरी घेरे से बाहरी घेरे में तभी जाए जब उसे एक 'ऊर्जा' कार्ड दिया जाए।

स्वयं जाँचिए: ध्यान रखिए कि प्रत्येक दृश्य उसी प्रमाण पर समाप्त हो जिसने अगला परिवर्तन आवश्यक बनाया। परमाणु की कहानी प्रयोगों की कहानी है, मतों की नहीं।
प्र4.
उपयुक्त सॉफ्टवेयर अथवा डिजिटल उपकरणों का उपयोग करते हुए विभिन्न परमाणु प्रतिरूपों का सजीव चित्रण (animation) अथवा प्रतिरूपण (simulation) बनाने का प्रयास कीजिए और उन्हें कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर

आरंभ उन्हीं दो तैयार PhET प्रतिरूपणों से कीजिए जिनके लिंक पुस्तक स्वयं देती है — ये निःशुल्क हैं, ब्राउज़र में चलते हैं, और उन्हीं राशियों को बदलने देते हैं जो महत्त्वपूर्ण हैं।

  • Rutherford Scattering (phet.colorado.edu/en/simulations/rutherford-scattering) — प्लम पुडिंग परमाणु और नाभिकीय परमाणु के बीच बदल-बदलकर अल्फा कणों के पथों का अंतर देखिए। प्रोटॉनों की संख्या बढ़ाइए और देखिए कि विक्षेपण कैसे बढ़ते हैं।
  • Isotopes and Atomic Mass (phet.colorado.edu/en/simulations/isotopes-and-atomic-mass) — न्यूट्रॉन जोड़कर समस्थानिक बनाइए और प्रचुरता बदलकर देखिए कि औसत परमाणु द्रव्यमान कैसे बदलता है। 75% एवं 25% से क्लोरीन का 35.5 u स्वयं निकालने का प्रयास कीजिए।

स्वयं क्या बनाएँ। यदि आप स्क्रैच जैसे ब्लॉक-आधारित उपकरण का उपयोग करें तो प्रत्येक इलेक्ट्रॉन को एक स्प्राइट बनाइए जो वृत्ताकार पथ पर चले, और एक बटन जोड़िए जिससे इलेक्ट्रॉन K-घेरे से L-घेरे में तभी छलाँग लगाए जब एक निश्चित 'ऊर्जा क्वांटम' दिया जाए — यह एक विशेषता ही पूरा बोर मॉडल है।

प्रस्तुति में क्या कहें। प्रत्येक प्रतिरूपण के लिए बताइए — (i) यह कौन-सा मॉडल दर्शाता है, (ii) आपने क्या बदला, (iii) क्या हुआ, और (iv) इससे वास्तविक परमाणु के विषय में क्या ज्ञात होता है। चौथे बिंदु के बिना प्रतिरूपण केवल एक चलचित्र है।

संकेत: प्रतिरूपण मॉडल का भी मॉडल होता है। सदैव यह भी बताइए कि वह क्या छोड़ देता है — जैसे इनमें से कोई भी इलेक्ट्रॉन को मेघ के रूप में नहीं दिखाता, जबकि आधुनिक भौतिकी यही कहती है कि वह वास्तव में मेघ ही है।
प्र5.
परमाणु की संरचना के संदर्भ में कोई फिल्म अथवा डॉक्यूमेंट्री (वृत्तचित्र) देखिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देते हुए एक रिपोर्ट लिखिए। आपने कौन-सी फिल्म अथवा डॉक्यूमेंट्री देखी और उसका मुख्य विचार अथवा विषय क्या था? परमाणु की संरचना और परमाणु मॉडल/मॉडलों के विषय में फिल्म या डॉक्यूमेंट्री ने आपको क्या सिखाया? फिल्म अथवा डॉक्यूमेंट्री में किन वैज्ञानिकों का उल्लेख किया गया था और उनका क्या योगदान था? फिल्म अथवा डॉक्यूमेंट्री का कौन-सा भाग आपको सबसे रोचक लगा और आपके मन में अभी भी कौन-सा प्रश्न है?
उत्तर

यह रिपोर्ट आपको अपनी देखी हुई सामग्री के आधार पर लिखनी है, अतः यहाँ अपेक्षित गहराई दर्शाने वाला एक नमूना उत्तर दिया गया है।

नमूना उत्तर।

  • मैंने क्या देखा। परमाणु नाभिक की खोज पर आधारित एक वृत्तचित्र। इसका मुख्य विचार यह था कि तीस वर्षों में परमाणु का हमारा चित्र तीन बार नए सिरे से बनाना पड़ा, और हर बार इसलिए क्योंकि किसी एक प्रयोग ने ऐसा परिणाम दिया जिसकी किसी को अपेक्षा नहीं थी।
  • संरचना के विषय में क्या सिखाया। यह कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त स्थान है — वृत्तचित्र ने पैमाना एक स्टेडियम के बीच रखे मटर से समझाया, जो पुस्तक के 10–15 m बनाम 10–10 m के आँकड़े से मेल खाता है। इसने यह भी स्पष्ट किया कि बोर की सुव्यवस्थित कक्षाएँ एक सोपान भर हैं, अंतिम सत्य नहीं: आधुनिक चित्र संभावना के मेघ का है।
  • उल्लिखित वैज्ञानिक। जे. जे. टॉमसन (इलेक्ट्रॉन की खोज, 1897, तथा प्लम पुडिंग मॉडल); अरनेस्ट रदरफोर्ड (स्वर्ण पर्णिका के परिणामों की व्याख्या एवं नाभिकीय मॉडल, 1911); नील्स बोर (स्थायी अवस्थाएँ एवं ऊर्जा स्तर, 1913); जेम्स चैडविक (न्यूट्रॉन, 1932)।
  • सबसे रोचक भाग। यह जानना कि गाइगर एवं मार्सडेन को लौटते कणों को खोजने के लिए लगभग एक सामान्य जाँच के रूप में कहा गया था, जिससे किसी को कुछ मिलने की आशा ही नहीं थी — और पूरा नाभिकीय मॉडल उसी जाँच से निकला।
  • मेरे मन में शेष प्रश्न। यदि इलेक्ट्रॉन मेघ के रूप में रहते हैं और निश्चित पथों पर कण की भाँति नहीं, तो जब हम कहते हैं कि इलेक्ट्रॉन नाभिक की परिक्रमा करता है तो वास्तव में 'गति' क्या कर रहा होता है?
संकेत: अपनी रिपोर्ट लिखते समय फिल्म का नाम एवं वर्ष अवश्य लिखिए, और उसमें दिए प्रत्येक आँकड़े को इस अध्याय से मिलाकर जाँचिए। वृत्तचित्र कभी-कभी इतना सरल कर देते हैं कि बात गलत हो जाती है — उसे पकड़ लेना स्वयं में अच्छा विज्ञान है।
प्र6.
किन्हीं तीन तत्वों के प्रत्येक ऊर्जा स्तर में इलेक्ट्रॉनों की संख्या दर्शाते हुए एक स्तंभ ग्राफ बनाइए।
उत्तर

विधि: क्षैतिज अक्ष पर तीनों तत्व और ऊर्ध्वाधर अक्ष पर इलेक्ट्रॉनों की संख्या लीजिए, फिर प्रत्येक तत्व के लिए प्रत्येक कोश का एक स्तंभ बनाइए — K, L एवं M के लिए तीन स्तंभों का एक समूह। एक ही कोश के लिए पूरे ग्राफ में एक ही रंग रखिए।

सोडियम (2, 8, 1), सिलिकॉन (2, 8, 4) एवं आर्गन (2, 8, 8) लीजिए:

02468281सोडियम284सिलिकॉन288आर्गनइलेक्ट्रॉनों की संख्याK-कोशL-कोशM-कोश
सोडियम (2, 8, 1), सिलिकॉन (2, 8, 4) एवं आर्गन (2, 8, 8) के प्रत्येक ऊर्जा स्तर में इलेक्ट्रॉनों की संख्या। तीनों में K एवं L स्तंभ समान हैं; केवल M स्तंभ बदलता है।

ग्राफ से क्या पढ़ें। तीनों के K-स्तंभ 2 पर बराबर हैं और L-स्तंभ 8 पर बराबर हैं — भीतरी कोश तीनों में भरे हुए और एक जैसे हैं। केवल M-स्तंभ बदलता है: 1, 4 और 8। अर्थात एक अभिक्रियाशील धातु, एक अर्धचालक और एक अक्रिय गैस के रासायनिक व्यवहार का सारा अंतर उसी तीसरे स्तंभ में है।

ऐसा क्यों होता है: यह ग्राफ अध्याय के केंद्रीय विचार को आँखों के सामने रख देता है। रसायन केवल बाह्यतम कोश से तय होता है। सोडियम का एकमात्र M-इलेक्ट्रॉन सरलता से त्यागा जाता है (संयोजकता 1); सिलिकॉन के चार साझा किए जाते हैं (संयोजकता 4); आर्गन के आठ पूर्ण अष्टक हैं, अतः उसके पास विनिमय करने को कुछ है ही नहीं (संयोजकता 0)।
यह कीजिए: यही ग्राफ लीथियम (2, 1), सोडियम (2, 8, 1) एवं पोटैशियम (2, 8, 8, 1) के लिए बनाइए। तीनों का अंत एक ही बाहरी इलेक्ट्रॉन पर होता है — और तीनों नरम, अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ हैं। स्तंभ ग्राफ पर आवर्त सारणी का एक समूह ऐसा ही दिखता है।
प्र7.
परमाणुओं के विषय में और अधिक जानने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक देख सकते हैं।
उत्तर

पुस्तक कोलोराडो विश्वविद्यालय के दो PhET प्रतिरूपण देती है। दोनों निःशुल्क हैं और किसी भी ब्राउज़र में चलते हैं।

  • https://phet.colorado.edu/en/simulations/rutherford-scattering — प्लम पुडिंग परमाणु और नाभिकीय परमाणु, दोनों पर अल्फा कण दागिए और साथ-साथ देखिए। ध्यान दीजिए कि प्लम पुडिंग में केवल अत्यंत सूक्ष्म विक्षेपण होते हैं जबकि नाभिकीय परमाणु कुछ कणों को सीधे लौटा देता है। फिर नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या बढ़ाइए और देखिए कि विक्षेपण कैसे प्रबल होते जाते हैं।
  • https://phet.colorado.edu/en/simulations/isotopes-and-atomic-mass — न्यूट्रॉन जोड़कर एवं घटाकर किसी तत्व के समस्थानिक बनाइए और उनकी प्रचुरता बदलकर औसत परमाणु द्रव्यमान में परिवर्तन देखिए। क्लोरीन को 75% 35Cl एवं 25% 37Cl पर रखिए और जाँचिए कि 35.5 u मिलता है — ठीक वही जो पृष्ठ 155 पर परिकलित है।
संकेत: प्रतिरूपण खोलने से पहले लिखिए कि आप क्या होने की अपेक्षा करते हैं। फिर चलाइए। जिन क्षणों में प्रतिरूपण आपके पूर्वानुमान से असहमत हो, वही आपको वास्तव में कुछ सिखाएँगे — वर्ष 1911 में गाइगर एवं मार्सडेन के साथ ठीक यही हुआ था।
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