क्योंकि इनमें ऐसा कोई आवेशित कण है ही नहीं जो गति करने के लिए मुक्त हो — न आयन, न मुक्त इलेक्ट्रॉन।
धारा गतिशील आवेश के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। चालन के लिए पदार्थ को गतिशील आवेश-वाहक देने ही होंगे; कर्पूर और नैफ्थलीन कोई नहीं देते —
- ये वैद्युत उदासीन अणुओं से बने हैं। इनका प्रत्येक इलेक्ट्रॉन या तो सहसंयोजी आबंध के साझा युग्म में बँधा है या किसी परमाणु पर एकाकी युग्म के रूप में बैठा है — इनमें से कोई भी ठोस के भीतर विचरण नहीं कर सकता।
- ये जल में अघुलनशील हैं, अतः इन्हें सोडियम क्लोराइड की भाँति विलयन में आयन छोड़ने का अवसर ही नहीं मिलता।
- पिघलाने पर भी ये अणु के रूप में ही रहते हैं। कर्पूर को पिघलाने से अणु एक-दूसरे से ढीले पड़ जाते हैं, परंतु उनके भीतर के सहसंयोजी आबंध नहीं टूटते, अतः आयन तब भी नहीं बनते।