पहले धातु पहचानिए। उसका संयोजकता कोश M कोश है और उसमें दो इलेक्ट्रॉन हैं, अतः विन्यास 2, 8, 2 हुआ — अर्थात Z = 12, मैग्नीशियम।
(i) सूत्र — XO (मैग्नीशियम ऑक्साइड, MgO)
X (2, 8, 2) → X²⁺ (2, 8) + 2 e⁻
O (2, 6) + 2 e⁻ → O²⁻ (2, 8)
आवेशों का तिर्यक : X₂O₂, 2 से भाग → XO
आवेश जाँच : (+2) + (−2) = 0 ✓
(ii) आबंध का प्रकार — आयनिक। दो संयोजकता इलेक्ट्रॉन वाली धातु का सामना ऐसी अधातु से है जिसे दो इलेक्ट्रॉन कम हैं। इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है, साझेदारी नहीं, जिससे X²⁺ और O²⁻ बनते हैं और फिर स्थिर विद्युत आकर्षण उन्हें बाँधे रखता है।
(iii) जलीय विलयन की वैद्युत चालकता — चालन होगा, परंतु दुर्बल। यौगिक की जितनी भी अल्प मात्रा घुलती है वह मुक्त X²⁺ और O²⁻ (व्यवहार में OH⁻) आयनों के रूप में जाती है, और गतिशील आयन धारा ले जाते हैं। परंतु यौगिक अल्प घुलनशील है, अतः विलयन में आयनों की संख्या कम रहती है और बल्ब तेज़ के स्थान पर मंद प्रदीप्त होता है।
ऐसा क्यों होता है: चालकता इस पर निर्भर करती है कि प्रति इकाई आयतन में कितने गतिशील आयन हैं, केवल इस पर नहीं कि यौगिक आयनिक है या नहीं। आबंध का प्रकार यह तय करता है कि आयन बन सकते हैं या नहीं; विलेयता यह तय करती है कि कितने बनते हैं।
क्या आप जानते हैं? इसी अल्प घुलनशील यौगिक का जल में निलंबन ‘मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया’ के नाम से बिकता है और अम्लता दूर करने के लिए लिया जाता है — यह उपयोग उसे इसीलिए मिला है कि वह इतना कम घुलता है।