कक्षा ९ विज्ञान अध्याय 9 सोचिए और बताइए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
किसी ठोस यौगिक में किस प्रकार का रासायनिक आबंध होगा जो ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करता है परंतु जल में घुलने पर विद्युत का चालन करता है?
उत्तर

आयनिक आबंध। ये दोनों प्रेक्षण साथ मिलकर आयनिक यौगिक की सुनिश्चित पहचान हैं।

  • ठोस अवस्था में चालन नहीं — आयन वहाँ हैं तो सही, परंतु क्रिस्टल जालक में प्रबल स्थिर विद्युत बलों द्वारा नियत स्थितियों में जकड़े हैं, अतः कोई आवेश गति नहीं कर सकता।
  • जल में चालन — जल जालक को तोड़कर आयनों को मुक्त कर देता है। गतिशील होते ही धनायन ऋण इलेक्ट्रोड की ओर और ऋणायन धन इलेक्ट्रोड की ओर बहने लगते हैं, और यही बहाव धारा है।

सोडियम क्लोराइड और कॉपर सल्फेट दोनों ठीक ऐसा ही व्यवहार करते हैं, जैसा क्रियाकलाप 9.4 दर्शाता है।

ऐसा क्यों होता है: दोनों संकेतों को साथ पढ़ना आवश्यक है। केवल विलयन में चालन से निर्णय नहीं होता — तब भी चीनी जैसे सहसंयोजी यौगिक को अलग करना शेष रह जाता। ठोस में आयन उपस्थित पर अचल, और घुलने पर गतिशील — यही संयोजन अनन्य रूप से आयनिक आबंधन की ओर संकेत करता है।
स्वयं जाँचिए: ऐसे यौगिकों के गलनांक भी उच्च होते हैं, क्योंकि विपरीत आवेशित आयनों के जालक को तोड़ने में बहुत ऊर्जा लगती है। साधारण नमक लगभग 800 °C पर पिघलता है; कर्पूर, जो सहसंयोजी ठोस है, 180 °C से भी नीचे पिघल जाता है।
प्र2.
धातु X, जिसके संयोजकता कोश (M कोश) में दो इलेक्ट्रॉन हैं, ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर एक यौगिक बनाती है जो जल में अल्प घुलनशील है। इसके लिए निम्न का पूर्वानुमान लगाइए। (i) सूत्र (ii) आबंध के प्रकार (iii) उसके जलीय विलयन की वैद्युत चालकता
उत्तर

पहले धातु पहचानिए। उसका संयोजकता कोश M कोश है और उसमें दो इलेक्ट्रॉन हैं, अतः विन्यास 2, 8, 2 हुआ — अर्थात Z = 12, मैग्नीशियम

(i) सूत्र — XO (मैग्नीशियम ऑक्साइड, MgO)

X (2, 8, 2) → X²⁺ (2, 8) + 2 e⁻
O (2, 6) + 2 e⁻ → O²⁻ (2, 8)
आवेशों का तिर्यक : X₂O₂, 2 से भाग → XO
आवेश जाँच : (+2) + (−2) = 0

(ii) आबंध का प्रकार — आयनिक। दो संयोजकता इलेक्ट्रॉन वाली धातु का सामना ऐसी अधातु से है जिसे दो इलेक्ट्रॉन कम हैं। इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है, साझेदारी नहीं, जिससे X²⁺ और O²⁻ बनते हैं और फिर स्थिर विद्युत आकर्षण उन्हें बाँधे रखता है।

(iii) जलीय विलयन की वैद्युत चालकता — चालन होगा, परंतु दुर्बल। यौगिक की जितनी भी अल्प मात्रा घुलती है वह मुक्त X²⁺ और O²⁻ (व्यवहार में OH⁻) आयनों के रूप में जाती है, और गतिशील आयन धारा ले जाते हैं। परंतु यौगिक अल्प घुलनशील है, अतः विलयन में आयनों की संख्या कम रहती है और बल्ब तेज़ के स्थान पर मंद प्रदीप्त होता है।

ऐसा क्यों होता है: चालकता इस पर निर्भर करती है कि प्रति इकाई आयतन में कितने गतिशील आयन हैं, केवल इस पर नहीं कि यौगिक आयनिक है या नहीं। आबंध का प्रकार यह तय करता है कि आयन बन सकते हैं या नहीं; विलेयता यह तय करती है कि कितने बनते हैं।
क्या आप जानते हैं? इसी अल्प घुलनशील यौगिक का जल में निलंबन ‘मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया’ के नाम से बिकता है और अम्लता दूर करने के लिए लिया जाता है — यह उपयोग उसे इसीलिए मिला है कि वह इतना कम घुलता है।
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