कक्षा ९ गणित अध्याय 1 सोचिए और विचार कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
ऊपर दिए गए परावर्तन में कौन-से मान समान बने रहे और कौन-से मान परिवर्तित हुए?
उत्तर
अपरिवर्तितपरिवर्तित
तीनों भुजाओं की लंबाइयाँ: 5, √29, √40प्रत्येक x-निर्देशांक का चिह्न
तीनों कोण, अत: आकार पूर्णत: वहीस्थिति: प्रथम चतुर्थांश से द्वितीय चतुर्थांश में
परिमाप तथा क्षेत्रफल (13 वर्ग इकाई)दिशा-क्रम: A→D→M वामावर्त था, A′→D′→M′ दक्षिणावर्त है
प्रत्येक y-निर्देशांक, अत: x-अक्ष से प्रत्येक बिंदु की ऊँचाईप्रत्येक बिंदु y-अक्ष के किस ओर है
y-अक्ष से प्रत्येक बिंदु की दूरी (परिमाण, चिह्न नहीं)y-अक्ष से बाहर के किसी स्थिर बिंदु से दूरियाँ
लंबाइयाँ क्यों बचीं और दिशा-क्रम क्यों नहीं: परावर्तन दोनों विस्थापनों का परिमाण सुरक्षित रखता है — ऊर्ध्व विस्थापन ज्यों-का-त्यों और क्षैतिज विस्थापन चिह्न सहित — और दूरी सूत्र उनका वर्ग करता है, अत: प्रत्येक लंबाई अपरिवर्तित निकलती है। इसलिए परावर्तन एक सर्वांगसमता है: प्रतिबिंब त्रिभुज को मूल त्रिभुज पर ठीक-ठीक रखा जा सकता है। किंतु उसे बिना पलटे सरकाकर नहीं रखा जा सकता, क्योंकि दर्पण शीर्षों के पढ़े जाने के क्रम को उलट देता है। परावर्तन सदैव यही एक बात नष्ट करता है।
स्वयं जाँचिए: A (3, 4) से D तक विस्थापन (4, −3) है और M तक (6, 2)। प्रतिबिंब में A′ से D′ तक (−4, −3) और M′ तक (−6, 2) है — क्षैतिज भाग उलट गए, ऊर्ध्व भाग नहीं। यही असंगति त्रिभुज को पलट देती है।
प्र2.
क्या ये अवलोकन समान बने रहेंगे, यदि ∆ADM का परावर्तन (y-अक्ष के स्थान पर) x-अक्ष में हो रहा हो?
उत्तर

हाँ — सभी अवलोकन वैसे ही रहेंगे, केवल x और y की भूमिकाएँ बदल जाएँगी।

x-अक्ष में परावर्तन (x, y) को (x, −y) पर भेजता है
A (3, 4) → A″ (3, −4)   D (7, 1) → D″ (7, −1)   M (9, 6) → M″ (9, −6)

A″D″: विस्थापन 4 और |−4 − (−1)| = 3 → √(16 + 9) = 5 इकाई
D″M″: विस्थापन 2 और |−6 − (−1)| = 5 → √29 इकाई
M″A″: विस्थापन 6 और |−6 − (−4)| = 2 → √40 इकाई

त्रिभुज प्रथम चतुर्थांश से चतुर्थ चतुर्थांश में चला जाता है। लंबाइयाँ, कोण और क्षेत्रफल सुरक्षित रहते हैं; अब x-निर्देशांक अछूते रहते हैं और y-निर्देशांकों का चिह्न बदलता है; दिशा-क्रम पुन: उलट जाता है।

उत्तर वही क्यों होना ही था: दूरी सूत्र दोनों निर्देशांकों के साथ सममित व्यवहार करता है — दोनों अंतरों का वर्ग करके जोड़ा जाता है। अत: दर्पण चाहे कोई भी अक्ष हो, एक अंतर अपना चिह्न बनाए रखता है और दूसरा उलट जाता है, और वर्ग करने पर दोनों स्थितियों का भेद मिट जाता है। किसी भी सरल रेखा में किया गया परावर्तन दूरी को सुरक्षित रखता है; दर्पण का चयन केवल यह तय करता है कि प्रतिबिंब कहाँ बनेगा, यह नहीं कि उसका आकार क्या होगा।
यह कीजिए: ∆ADM का परावर्तन पहले y-अक्ष में और फिर परिणाम का x-अक्ष में कीजिए। आप (−3, −4), (−7, −1), (−9, −6) पर, अर्थात तृतीय चतुर्थांश में पहुँचेंगे। दो परावर्तनों ने वामावर्त क्रम लौटा दिया — संयुक्त प्रभाव मूलबिंदु के परित: आधा घूर्णन है, दर्पण प्रतिबिंब नहीं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ