प्र1.
ऊपर दिए गए परावर्तन में कौन-से मान समान बने रहे और कौन-से मान परिवर्तित हुए?
उत्तर
| अपरिवर्तित | परिवर्तित |
|---|---|
| तीनों भुजाओं की लंबाइयाँ: 5, √29, √40 | प्रत्येक x-निर्देशांक का चिह्न |
| तीनों कोण, अत: आकार पूर्णत: वही | स्थिति: प्रथम चतुर्थांश से द्वितीय चतुर्थांश में |
| परिमाप तथा क्षेत्रफल (13 वर्ग इकाई) | दिशा-क्रम: A→D→M वामावर्त था, A′→D′→M′ दक्षिणावर्त है |
| प्रत्येक y-निर्देशांक, अत: x-अक्ष से प्रत्येक बिंदु की ऊँचाई | प्रत्येक बिंदु y-अक्ष के किस ओर है |
| y-अक्ष से प्रत्येक बिंदु की दूरी (परिमाण, चिह्न नहीं) | y-अक्ष से बाहर के किसी स्थिर बिंदु से दूरियाँ |
लंबाइयाँ क्यों बचीं और दिशा-क्रम क्यों नहीं: परावर्तन दोनों विस्थापनों का परिमाण सुरक्षित रखता है — ऊर्ध्व विस्थापन ज्यों-का-त्यों और क्षैतिज विस्थापन चिह्न सहित — और दूरी सूत्र उनका वर्ग करता है, अत: प्रत्येक लंबाई अपरिवर्तित निकलती है। इसलिए परावर्तन एक सर्वांगसमता है: प्रतिबिंब त्रिभुज को मूल त्रिभुज पर ठीक-ठीक रखा जा सकता है। किंतु उसे बिना पलटे सरकाकर नहीं रखा जा सकता, क्योंकि दर्पण शीर्षों के पढ़े जाने के क्रम को उलट देता है। परावर्तन सदैव यही एक बात नष्ट करता है।
स्वयं जाँचिए: A (3, 4) से D तक विस्थापन (4, −3) है और M तक (6, 2)। प्रतिबिंब में A′ से D′ तक (−4, −3) और M′ तक (−6, 2) है — क्षैतिज भाग उलट गए, ऊर्ध्व भाग नहीं। यही असंगति त्रिभुज को पलट देती है।