कक्षा ९ गणित अध्याय 1 सोचिए और विचार कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
किसी कमरे के द्वार के लिए मानक चौड़ाई क्या है? अपने घर और विद्यालय के परिवेश में देखिए।
उत्तर

भारतीय घरों और विद्यालयों में प्रचलित चौड़ाइयाँ:

द्वारसामान्य चौड़ाईफुट में
मुख्य प्रवेशद्वार900–1000 मि.मी.3 – 3.3 फुट
शयनकक्ष / कमरे का द्वार750–900 मि.मी.2.5 – 3 फुट
स्नानगृह / शौचालय का द्वार700–750 मि.मी.2.3 – 2.5 फुट
कक्षा-कक्ष का द्वार900–1200 मि.मी.3 – 4 फुट

द्वारों की ऊँचाई प्राय: 2.0–2.1 मी. (लगभग 6.5–7 फुट) होती है।

यह कीजिए: अपने आस-पास के पाँच द्वार मापिए और प्रत्येक को से.मी. में क्रमित युग्म (चौड़ाई, ऊँचाई) के रूप में लिखिए। अब चौड़ाई को x तथा ऊँचाई को y मानकर पाँचों बिंदुओं का अंकन कीजिए। आप देखेंगे कि सभी बिंदु एक सँकरी पट्टी में एकत्र हैं — द्वार मनमाने मापों में नहीं बनाए जाते और आलेख इसे एक दृष्टि में दिखा देता है।
ऐसा क्यों होता है: चौखट नहीं, खुला अंतराल मापिए। द्वार पूरा खुलने पर भी पल्ला और कब्जे कुछ स्थान घेरते हैं, इसलिए उपयोगी अंतराल प्राय: चौखट से 25–50 मि.मी. कम होता है।
प्र2.
क्या आपके विद्यालय के द्वार व्हीलचेयर पर बैठे व्यक्तियों के लिए उपयुक्त हैं?
उत्तर

केवल एक नहीं, तीन बातों पर प्रत्येक द्वार की जाँच कीजिए—

  1. खुली चौड़ाई। भारत के बाधामुक्त निर्मित परिवेश हेतु सामंजस्यपूर्ण दिशा-निर्देश कम-से-कम 900 मि.मी. खुला अंतराल माँगते हैं। 750 मि.मी. का स्नानगृह द्वार इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
  2. देहली। द्वार पर उठी हुई देहली या सीढ़ी व्हीलचेयर को रोक देती है, चाहे द्वार कितना ही चौड़ा हो। फर्श समतल होना चाहिए अथवा लगभग 1 : 12 की मंद ढाल वाली रैंप होनी चाहिए।
  3. घूमने का स्थान। व्हीलचेयर को मुड़ने के लिए लगभग 1500 मि.मी. × 1500 मि.मी. का खुला वृत्ताकार क्षेत्र चाहिए, अत: सँकरे गलियारे में खुलता चौड़ा द्वार भी उपयोगी नहीं रहता।

अधिकांश विद्यालय भवनों में कक्षा-कक्षों के द्वार चौड़ाई की कसौटी पूरी कर देते हैं और शौचालय के द्वार नहीं — और वही द्वार सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

यह कीजिए: अपने विद्यालय भवन के प्रत्येक द्वार की एक सारणी बनाइए जिसमें चौड़ाई, देहली की ऊँचाई और उत्तीर्ण/अनुत्तीर्ण के स्तंभ हों। यही सारणी एक छोटा सुगम्यता-सर्वेक्षण है और विद्यालय इस पर वास्तव में कार्य कर सकता है।
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