प्र1.
किसी कमरे के द्वार के लिए मानक चौड़ाई क्या है? अपने घर और विद्यालय के परिवेश में देखिए।
उत्तर
भारतीय घरों और विद्यालयों में प्रचलित चौड़ाइयाँ:
| द्वार | सामान्य चौड़ाई | फुट में |
|---|---|---|
| मुख्य प्रवेशद्वार | 900–1000 मि.मी. | 3 – 3.3 फुट |
| शयनकक्ष / कमरे का द्वार | 750–900 मि.मी. | 2.5 – 3 फुट |
| स्नानगृह / शौचालय का द्वार | 700–750 मि.मी. | 2.3 – 2.5 फुट |
| कक्षा-कक्ष का द्वार | 900–1200 मि.मी. | 3 – 4 फुट |
द्वारों की ऊँचाई प्राय: 2.0–2.1 मी. (लगभग 6.5–7 फुट) होती है।
यह कीजिए: अपने आस-पास के पाँच द्वार मापिए और प्रत्येक को से.मी. में क्रमित युग्म (चौड़ाई, ऊँचाई) के रूप में लिखिए। अब चौड़ाई को x तथा ऊँचाई को y मानकर पाँचों बिंदुओं का अंकन कीजिए। आप देखेंगे कि सभी बिंदु एक सँकरी पट्टी में एकत्र हैं — द्वार मनमाने मापों में नहीं बनाए जाते और आलेख इसे एक दृष्टि में दिखा देता है।
ऐसा क्यों होता है: चौखट नहीं, खुला अंतराल मापिए। द्वार पूरा खुलने पर भी पल्ला और कब्जे कुछ स्थान घेरते हैं, इसलिए उपयोगी अंतराल प्राय: चौखट से 25–50 मि.मी. कम होता है।