कक्षा ९ गणित अध्याय 3 प्रश्नावली 3.1 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
बंदरगाह नगर लोथल में एक व्यापारी ताम्र शिलिकाओं को लेने के लिए मसालों की थैलियों का विनिमय करता है। वह मसाले की प्रत्येक 2 थैलियों से 15 ताम्र शिलिकाएँ लेता है। यदि वह बाजार में मसालों की 12 थैलियाँ लेकर जाता है तो वह उनके बदले कितनी ताम्र शिलिकाएँ बाजार से लेकर आएगा?
उत्तर

वह 90 ताम्र शिलिकाएँ लेकर आएगा।

12 थैलियाँ = 2 थैलियों के 6 समूह
2 थैलियों के प्रत्येक समूह से → 15 शिलिकाएँ
कुल शिलिकाएँ = 6 × 15 = 90

वही उत्तर इकाई दर से —

1 थैली → 15 ÷ 2 = 7.5 शिलिकाएँ
12 थैलियाँ → 12 × 7.5 = 90 शिलिकाएँ
ऐसा क्यों होता है: यह विनिमय 15 : 2 के स्थिर अनुपात में है। अनुपात के दोनों पदों को एक ही संख्या से गुणा करने पर अनुपात नहीं बदलता, और 12 = 6 × 2 है, अत: शिलिकाएँ 6 × 15 ही होंगी। ध्यान दीजिए कि इकाई दर 7.5 पूर्ण संख्या नहीं है, फिर भी उत्तर पूर्ण संख्या है — क्योंकि 12, 2 का गुणज है।
प्र2.
इशांगो अस्थि के एक स्तंभ पर संख्याओं का अनुक्रम — 11, 13, 17, 19 देखिए। इन संख्याओं में क्या समानता है? इस प्रतिरूप में उपयुक्त आगामी तीन संख्याओं को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर

ये चारों अभाज्य संख्याएँ हैं — वस्तुत: 10 और 20 के मध्य की सभी अभाज्य संख्याएँ यही हैं।

11 = 1 × 11 मात्र
13 = 1 × 13 मात्र
17 = 1 × 17 मात्र
19 = 1 × 19 मात्र

19 के आगे प्रत्येक संख्या की जाँच कीजिए कि उसका 1 और स्वयं के अतिरिक्त कोई गुणनखंड है या नहीं —

संख्यागुणनखंडअभाज्य?
20, 21, 222·10, 3·7, 2·11नहीं
231 और 23 के अतिरिक्त कोई नहींहाँ
24 … 28सभी भाज्यनहीं
291 और 29 के अतिरिक्त कोई नहींहाँ
302·15नहीं
311 और 31 के अतिरिक्त कोई नहींहाँ

अत: आगामी तीन संख्याएँ 23, 29 और 31 हैं।

क्या आप जानते हैं? यह जाँचने के लिए कि n अभाज्य है या नहीं, केवल √n तक की अभाज्य संख्याओं से विभाजन करना पर्याप्त है। 31 के लिए √31 < 6 है, अत: 2, 3 और 5 से जाँच कर लेना पर्याप्त है।
प्र3.
हमें ज्ञात है कि प्राकृत संख्याएँ योग के अंतर्गत संवृत होती हैं (किन्हीं दो प्राकृत संख्याओं का योग सदैव एक प्राकृत संख्या होती है)। क्या ये संख्याएँ घटाव के अंतर्गत संवृत होती हैं? अपने उत्तर को सिद्ध करने हेतु कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर

नहीं — प्राकृत संख्याएँ घटाव के अंतर्गत संवृत नहीं हैं।

3 − 5 = −2, और −2 प्राकृत संख्या नहीं है
7 − 7 = 0, और 0 भी प्राकृत संख्या नहीं है
ऐसा क्यों होता है: संवृतता का अर्थ है कि संक्रिया आपको कभी समुच्चय से बाहर न ले जाए। योग कभी बाहर नहीं ले जाता, क्योंकि a + b सदैव a से बड़ा या बराबर होता है और {1, 2, 3, …} में ही रहता है। घटाव ले जाता है — जब भी b ≥ a हो, a − b बाहर चला जाता है। संवृतता के दावे को असत्य सिद्ध करने के लिए एक ही प्रति-उदाहरण पर्याप्त है; सौ सफल उदाहरण भी उसे सिद्ध नहीं करते।

यही अभाव गणित को आगे ले गया। घटाव को सदैव संभव बनाने के लिए ब्रह्मगुप्त ने शून्य और ऋणात्मक संख्याएँ जोड़ीं — और यह बड़ा समुच्चय, अर्थात पूर्णांक (Z), घटाव के अंतर्गत संवृत है।

प्र4.
प्राचीन भारत के निवासी गणना करने के लिए अपनी अंगुलियों की संधियों का उपयोग करते थे, जो वर्तमान में भी प्रचलन में है। प्रत्येक अंगुली में तीन संधियाँ होती हैं और अंगूठे का उपयोग उन्हें गिनने के लिए किया जाता है। एक हाथ पर आप कितनी गिनती कर सकते हैं? यह प्राचीन आधार-12 गणन पद्धतियों से कैसे संबंधित है?
उत्तर

एक हाथ पर 12 तक गिनती की जा सकती है।

गिनने के लिए उपयोग की जाने वाली अंगुलियाँ = 4 (अंगूठा संकेतक है)
प्रत्येक अंगुली में संधियाँ = 3
कुल संधियाँ = 4 × 3 = 12

अंगूठा एक-एक करके प्रत्येक संधि को स्पर्श करता है — कनिष्ठिका की तीन, अनामिका की तीन, मध्यमा की तीन और तर्जनी की तीन — और एक पूरा हाथ एक दर्जन बन जाता है।

ऐसा क्यों होता है: गणन का आधार वस्तुत: उस स्वाभाविक समूह का आकार है जिसे पूरा करके हम पुन: आरंभ करते हैं। यहाँ हाथ 12 पर पूरा भर जाता है, अत: 12 ही आधार बन जाता है। दूसरे हाथ पर पूरे हुए दर्जन गिनने पर 12 × 12 = 144 (एक ग्रोस) प्राप्त होता है — इसी कारण दर्जन, ग्रोस, 12 इंच का एक फुट और 12 माह का एक वर्ष आज भी प्रचलित हैं।
सुझाव: 12 के गुणनखंड 1, 2, 3, 4, 6, 12 हैं जबकि 10 के केवल 1, 2, 5, 10। दर्जन का आधा, तिहाई और चौथाई — तीनों पूर्ण संख्याएँ हैं। व्यापारियों को आधार 12 इसी व्यावहारिक कारण से प्रिय था।
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