कक्षा ९ गणित अध्याय 3 प्रश्नावली 3.2 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
मध्याह्न के समय उच्च तुंगता वाले लद्दाख के मरुस्थल में तापमान 4°C अंकित किया गया है। मध्यरात्रि के समय इसके तापमान में 15°C की कमी हो जाती है। मध्यरात्रि का तापमान क्या है?
उत्तर

मध्यरात्रि का तापमान −11°C है।

मध्यरात्रि = मध्याह्न का तापमान − कमी
= 4 − 15
= −11°C

संख्या रेखा पर 4 से आरंभ कीजिए और 15 इकाई बाईं ओर चलिए। 4 पग बाद आप 0 पार कर जाते हैं और 11 पग और ऋणात्मक पक्ष में चले जाते हैं।

−15−12−9−6−30369 4 −11 15 की कमी
4°C से 15°C की कमी शून्य के 11 इकाई बाईं ओर पहुँचा देती है।
सुझाव: 'कमी' का अर्थ सदैव घटाना होता है। 4 में 15 की कमी 4 − 15 लिखी जाती है, 15 − 4 कभी नहीं।
प्र2.
एक मसाला-व्यापारी ₹850 का ऋण लेता है। अगले दिन उसे ₹1200 का लाभ (धन) प्राप्त होता है। आने वाले सप्ताह में उसे ₹450 की हानि होती है। इस अनुक्रम को पूर्णांकों का उपयोग करते हुए समीकरण के रूप में लिखिए और उसके अंतिम लाभ-हानि की गणना कीजिए।
उत्तर

ऋणभार को ऋणात्मक और धन-संपत्ति को धनात्मक पूर्णांक लिखने पर —

(−850) + 1200 + (−450)
= 350 + (−450)
= −100

उसकी अंतिम स्थिति −₹100 है, अर्थात उस पर ₹100 का ऋणभार शेष है।

ऐसा क्यों होता है: ब्रह्मगुप्त के नियम तीनों लेन-देन को एक ही संख्या रेखा पर ले आते हैं। ₹850 का ऋण और ₹1200 का लाभ आंशिक रूप से एक-दूसरे को काट देते हैं — लाभ में से 850 ऋण चुकाने में लगते हैं और 350 शेष रहते हैं। बाद की ₹450 की हानि इन 350 से अधिक है, अत: वह व्यापारी को शून्य के पार 100 तक धकेल देती है।
स्वयं जाँचिए: क्रम से कोई अंतर नहीं पड़ता। 1200 + (−850) + (−450) = 1200 − 1300 = −100, वही उत्तर, क्योंकि पूर्णांकों का योग क्रम विनिमेय और साहचर्य है।
प्र3.
ब्रह्मगुप्त के नियमों का उपयोग करते हुए निम्नलिखित की गणना कीजिए — (i) (−12) × 5 (ii) (−8) × (−7) (iii) 0 − (−14) (iv) (−20) ÷ 4
उत्तर
भागब्रह्मगुप्त का नियमहलउत्तर
(i) (−12) × 5ऋण × धन = ऋण12 × 5 = 60, चिह्न ऋणात्मक−60
(ii) (−8) × (−7)ऋण × ऋण = धन8 × 7 = 56, चिह्न धनात्मक56
(iii) 0 − (−14)ऋण हटाना धन है0 + 1414
(iv) (−20) ÷ 4ऋणभार 4 बराबर भागों में20 ÷ 4 = 5, चिह्न ऋणात्मक−5
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक स्थिति में उत्तर का परिमाण सामान्य पूर्ण-संख्या अंकगणित से आता है, केवल चिह्न ऋण-धन नियम से आता है। भाग (iv) विभाजन है और वह भी वही चिह्न-नियम मानता है, क्योंकि (−5) × 4 = −20 है।
स्वयं जाँचिए: (iii) का अर्थ है 'शून्य में से 14 का ऋणभार घटाना'। यदि आप पर कोई ऋण न हो और कोई आपके लिए ₹14 का ऋण निरस्त कर दे तो आप ₹14 धनी हो जाते हैं — अत: उत्तर +14 ही होगा।
प्र4.
वास्तविक जीवन से संबंधित ऋणभार के एक उदाहरण का उपयोग करते हुए विस्तारपूर्वक बताइए कि किसी ऋणात्मक संख्या को घटाना, एक धनात्मक संख्या का योग करने के समान क्यों है (जैसे 10 − (−5) = 15)।
उत्तर

मान लीजिए आपके पास ₹10 हैं और आपके खाते में ₹5 का ऋणभार भी है, जिसे −5 लिखा जाता है। यदि कोई संबंधी वह ऋणभार हटा ले — अर्थात −5 को घटा दे — तो आपकी जेब से कुछ नहीं जाता, फिर भी आप ₹5 बेहतर स्थिति में आ जाते हैं।

10 − (−5)
= 10 + 5
= 15

बीजगणितीय कारण यह है कि घटाना अर्थात योज्य व्युत्क्रम जोड़ना, और −5 का योज्य व्युत्क्रम +5 है —

a − b = a + (−b)
10 − (−5) = 10 + [−(−5)] = 10 + 5 = 15
ऐसा क्यों होता है: −(−5) का मान 5 ही होना चाहिए, क्योंकि −5 और 5 का योग 0 है और किसी संख्या का योज्य व्युत्क्रम केवल एक ही होता है। इस प्रकार दोनों ऋण चिह्न एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। ऋण के चित्रण में — ऋणभार ऋणात्मक राशि है, और ऋणात्मक राशि का हटना लाभ है।
सुझाव: '−(−5)' को '5 का ऋणभार हटाना' पढ़िए, न कि 'दो ऋण चिह्न मिलकर धन बन गए'। अर्थ समझ लेने पर नियम कभी नहीं भूलता।
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