कक्षा ९ गणित अध्याय 3 प्रश्नावली 3.4 के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-08
प्र1.
एक ही संख्या रेखा पर 2/3, − 5/4 और 1 1/2 को निरूपित कीजिए।
उत्तर
प्रत्येक संख्या को उसके अपने इकाई अंतराल को हर द्वारा बताए गए भागों में बाँटकर अंकित किया जाता है।
संख्या
किनके मध्य
रचना
2/3
0 और 1
0–1 को 3 भागों में बाँटकर दाईं ओर 2 भाग
−5/4 = −1 1/4
−2 और −1
−1 से −2 को 4 भागों में बाँटकर −1 से बाईं ओर 1 भाग
1 1/2 = 3/2
1 और 2
1 और 2 के ठीक मध्य
तीनों परिमेय संख्याएँ −2 से 2 तक की एक ही संख्या रेखा पर अंकित।
सुझाव: यदि तीनों को एक ही मापनी पर लाना हो तो बारहवें भाग लीजिए — 2/3 = 8/12, −5/4 = −15/12 और 3/2 = 18/12, क्योंकि 12 = ल.स. (3, 4, 2)।
प्र2.
अनिवार्य रूप से − 1/2 और 1/4 के मध्य विद्यमान तीन भिन्न परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
उत्तर
दोनों सीमाओं को ऐसे सार्व हर पर लिखिए कि उनके बीच पर्याप्त पूर्णांक अंश आ सकें।
ल.स. (2, 4) = 4, अत: −1/2 = −2/4 और 1/4 = 1/4
इनके ठीक मध्य केवल 0/4 आता है — एक संख्या, तीन नहीं
अत: हर बड़ा कीजिए — आठवें भाग लीजिए
−1/2 = −4/8 और 1/4 = 2/8
अब −4 और 2 के मध्य के पूर्णांक हैं −3, −2, −1, 0, 1 — पाँच विकल्प। इनमें से कोई तीन लीजिए —
ऐसा क्यों होता है: सार्व हर d के साथ दोनों सीमाओं के मध्य की संख्याएँ ठीक वही k/d हैं जिनके अंश k दोनों अंशों के मध्य पड़ते हैं। अत: विकल्पों की संख्या पूरी तरह इस बात पर निर्भर है कि अंश कितनी दूर हैं — और हर को 2 से गुणा करने पर सीमाएँ हिले बिना यह दूरी दोगुनी हो जाती है।
स्वयं जाँचिए: बार-बार माध्य लेने से भी उत्तर मिलेगा। (−1/2 + 1/4)/2 = −1/8; फिर −1/8 का दोनों सीमाओं से माध्य लेने पर −5/16 और 1/16 मिलते हैं।
प्र3.
व्यंजक (−1/4) + (5/12) का सरलीकरण कीजिए।
उत्तर
ल.स. (4, 12) = 12
−1/4 = −3/12
−3/12 + 5/12 = 2/12
अंश और हर को 2 से विभाजित कीजिए
= 1/6
ऐसा क्यों होता है: 5/12, 1/4 = 3/12 से बड़ा है, अत: योग 0 के धनात्मक पक्ष में आता है। 2/12 को 1/6 करना उचित है क्योंकि 2/12 और 1/6 समतुल्य परिमेय संख्याएँ हैं, और अध्याय के अनुसार परिमेय संख्या को उसके सह-अभाज्य रूप में नामित करना चाहिए।
प्र4.
एक दर्जी के पास 15 3/4 मीटर परिष्कृत रेशमी कपड़ा है। यदि एक कुर्ता बनाने के लिए 2 1/4 मीटर रेशमी कपड़े की आवश्यकता होती है तो दर्जी कुल कितने कुर्ते बना सकता है?
उत्तर
दोनों मिश्र संख्याओं को विषम भिन्न में बदलकर विभाजन कीजिए।
दर्जी ठीक 7 कुर्ते बना सकता है और कपड़ा कुछ भी शेष नहीं बचेगा।
ऐसा क्यों होता है: दोनों लंबाइयाँ चौथाई-मीटर की पूर्ण संख्याएँ हैं — 63 चौथाई और 9 चौथाई। उनका विभाजन केवल 63 ÷ 9 है, और चूँकि 9, 63 को पूर्णत: विभाजित करता है, कुछ शेष नहीं रहता। सार्व हर ने ही सारा कार्य कर दिया।
स्वयं जाँचिए: 7 × 2 1/4 = 7 × 9/4 = 63/4 = 15 3/4 मीटर ✓
प्र5.
3.1415 और 3.1416 के मध्य तीन परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
उत्तर
एक और दशमलव स्थान जोड़ दीजिए। चौथे स्थान की संख्याओं 3.1415 और 3.1416 के मध्य पाँचवें स्थान की नौ संख्याओं के लिए स्थान है।
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक सांत दशमलव एक परिमेय संख्या है, और एक और दशमलव स्थान जोड़ने पर हर 10 गुना हो जाता है तथा दोनों अंश भी 10 गुने। अंशों के बीच की दूरी 1 से बढ़कर 10 हो जाती है और नौ नई परिमेय संख्याएँ बन जाती हैं — यह क्रम अनंत तक दोहराया जा सकता है। यही परिमेय संख्याओं की सघनता है, दशमलव के वेश में।
क्या आप जानते हैं? π = 3.14159265… इसी अंतराल में स्थित है, परंतु π इस विधि से सूचीबद्ध परिमेय संख्याओं में नहीं है — इसका दशमलव न कभी समाप्त होता है, न आवर्ती होता है।
प्र6.
क्या आप किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के मध्य एक परिमेय संख्या ज्ञात करने की किसी अन्य विधि सोच सकते हैं?
उत्तर
हाँ — माध्य केवल एक विधि है। यहाँ तीन और विधियाँ हैं, प्रत्येक अपनी उपपत्ति के साथ।
सार्व हर, बड़ा हर। a = p/m और b = r/m इस प्रकार लिखिए कि r − p ≥ 2 हो (आवश्यकता हो तो m बड़ा कीजिए)। तब (p + 1)/m उनके ठीक मध्य में स्थित होगी।
भारित माध्य। 0 < t < 1 वाली किसी भी परिमेय संख्या t के लिए ta + (1 − t)b, a और b के मध्य स्थित होती है। t = 1/2 लेने पर साधारण माध्य मिलता है; t = 1/3 लेने पर एक-तिहाई दूरी का बिंदु।
दो भिन्नों का मध्यक (मीडिएंट)। धनात्मक a = p/q और b = r/s के लिए, यदि p/q < r/s हो तो भिन्न (p + r)/(q + s) सदैव उनके मध्य स्थित होती है।
तीसरी विधि, जो सबसे कम स्पष्ट है, उसकी उपपत्ति —
p/q < r/s का अर्थ है ps < qr
(p + r)/(q + s) − p/q = (q(p + r) − p(q + s))/(q(q + s))
= (qr − ps)/(q(q + s)) > 0
इसी प्रकार r/s − (p + r)/(q + s) = (qr − ps)/(s(q + s)) > 0
अत: p/q < (p + r)/(q + s) < r/s।
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक विधि में उत्तर a, b और पूर्णांकों से केवल +, −, × और शून्येतर संख्या से ÷ द्वारा बनाया गया है। चूँकि परिमेय संख्याएँ इन चारों संक्रियाओं के अंतर्गत संवृत हैं, परिणाम परिमेय होना ही है; असमिकाएँ फिर उसे अंतराल के भीतर बाँध देती हैं। 1/2 और 2/3 पर मध्यक लगाइए — (1 + 2)/(2 + 3) = 3/5, और वास्तव में 1/2 < 3/5 < 2/3।
सुझाव: मध्यक भिन्नों का योग नहीं है। (p + r)/(q + s) एक प्रसिद्ध रचना है और इसी कारण फैरे अनुक्रम की भिन्नें इतने सुंदर क्रम में सजती हैं।
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