प्र1.
इस विधि को मापनी और परकार के उपयोग से √3 और √5 लंबाई के रेखाखंडों की रचना करने के लिए विस्तारित कीजिए। इस विधि को किसी भी √n रूप की लंबाई के रेखाखंड की रचना करने के लिए व्यापकीकृत कीजिए, जहाँ n एक धनात्मक पूर्णांक है।
उत्तर
√3 की लंबाई। P पर बने √2 से आरंभ कीजिए।
P पर लंब खींचकर PC = 1 अंकित कीजिए
OC² = OP² + PC² = (√2)² + 1² = 2 + 1 = 3
अत: OC = √3
परकार से OC को संख्या रेखा पर घुमा दीजिए
OC² = OP² + PC² = (√2)² + 1² = 2 + 1 = 3
अत: OC = √3
परकार से OC को संख्या रेखा पर घुमा दीजिए
√5 की लंबाई। दो बार और दोहराइए, अथवा 1 और 2 भुजाओं से सीधा रास्ता लीजिए —
√3 से एक इकाई लंब — 3 + 1 = 4, अत: √4 = 2
2 से एक इकाई लंब — 4 + 1 = 5, अत: √5
सीधा रास्ता — भुजाएँ 2 और 1 से 2² + 1² = 5
2 से एक इकाई लंब — 4 + 1 = 5, अत: √5
सीधा रास्ता — भुजाएँ 2 और 1 से 2² + 1² = 5
व्यापक नियम। √n बना लेने पर उसके सिरे पर 1 लंबाई का लंब खींचिए। नया कर्ण —
(नया)² = (√n)² + 1² = n + 1
नई लंबाई = √(n + 1)
नई लंबाई = √(n + 1)
अत: OA = 1 = √1 से आरंभ करके यह रचना एक-एक चरण चढ़ती है — √1 → √2 → √3 → √4 → … → √n, किसी भी धनात्मक पूर्णांक n के लिए ठीक n − 1 चरणों में। इसे अनंत तक दोहराने पर चित्र 3.14 का वर्गमूल सर्पिल बनता है।
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक चरण लंबाई में नहीं, अपितु लंबाई के वर्ग में ठीक 1 जोड़ता है। इसीलिए सर्पिल का बाहरी किनारा धीरे-धीरे और धीमा बढ़ता है — √n और √(n + 1) का अंतर n बढ़ने पर घटता जाता है, क्योंकि √(n+1) − √n = 1/(√(n+1) + √n)।
स्वयं जाँचिए: इस रचना में चाँदे की कभी आवश्यकता नहीं पड़ती। मापनी और परकार पर्याप्त हैं, क्योंकि किसी बिंदु पर लंब केवल परकार से खींचा जा सकता है।