वही सर्वसमिका चुनिए जिससे टुकड़े छोटे रहें: संख्या पूर्ण संख्या के निकट हो तो दो पदों वाली, अन्यथा तीन पदों वाली।
(i) 117² — (a + b + c)² से, 100 + 10 + 7।
= 100² + 10² + 7² + 2(100)(10) + 2(10)(7) + 2(7)(100)
= 10000 + 100 + 49 + 2000 + 140 + 1400
= 13689
(ii) 78² — (a − b)² से, 80 − 2।
= 80² − 2 × 80 × 2 + 2² = 6400 − 320 + 4 = 6084
(iii) 198² — (a − b)² से, 200 − 2।
= 40000 − 800 + 4 = 39204
(iv) 214² — (a + b + c)² से, 200 + 10 + 4।
= 40000 + 100 + 16 + 2(200)(10) + 2(10)(4) + 2(4)(200)
= 40000 + 100 + 16 + 4000 + 80 + 1600 = 45796
(v) 1104² — (a + b)² से, 1100 + 4।
= 1100² + 2 × 1100 × 4 + 4² = 1210000 + 8800 + 16 = 1218816
(vi) 1120² — (a + b)² से, 1100 + 20।
= 1210000 + 2 × 1100 × 20 + 400 = 1210000 + 44000 + 400 = 1254400
कौन-सी सर्वसमिका और क्यों: जब संख्या किसी पूर्ण संख्या के ठीक पास हो तो दो पदों का विभाजन पर्याप्त है — 78, 198, 1104, 1120 सभी ऐसे हैं। परंतु 117 और 214 किसी पूर्ण संख्या से दो अंक दूर हैं, अत: दो पदों में बाँटने पर b = 17 या b = 14 रह जाता और b² निकालना मूल प्रश्न जितना ही कठिन होता। सैकड़ा + दहाई + इकाई में बाँटने पर छहों भाग एक-अंकीय गुणा बन जाते हैं। आवश्यक पदों की संख्या शून्येतर अंकों की संख्या के बराबर होती है, इसीलिए तीन-अंकीय संख्या के लिए तीन पदों वाली सर्वसमिका स्वाभाविक है।
स्वयं जाँचिए: 1120² को (112 × 10)² = 112² × 100 = 12544 × 100 से भी किया जा सकता है। उत्तर वही है, और यह याद दिलाता है कि दस की घातें पहले बाहर निकाल लेने से बहुत श्रम बचता है।