कक्षा ९ गणित अध्याय 4 अंतिम प्रश्नावली के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
उपयुक्त सर्वसमिकाओं का उपयोग करके निम्नलिखित गुणनफल ज्ञात कीजिए — (i) (−3x + 4)²   (ii) (2s + 7) (2s − 7)   (iii) (p² + 1/2)(p² − 1/2)   (iv) (2n + 7) (2n − 7)   (v) (s − 2t) (s² + 2st + 4t²)   (vi) (1/2r − 4r)²   (vii) (−3m + 4k − l)²   (viii) (x − y/3)³   (ix) (7k/2 − 2m/3)³
उत्तर

(i) (−3x + 4)² — इसे (4 − 3x)² पढ़िए और (a − b)² लगाइए।

= 4² − 2(4)(3x) + (3x)² = 9x² − 24x + 16

(ii) (2s + 7)(2s − 7) — दो वर्गों का अंतर।

= (2s)² − 7² = 4s² − 49

(iii) (p² + 1/2)(p² − 1/2)

= (p²)² − (1/2)² = p⁴ − 1/4

(iv) (2n + 7)(2n − 7)

= (2n)² − 7² = 4n² − 49

(v) (s − 2t)(s² + 2st + 4t²) — यह x = s, y = 2t के साथ (x − y)(x² + xy + y²) है।

साथी कोष्ठक जाँचिए: x² = s², xy = s(2t) = 2st, y² = 4t² ✓
= s³ − (2t)³ = s³ − 8t³

(vi) (1/2r − 4r)² — a = 1/(2r), b = 4r लेने पर 2ab = 2 × (1/2r) × 4r = 4।

= (1/2r)² − 2(1/2r)(4r) + (4r)²
= 1/(4r²) − 4 + 16r²

(vii) (−3m + 4k − l)² — तीन चरों वाला वर्ग, a = −3m, b = 4k, c = −l।

= 9m² + 16k² + l² + 2(−3m)(4k) + 2(4k)(−l) + 2(−l)(−3m)
= 9m² + 16k² + l² − 24km − 8kl + 6lm

(viii) (x − y/3)³ — अंतर का घन, a = x, b = y/3।

= x³ − 3x²(y/3) + 3x(y/3)² − (y/3)³
= x³ − x²y + xy²/3 − y³/27

(ix) (7k/2 − 2m/3)³ — a = 7k/2, b = 2m/3।

a³ = 343k³/8
3a²b = 3 × (49k²/4) × (2m/3) = 49k²m/2
3ab² = 3 × (7k/2) × (4m²/9) = 14km²/3
b³ = 8m³/27

= 343k³/8 − 49k²m/2 + 14km²/3 − 8m³/27
संकेत: भाग (ii) और (iv) एक ही व्यंजक हैं, केवल चर का नाम भिन्न है। यह पहचान लेने से दूसरी गणना बच जाती है — सर्वसमिकाओं को इससे कोई मतलब नहीं कि अक्षरों के नाम क्या हैं।
प्र2.
उपयुक्त सर्वसमिकाओं का उपयोग करके मान ज्ञात कीजिए — (i) 17 × 21   (ii) 104 × 96   (iii) 24 × 16   (iv) 147³   (v) 199³   (vi) 127³   (vii) (−107)³   (viii) (−299)³
उत्तर

(i) 17 × 21 — दोनों 20 के पास हैं पर असमान दूरी पर, अत: x = 20 के साथ (x + a)(x + b) लीजिए।

= (20 − 3)(20 + 1) = 400 + (−3 + 1)(20) + (−3)(1)
= 400 − 40 − 3 = 357

(ii) 104 × 96 — 100 के दोनों ओर बराबर दूरी पर, अत: a² − b² लीजिए।

= (100 + 4)(100 − 4) = 10000 − 16 = 9984

(iii) 24 × 16 — 20 के दोनों ओर बराबर दूरी पर।

= (20 + 4)(20 − 4) = 400 − 16 = 384

(iv) 147³ = (150 − 3)³

= 150³ − 3(150)²(3) + 3(150)(3)² − 3³
= 3375000 − 202500 + 4050 − 27
= 3176523

(v) 199³ = (200 − 1)³

= 8000000 − 3(40000)(1) + 3(200)(1) − 1
= 8000000 − 120000 + 600 − 1 = 7880599

(vi) 127³ = (130 − 3)³

= 2197000 − 3(16900)(3) + 3(130)(9) − 27
= 2197000 − 152100 + 3510 − 27 = 2048383

(vii) (−107)³ = −107³ = −(100 + 7)³

107³ = 1000000 + 3(10000)(7) + 3(100)(49) + 343
= 1000000 + 210000 + 14700 + 343 = 1225043
अत: (−107)³ = −1225043

(viii) (−299)³ = −299³ = −(300 − 1)³

299³ = 27000000 − 3(90000)(1) + 3(300)(1) − 1
= 27000000 − 270000 + 900 − 1 = 26730899
अत: (−299)³ = −26730899
विषम घात चिह्न क्यों बनाए रखती है: (−a)³ = (−1)³a³ = −a³। ऋणात्मक संख्या का घन ऋणात्मक ही होता है, अत: पहले धनात्मक संख्या का घन निकालिए और अंत में ऋण चिह्न लगा दीजिए। सम घात चिह्न को सोख लेती है, जैसा ऊपर (−3x + 4)² में हुआ।
प्र3.
निम्नलिखित बीजीय व्यंजकों का गुणनखंड कीजिए — (i) 4y² + 1 + 1/(16y²)   (ii) 9m² − 1/(25n²)   (iii) 27b³ − 1/(64b³)   (iv) x² + 5x/6 + 1/6   (v) 27u³ − 1/125 − 27u²/5 + 9u/25   (vi) 64y³ + z³/125   (vii) p³ + 27q³ + r³ − 9pqr   (viii) 9m² − 12m + 4   (ix) 9x³ − (8/3)y³ + z³/3 + 6xyz   (x) 4x² + 9y² + 36z² + 12xy + 36yz + 24zx   (xi) 27u³ − 1/216 − 9u²/2 + u/4
उत्तर

(i) 4y² + 1 + 1/(16y²) — मध्य पद 1 ही संकेत है: 2 × 2y × 1/(4y) = 1।

= (2y)² + 2(2y)(1/4y) + (1/4y)² = (2y + 1/(4y))²

(ii) 9m² − 1/(25n²) — दो वर्गों का अंतर।

= (3m)² − (1/5n)² = (3m + 1/(5n))(3m − 1/(5n))

(iii) 27b³ − 1/(64b³) — दो घनों का अंतर, x = 3b, y = 1/(4b)।

= (3b)³ − (1/4b)³
= (3b − 1/(4b))(9b² + 3/4 + 1/(16b²))
(मध्य पद xy = 3b × 1/4b = 3/4 है)

(iv) x² + 5x/6 + 1/6 — a + b = 5/6 तथा ab = 1/6 चाहिए; लीजिए a = 1/2, b = 1/3।

= (x + 1/2)(x + 1/3)  — अथवा भिन्न हटाकर (2x + 1)(3x + 1)/6

(v) 27u³ − 27u²/5 + 9u/25 − 1/125 — एकांतर चिह्नों वाले चार पद: अंतर का घन।

a = 3u, b = 1/5:
a³ = 27u³,   3a²b = 3(9u²)(1/5) = 27u²/5,   3ab² = 3(3u)(1/25) = 9u/25,   b³ = 1/125 ✓
= (3u − 1/5)³

(vi) 64y³ + z³/125 — दो घनों का योग, x = 4y तथा दूसरा पद z/5।

= (4y)³ + (z/5)³
= (4y + z/5)(16y² − 4yz/5 + z²/25)

(vii) p³ + 27q³ + r³ − 9pqr — तीन घनों वाली सर्वसमिका, दूसरे चर के स्थान पर 3q।

= p³ + (3q)³ + r³ − 3(p)(3q)(r)
= (p + 3q + r)(p² + 9q² + r² − 3pq − 3qr − rp)

(viii) 9m² − 12m + 4

= (3m)² − 2(3m)(2) + 2² = (3m − 2)²

(ix) 9x³ − (8/3)y³ + z³/3 + 6xyz — गुणांक घन नहीं हैं, अत: पहले 1/3 बाहर निकालिए।

= (1/3)(27x³ − 8y³ + z³ + 18xyz)
= (1/3)[ (3x)³ + (−2y)³ + z³ − 3(3x)(−2y)(z) ]
= (1/3)(3x − 2y + z)(9x² + 4y² + z² + 6xy + 2yz − 3zx)

(x) 4x² + 9y² + 36z² + 12xy + 36yz + 24zx — तीनों वर्ग 2x, 3y तथा 6z की ओर संकेत करते हैं, और उनके मिश्रित पद 2(2x)(3y) = 12xy, 2(3y)(6z) = 36yz, 2(6z)(2x) = 24zx हैं।

= (2x)² + (3y)² + (6z)² + 2(2x)(3y) + 2(3y)(6z) + 2(6z)(2x)
= (2x + 3y + 6z)²
पाठ्यपुस्तक के दोनों संस्करणों पर टिप्पणी: हिंदी संस्करण में यह भाग “12xy + 36yz + 24zx” छपा है, जो सही है और जिसका गुणनखंडन ऊपर किया गया है। अंग्रेज़ी संस्करण में यही भाग “12xz + 36yz + 24xy” छपा है — वहाँ 12 और 24 गलत युग्मों के साथ जुड़ गए हैं और उस रूप में व्यंजक पूर्ण वर्ग नहीं रहता, न ही उसका कोई गुणनखंडन होता है।

(xi) 27u³ − 9u²/2 + u/4 − 1/216 — यह भी अंतर का घन है।

a = 3u, b = 1/6:
3a²b = 3(9u²)(1/6) = 9u²/2 ✓   3ab² = 3(3u)(1/36) = u/4 ✓   b³ = 1/216 ✓
= (3u − 1/6)³
वर्ग और घन में तुरंत भेद कैसे करें: पूर्ण वर्ग वाले त्रिपद में तीन पद होते हैं और बाहरी दो वर्ग होते हैं; पूर्ण घन के विस्तार में चार पद होते हैं, बाहरी दो घन होते हैं, और बीच के दो गुणांकों का अनुपात 3a²b : 3ab² = a : b होता है। (v) में 27u²/5 : 9u/25 = 15u : 1 है, और वास्तव में a : b = 3u : 1/5 = 15u : 1। ✓
प्र4.
निम्नलिखित को सरल कीजिए — (i) (4x² + 4x + 1)/(4x² − 1)   (ii) 9(3a³ − 24b³)/(9a² − 36b²)   (iii) (s³ + 125t³)/(s² − 2st − 35t²). संकेत — मान लीजिए कि ‘हर’ शून्य के समान नहीं है।
उत्तर

(i)

अंश = (2x)² + 2(2x)(1) + 1² = (2x + 1)²
हर = (2x)² − 1² = (2x + 1)(2x − 1)

= (2x + 1)² / [(2x + 1)(2x − 1)] = (2x + 1)/(2x − 1)

(ii) — पहले संख्यात्मक गुणनखंड बाहर लीजिए, फिर घनों के अंतर और वर्गों के अंतर का उपयोग कीजिए।

अंश = 9 × 3(a³ − 8b³) = 27(a − 2b)(a² + 2ab + 4b²)
हर = 9(a² − 4b²) = 9(a − 2b)(a + 2b)

= 27(a − 2b)(a² + 2ab + 4b²) / [9(a − 2b)(a + 2b)]
= 3(a² + 2ab + 4b²)/(a + 2b)

(iii)

अंश = s³ + (5t)³ = (s + 5t)(s² − 5st + 25t²)
हर = s² − 2st − 35t² = (s − 7t)(s + 5t)

= (s² − 5st + 25t²)/(s − 7t)
संकेत: (ii) में तुरंत 9 काटने का लोभ छोड़िए। पहले पूरा गुणनखंडन कीजिए — उपयोगी कटान (a − 2b) की है, जो 3(a³ − 8b³)/(a² − 4b²) पर रुक जाने से दिखाई ही नहीं देती।
प्र5.
निम्नलिखित व्यंजकों द्वारा आयतों के क्षेत्रफल वर्ग इकाई में दिए गए हैं। इन आयतों की लंबाई और चौड़ाई के संभावित व्यंजक ज्ञात कीजिए — (i) 25a² − 30ab + 9b²   (ii) 36s² − 49t²
उत्तर

क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई, अत: क्षेत्रफल के व्यंजक को दो गुणनखंडों में तोड़ने पर विमाओं का एक संभावित युग्म मिल जाता है।

(i) 25a² − 30ab + 9b²

= (5a)² − 2(5a)(3b) + (3b)² = (5a − 3b)²
लंबाई = (5a − 3b) इकाई,   चौड़ाई = (5a − 3b) इकाई

दोनों भुजाएँ बराबर हैं, अत: यह आयत वास्तव में एक वर्ग है।

(ii) 36s² − 49t²

= (6s)² − (7t)² = (6s + 7t)(6s − 7t)
लंबाई = (6s + 7t) इकाई,   चौड़ाई = (6s − 7t) इकाई
उत्तर में ‘संभावित’ क्यों कहा गया है: दिए गए क्षेत्रफल को अनेक प्रकार से तोड़ा जा सकता है — 2(3s + 3.5t)(6s − 7t) का गुणनफल भी वही है। प्रश्न सार्थक बीजीय व्यंजकों में गुणनखंडन चाहता है, और उसके लिए सर्वसमिकाएँ स्वाभाविक उत्तर देती हैं। (ii) में बड़े गुणनखंड को लंबाई मानना सामान्य परिपाटी है, क्योंकि t > 0 होने पर 6s + 7t > 6s − 7t होता है।
प्र6.
निम्नलिखित व्यंजकों द्वारा घनाभों के आयतन घन इकाई में दिए गए हैं। इन घनाभों की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई के संभावित व्यंजक ज्ञात कीजिए — (i) 6a² − 24b²   (ii) 3ps² − 15ps + 12p
उत्तर

आयतन = लंबाई × चौड़ाई × ऊँचाई, अत: प्रत्येक व्यंजक को तीन गुणनखंडों में तोड़िए।

(i) 6a² − 24b²

= 6(a² − 4b²)
= 6(a − 2b)(a + 2b)
लंबाई = 6 इकाई,   चौड़ाई = (a + 2b) इकाई,   ऊँचाई = (a − 2b) इकाई

(ii) 3ps² − 15ps + 12p

= 3p(s² − 5s + 4)
ऐसी दो संख्याएँ चाहिए जिनका योग −5 और गुणनफल 4 हो: वे हैं −1 और −4
= 3p(s − 1)(s − 4)
लंबाई = 3p इकाई,   चौड़ाई = (s − 1) इकाई,   ऊँचाई = (s − 4) इकाई
संकेत: सदैव सार्व संख्यात्मक अथवा चर गुणनखंड पहले बाहर निकालिए — (i) में वही एक पूरी विमा दे देता है और (ii) में 3p। शेष बचा द्विघात तो आप पहले ही बाँटना सीख चुके हैं।
प्र7.
गाँव के खेल का मैदान 40 मीटर भुजा वाले एक वर्ग के आकार का है। व्यक्तियों के चलने हेतु खेल के मैदान के चारों ओर s मीटर चौड़ाई का एक मार्ग निर्मित किया गया है। s के पदों में मार्ग के क्षेत्रफल का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
उत्तर

मार्ग दो वर्गों के बीच का क्षेत्र है: बाहरी वर्ग (मैदान + दोनों ओर का मार्ग) और स्वयं मैदान।

मैदान 40 × 40मार्ग, चौड़ाई s40 + 2s40s
40 मीटर भुजा वाला मैदान, जिसके चारों ओर s चौड़ाई का मार्ग है। बाहरी वर्ग की भुजा 40 + 2s है।
बाहरी वर्ग की भुजा = 40 + s + s = (40 + 2s) मी
बाहरी वर्ग का क्षेत्रफल = (40 + 2s)² = 40² + 2(40)(2s) + (2s)²
= 1600 + 160s + 4s²
मैदान का क्षेत्रफल = 40² = 1600

मार्ग का क्षेत्रफल = (1600 + 160s + 4s²) − 1600
= (4s² + 160s) मी²  =  4s(s + 40) मी²
भुजा में 2s क्यों जुड़ता है, केवल s क्यों नहीं: मार्ग चारों ओर घूमता है, अत: वह बाईं ओर s मीटर और दाईं ओर भी s मीटर जोड़ता है। ऊपर और नीचे भी यही होता है। दूसरा s भूल जाना ऐसे प्रश्नों की सबसे सामान्य भूल है।
स्वयं जाँचिए: s = 1 लीजिए। मार्ग 40 मीटर के वर्ग के चारों ओर 1 मीटर की पट्टी होगा: 40 × 1 की चार पट्टियाँ और 1 × 1 के चार कोने, अर्थात 160 + 4 = 164 मी²। सूत्र से 4(1) + 160(1) = 164 मी²। ✓ 4s² ठीक वही चार कोने हैं।
प्र8.
यदि किसी संख्या और उसके व्युत्क्रम का योग 10/3 हो तो वह संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर

मान लीजिए संख्या x है। तब उसका व्युत्क्रम 1/x है, और x ≠ 0।

x + 1/x = 10/3
पूरे समीकरण को 3x से गुणा कीजिए:
3x² + 3 = 10x
3x² − 10x + 3 = 0

मध्य पद बाँटिए: ऐसी दो संख्याएँ जिनका गुणनफल 3 × 3 = 9 और योग −10 हो, वे हैं −1 और −9।

3x² − 9x − x + 3 = 0
3x(x − 3) − 1(x − 3) = 0
(x − 3)(3x − 1) = 0
x = 3   अथवा   x = 1/3

दोनों उत्तर वास्तविक हैं, और वे एक-दूसरे के व्युत्क्रम हैं।

जाँच: 3 + 1/3 = 10/3 ✓    1/3 + 3 = 10/3 ✓
दो उत्तर क्यों आने ही थे: शर्त x + 1/x = 10/3, x और 1/x में कोई भेद नहीं करती — उन्हें आपस में बदल देने पर बायाँ पक्ष वही रहता है। अत: हल व्युत्क्रम-युग्मों में ही आने चाहिए, और यहाँ वह युग्म 3 तथा 1/3 है। ध्यान दीजिए कि उनका गुणनफल 1 है, जो अचर पद 3 में अग्र गुणांक 3 का भाग देने पर मिलता है।
प्र9.
एक आयताकार ताल का क्षेत्रफल 2x² + 7x + 3 वर्ग हस्त है। यदि इसकी चौड़ाई 2x + 1 हस्त है, तो इसकी लंबाई ज्ञात कीजिए। ‘हस्त’ लंबाई मापने की एक इकाई होती थी।
उत्तर

लंबाई = क्षेत्रफल ÷ चौड़ाई, अत: क्षेत्रफल का गुणनखंड कीजिए और देखिए कि कौन-सा गुणनखंड दी हुई चौड़ाई है।

2x² + 7x + 3
7x को ऐसी दो संख्याओं से बाँटिए जिनका गुणनफल 2 × 3 = 6 और योग 7 हो: वे हैं 1 और 6
= 2x² + x + 6x + 3
= x(2x + 1) + 3(2x + 1)
= (2x + 1)(x + 3)
चौड़ाई = (2x + 1) हस्त ⇒ लंबाई = (x + 3) हस्त
क्या आप जानते हैं? ‘हस्त’ (संस्कृत में ‘हाथ’) प्राचीन भारत की एक मानक लंबाई थी, जो कोहनी से मध्यमा अंगुली के सिरे तक नापी जाती थी — लगभग 45 सेंटीमीटर। शुल्बसूत्रों में वेदियों के क्षेत्रफल वर्ग हस्त में ही दिए गए हैं।
प्र10.
*यदि x − 2 और x − 1/2 दोनों px² + 5x + r के गुणनखंड हैं तो दर्शाइए कि p = r है।
उत्तर

यदि x − 2 गुणनखंड है तो व्यंजक का मान x = 2 पर शून्य होना चाहिए; इसी प्रकार x = 1/2 पर भी।

x = 2 पर:   p(2)² + 5(2) + r = 0 ⇒ 4p + r = −10  …(1)

x = 1/2 पर:   p(1/2)² + 5(1/2) + r = 0 ⇒ p/4 + r = −5/2
4 से गुणा कीजिए:   p + 4r = −10  …(2)

(1) में से (2) घटाइए:

(4p + r) − (p + 4r) = −10 − (−10)
3p − 3r = 0
p = r  ■

ये दोनों समीकरण मान भी बता देते हैं: (1) में r = p रखने पर 5p = −10, अर्थात p = r = −2 और व्यंजक −2x² + 5x − 2 = −(2x − 1)(x − 2) हो जाता है। दोनों दिए गए गुणनखंड स्पष्ट दिखाई देते हैं।

‘गुणनखंड’ का अर्थ ‘मूल’ क्यों है: यदि x − k गुणनखंड है तो px² + 5x + r = (x − k) × (कोई व्यंजक)। x = k रखने पर पहला कोष्ठक शून्य हो जाता है, अत: पूरा गुणनफल शून्य। यही गुणनखंड प्रमेय है, और यह गुणनखंडों की बात को दो साधारण समीकरणों में बदल देता है।
संकेत: ध्यान दीजिए कि सममिति ही सारा काम कर देती है। दोनों मूल, 2 और 1/2, एक-दूसरे के व्युत्क्रम हैं, और किसी द्विघात के मूलों का गुणनफल (अचर पद)/(अग्र गुणांक) = r/p होता है। व्युत्क्रम मूलों का गुणनफल 1 होता है, अत: r/p = 1 — एक ही पंक्ति में वही निष्कर्ष।
प्र11.
*यदि a + b + c = 5 और ab + bc + ca = 10 है तो सिद्ध कीजिए कि a³ + b³ + c³ − 3abc = − 25 होगा।
उत्तर

अनुभाग 4.7 वाली तीन घनों की सर्वसमिका लीजिए:

a³ + b³ + c³ − 3abc = (a + b + c)(a² + b² + c² − ab − bc − ca)

पहला कोष्ठक दिया हुआ है। दूसरे के लिए पहले योग के वर्ग से a² + b² + c² निकालिए:

(a + b + c)² = a² + b² + c² + 2(ab + bc + ca)
5² = a² + b² + c² + 2(10)
25 = a² + b² + c² + 20
a² + b² + c² = 5

अब दोनों मान रखिए:

a³ + b³ + c³ − 3abc = (5)(5 − 10)
= 5 × (−5)
= −25  ■
a, b, c के अलग-अलग मान क्यों नहीं चाहिए: सर्वसमिका उत्तर को पूरी तरह दो सममित राशियों a + b + c तथा ab + bc + ca के पदों में व्यक्त कर देती है, और दोनों दी हुई हैं। तीन चरों वाले सममित व्यंजक प्राय: इन्हीं आधारभूत राशियों से बनाए जा सकते हैं — यही सर्वसमिकाओं को इतना सशक्त बनाता है।
क्या आप जानते हैं? यहाँ की संख्याएँ असामान्य हैं: a² + b² + c² = 5 के साथ ab + bc + ca = 10 होने पर a, b, c वास्तविक संख्याएँ नहीं रह सकतीं। उपपत्ति को इससे कोई अंतर नहीं पड़ता — सर्वसमिका सभी मानों के लिए सत्य होती है, और हमने केवल दिए गए दोनों योगों का ही उपयोग किया है।
प्र12.
*व्यंजक के गुणनखंड द्वारा जाँच कीजिए कि सभी प्राकृत संख्याओं n के लिए n³ − n सदैव 6 से विभाज्य है। अपने उत्तर के लिए कारण भी बताइए।
उत्तर

पहले गुणनखंड कीजिए।

n³ − n = n(n² − 1)
= n(n − 1)(n + 1)
= (n − 1) · n · (n + 1)

अत: n³ − n तीन क्रमागत प्राकृत संख्याओं का गुणनफल है। अब विभाज्यता का तर्क दीजिए।

  • 2 से विभाज्य। किन्हीं दो क्रमागत पूर्णांकों में एक सम होता ही है, अत: तीन में भी अवश्य कोई सम होगा। इसलिए 2 इस गुणनफल को विभाजित करता है।
  • 3 से विभाज्य। कोई भी पूर्णांक 3 से भाग देने पर शेषफल 0, 1 अथवा 2 छोड़ता है। तीन क्रमागत पूर्णांकों में तीनों शेषफल ठीक एक-एक बार आते हैं, अत: उनमें से एक 3 का गुणज होगा। इसलिए 3 भी इस गुणनफल को विभाजित करता है।
  • अत: 6 से विभाज्य। गुणनफल 2 से भी विभाज्य है और 3 से भी, तथा 2 और 3 में 1 के अतिरिक्त कोई सार्व गुणनखंड नहीं है, इसलिए उनका गुणनफल 6 भी उसे विभाजित करता है।
n(n − 1)n(n + 1)n³ − n÷ 6
21 × 2 × 361
54 × 5 × 612020
109 × 10 × 11990165
‘2 से विभाज्य और 3 से विभाज्य’ से 6 क्यों निकलता है: इस चरण के लिए 2 और 3 का सह-अभाज्य होना आवश्यक है। यदि कोई संख्या 4 से भी विभाज्य हो और 6 से भी, तो यह नहीं कहा जा सकता कि वह 24 से विभाज्य है — 12 इसका प्रति-उदाहरण है। यहाँ म.स.(2, 3) = 1 है, अत: निष्कर्ष सुरक्षित है।
यह कीजिए: यही तर्क दिखाता है कि n⁵ − n सदैव 30 से विभाज्य है, क्योंकि n⁵ − n = (n − 1)n(n + 1)(n² + 1) और यह दिखाया जा सकता है कि 5 भी इसे सदैव विभाजित करता है।
प्र13.
*निम्न के मान ज्ञात कीजिए — (i) x³ + y³ − 12xy + 64, जब x + y = − 4   (ii) x³ − 8y³ − 36xy − 216, जब x = 2y + 6
उत्तर

दोनों भाग वस्तुत: सर्वसमिका x³ + y³ + z³ − 3xyz ही हैं, जिसमें तीसरा चर इस प्रकार चुना गया है कि पहला कोष्ठक शून्य हो जाए।

(i) x³ + y³ − 12xy + 64, जब x + y = −4

ध्यान दीजिए 64 = 4³ तथा 12xy = 3(x)(y)(4)। z = 4 लीजिए:
x³ + y³ + 4³ − 3(x)(y)(4) = x³ + y³ + 64 − 12xy ✓

= (x + y + 4)(x² + y² + 16 − xy − 4y − 4x)
दिया है x + y = −4, अत: पहला कोष्ठक (−4) + 4 = 0
मान = 0

(ii) x³ − 8y³ − 36xy − 216, जब x = 2y + 6

−8y³ = (−2y)³ तथा −216 = (−6)³ लिखिए। तब तीनों चर x, −2y, −6 लेने पर:
−3(x)(−2y)(−6) = −36xy ✓

x³ + (−2y)³ + (−6)³ − 3(x)(−2y)(−6)
= (x − 2y − 6)(x² + 4y² + 36 + 2xy − 12y + 6x)
दिया है x = 2y + 6, अत: पहला कोष्ठक (2y + 6) − 2y − 6 = 0
मान = 0
दोनों उत्तर शून्य क्यों हैं: सर्वसमिका कहती है कि व्यंजक (तीनों चरों का योग) × (दूसरा कोष्ठक) के बराबर है। प्रत्येक भाग में दी गई शर्त ठीक यही कहती है कि तीनों चरों का योग शून्य है। अत: पूरा गुणनफल समाप्त हो जाता है, चाहे दूसरा कोष्ठक कुछ भी हो — उसका मान निकालने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। आकार पहचान लेना ही पूरा प्रश्न है।
संकेत: इसके पीछे का व्यापक तथ्य स्मरण रखने योग्य है: यदि x + y + z = 0 हो तो x³ + y³ + z³ = 3xyz होता है। ऊपर के दोनों भाग इसी कथन के उल्टे रूप हैं।
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