कक्षा ९ गणित अध्याय 4 सोचिए और विचार कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
यदि (a + b)² < a² + b² है तो a और b के विषय में आप क्या कह सकते हैं?
उत्तर

सब कुछ एक ही पद तय करता है। घटाइए:

(a + b)² − (a² + b²) = (a² + 2ab + b²) − a² − b² = 2ab

अत: (a + b)² < a² + b² ठीक तभी होगा जब 2ab < 0 हो, अर्थात

ab < 0 — a और b के चिह्न विपरीत हों (एक धनात्मक, एक ऋणात्मक, कोई भी शून्य नहीं)

जाँच: a = 10, b = −2 लेने पर (a + b)² = 8² = 64 तथा a² + b² = 100 + 4 = 104, और वास्तव में 64 < 104 है।

ऐसा क्यों होता है: दोनों व्यंजकों में केवल मध्य पद 2ab का ही अंतर है, और कुछ नहीं। a² तथा b² कभी ऋणात्मक नहीं होते, इसलिए वे तुलना का निर्णय नहीं कर सकते — निर्णय केवल गुणनफल ab के चिह्न से होता है। पुस्तक का संकेत यही है: निर्णायक पद ढूँढ़ने के लिए विस्तार का उपयोग कीजिए।
प्र2.
यदि (a + b)² > a² + b² है तो a और b के विषय में आप क्या कह सकते हैं?
उत्तर

वही अंतर, विपरीत चिह्न।

(a + b)² − (a² + b²) = 2ab > 0 ⇒ ab > 0
⇒ a और b के चिह्न समान हों — दोनों धनात्मक अथवा दोनों ऋणात्मक

दोनों स्थितियाँ जाँचिए: a = 10, b = 2 से 144 > 104। तथा a = −2, b = −3 से (−5)² = 25 जबकि a² + b² = 4 + 9 = 13, अर्थात 25 > 13।

संकेत: पुस्तक के उदाहरण में दोनों संख्याएँ धनात्मक थीं, इसीलिए (a + b)² बड़ा निकला। दो ऋणात्मक संख्याओं के साथ भी यही होता है, क्योंकि उनका गुणनफल तब भी धनात्मक रहता है।
प्र3.
कब (a + b)² = a² + b² होगा?
उत्तर
(a + b)² = a² + b² ⇔ 2ab = 0 ⇔ ab = 0
a = 0 अथवा b = 0 (अथवा दोनों)

उदाहरण के लिए a = 7, b = 0: (7 + 0)² = 49 तथा 7² + 0² = 49।

ऐसा क्यों होता है: दो वास्तविक संख्याओं का गुणनफल शून्य तभी होता है जब उनमें से कम-से-कम एक शून्य हो — कोई तीसरी संभावना नहीं है। अत: (a + b)² = a² + b² एक सर्वसमिका नहीं है; यह एक साधारण समीकरण है जो केवल a = 0 तथा b = 0 पर सत्य होता है। यही अंतर यह अनुभाग स्पष्ट कर रहा है। (a + b)² = a² + 2ab + b² जैसी सर्वसमिका सर्वत्र सत्य है, जबकि (a + b)² = a² + b² जैसा समीकरण केवल विशेष मानों पर।
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