प्र1.
इस प्रकार के और अधिक प्रतिरूप खोजने का प्रयास कीजिए। उदाहरण के लिए, आप चार क्रमागत वर्ग लेकर देख सकते हैं कि क्या आप कोई प्रतिरूप ढूँढ़ पाते हैं।
उत्तर
चार क्रमागत वर्ग संख्याएँ लीजिए और बाहरी दो के योग में से भीतरी दो का योग घटाइए। उत्तर सदैव 4 आता है।
| चार क्रमागत वर्ग | (बाहरी योग) − (भीतरी योग) | परिणाम |
|---|---|---|
| 1, 4, 9, 16 | (1 + 16) − (4 + 9) = 17 − 13 | 4 |
| 4, 9, 16, 25 | (4 + 25) − (9 + 16) = 29 − 25 | 4 |
| 25, 36, 49, 64 | (25 + 64) − (36 + 49) = 89 − 85 | 4 |
अब इसे सिद्ध कीजिए। चार क्रमागत संख्याएँ (n − 1), n, (n + 1), (n + 2) के रूप में ली जा सकती हैं।
(n − 1)² + (n + 2)² − [ n² + (n + 1)² ]
= (n² − 2n + 1) + (n² + 4n + 4) − n² − (n² + 2n + 1)
= 2n² + 2n + 5 − 2n² − 2n − 1
= 4, चाहे n कोई भी हो
= (n² − 2n + 1) + (n² + 4n + 4) − n² − (n² + 2n + 1)
= 2n² + 2n + 5 − 2n² − 2n − 1
= 4, चाहे n कोई भी हो
n वाले सभी पद कट जाते हैं, इसलिए उत्तर इस बात पर निर्भर नहीं कर सकता कि आपने कौन-से चार वर्ग चुने।
ऐसा क्यों होता है: क्रमागत वर्गों के बीच का अंतर एक निश्चित दर से बढ़ता है। चूँकि (k + 1)² − k² = 2k + 1 है, इसलिए क्रमागत अंतर 2n − 1, 2n + 1, 2n + 3 हैं — प्रत्येक अपने पिछले से 2 अधिक। अध्याय का तीन वर्गों वाला प्रतिरूप यही स्थिर अंतर 2 है। चार वर्गों में आप अंतिम अंतर की तुलना पहले अंतर से करते हैं, और उनमें 2 के दो पग का फ़र्क है, अर्थात 4।
यह कीजिए: यही प्रयास घनों के साथ कीजिए। चार क्रमागत घन लेकर (चौथा − तीसरा) − 2(तीसरा − दूसरा) + (दूसरा − पहला) निकालिए। उत्तर सदैव 6 आएगा — और 6 = 3! होना संयोग नहीं है।