प्र1.
हमने देखा कि (x + 3) (x + 4) = x² + 7x + 12 है। साथ ही, (x + 6) (x + 7) = x² + 13x + 42 है। इस प्रतिरूप का व्यापकीकरण करके (x + a) (x + b) का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
उत्तर
देखिए कि 7 और 12 कहाँ से आए, तथा 13 और 42 कहाँ से:
| गुणनफल | x का गुणांक | अचर पद |
|---|---|---|
| (x + 3)(x + 4) | 7 = 3 + 4 | 12 = 3 × 4 |
| (x + 6)(x + 7) | 13 = 6 + 7 | 42 = 6 × 7 |
| (x + a)(x + b) | a + b | ab |
(x + a)(x + b) = x² + (a + b)x + ab
वितरण गुणधर्म से उपपत्ति:
(x + a)(x + b) = x(x + b) + a(x + b)
= x² + bx + ax + ab
= x² + (a + b)x + ab
= x² + bx + ax + ab
= x² + (a + b)x + ab
योग और गुणनफल दोनों क्यों आते हैं: गुणा करने पर चार पद बनते हैं। दोनों ‘मिश्रित’ पद bx और ax ही ऐसे हैं जिनमें x की एक घात है, अत: वे मिलकर (a + b)x बन जाते हैं; जिस पद में x है ही नहीं वह ab है। टाइल-चित्र में ये ही x-टाइलों की दो भुजाएँ तथा इकाई टाइलों का कोना हैं। सर्वसमिका वही कह रही है जो “आयत का क्षेत्रफल उसके भागों का योग है”।
संकेत: इसी सर्वसमिका को दाएँ से बाएँ पढ़िए तो यह गुणनखंडन का नियम बन जाती है: x² + px + q का गुणनखंड करने के लिए ऐसी दो संख्याएँ खोजिए जिनका योग p और गुणनफल q हो। अनुभाग 4.6 यही करता है।