कक्षा ९ गणित अध्याय 5 प्रश्नावली 5.1 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
ΔABC की रचना कीजिए, जिसमें AB = 5 सेंटीमीटर, ∠A = 70° और ∠B = 60° है। ΔABC के परिवृत्त की रचना कीजिए। क्या इस वृत्त का केंद्र त्रिभुज के अंदर या बाहर स्थित है?
उत्तर

केंद्र त्रिभुज के अंदर स्थित है।

रचना —

  1. AB = 5 सेंटीमीटर खींचिए।
  2. A पर AB से 70° का और B पर BA से 60° का कोण बनाती किरणें खींचिए। ये C पर मिलती हैं।
  3. AB और BC के लंब समद्विभाजक बनाइए। ये O पर मिलते हैं।
  4. केंद्र O और त्रिज्या OA लेकर वृत्त बनाइए। यह B और C से भी होकर जाएगा।
∠C = 180° − 70° − 60° = 50°
कोण 70°, 60°, 50° हैं — तीनों न्यूनकोण, अत: ΔABC एक न्यूनकोण त्रिभुज है।
न्यूनकोण त्रिभुज के लिए परिकेंद्र त्रिभुज के अंदर स्थित होता है।
स्वयं जाँचिए: OA, OB, OC मापिए — तीनों लगभग 3.3 सेंटीमीटर आने चाहिए। (ठीक-ठीक, R = AB / (2 sin C) = 5 / (2 sin 50°) ≈ 3.26 सेंटीमीटर।)
ऐसा क्यों होता है: परिकेंद्र O से भुजा AB पर बना कोण ∠AOB = 2∠C होता है। O त्रिभुज के अंदर तभी रहता है जब ये तीनों केंद्रीय कोण 2∠A, 2∠B, 2∠C 180° से कम हों — अर्थात त्रिभुज का प्रत्येक कोण 90° से कम हो।
प्र2.
ΔABC की रचना कीजिए, जिसमें AB = 5 सेंटीमीटर, ∠A = 100°, AC = 4 सेंटीमीटर है। ΔABC के परिवृत्त की रचना कीजिए। इस वृत्त का केंद्र त्रिभुज के अंदर या बाहर स्थित है?
उत्तर

केंद्र त्रिभुज के बाहर स्थित है — BC के उस ओर जहाँ A नहीं है।

रचना: AB = 5 सेंटीमीटर खींचिए; A पर AB से 100° का कोण बनाती किरण खींचकर उस पर AC = 4 सेंटीमीटर काटिए; BC मिलाइए। अब AB और AC के लंब समद्विभाजक बनाइए; वे त्रिभुज के बाहर O पर मिलते हैं। केंद्र O और त्रिज्या OA लेकर वृत्त बनाइए।

∠A = 100° > 90° ⇒ ΔABC एक अधिक कोण त्रिभुज है।
अधिक कोण त्रिभुज के लिए परिकेंद्र त्रिभुज के बाहर स्थित होता है,
अधिक कोण के सम्मुख भुजा के उस पार — यहाँ BC के पार।
स्वयं जाँचिए: BC ≈ 6.9 सेंटीमीटर और OA = OB = OC ≈ 3.5 सेंटीमीटर
(BC² = 5² + 4² − 2·5·4·cos 100° ≈ 47.9, अत: BC ≈ 6.92 सेंटीमीटर; R = BC / (2 sin 100°) ≈ 3.52 सेंटीमीटर।)
ऐसा क्यों होता है: BC पर बना केंद्रीय कोण 2∠A = 200° है, जो एक प्रतिवर्ती कोण है। अत: A, BC के लघु चाप पर स्थित है और केंद्र BC के दूसरी ओर, त्रिभुज से बाहर चला जाता है।
प्र3.
ΔABC की रचना कीजिए, जिसमें AB = 6 सेंटीमीटर, BC = 7 सेंटीमीटर, CA = 7 सेंटीमीटर है। ΔABC के परिवृत्त की रचना कीजिए। मान लीजिए, परिकेंद्र O है तो OA, OB और OC को मापिए।
उत्तर

OA = OB = OC ≈ 3.9 सेंटीमीटर। तीनों समान होने ही चाहिए — ये एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ हैं।

रचना: AB = 6 सेंटीमीटर खींचिए; केंद्र A और त्रिज्या 7 सेंटीमीटर तथा केंद्र B और त्रिज्या 7 सेंटीमीटर से चाप खींचकर C प्राप्त कीजिए। AB और BC के लंब समद्विभाजक बनाइए; वे O पर मिलते हैं। केंद्र O और त्रिज्या OA लेकर वृत्त बनाइए।

त्रिभुज समद्विबाहु है (CA = CB = 7 सेंटीमीटर), अत: यह AB के लंब समद्विभाजक के सापेक्ष सममित है।
C से AB पर ऊँचाई = √(7² − 3²) = √40 ≈ 6.32 सेंटीमीटर
क्षेत्रफल = ½ × 6 × 6.32 ≈ 18.97 वर्ग सेंटीमीटर
R = (abc) / (4 × क्षेत्रफल) = (6 × 7 × 7) / (4 × 18.97) = 294 / 75.9 ≈ 3.87 सेंटीमीटर
संकेत: यहाँ कोण लगभग 64.6°, 64.6° और 50.8° हैं — तीनों न्यूनकोण — अत: O त्रिभुज के अंदर AB के लंब समद्विभाजक पर, AB से लगभग 2.45 सेंटीमीटर ऊपर स्थित है।
OA = OB = OC क्यों: "परिकेंद्र" का अर्थ ही यही है। O, AB के लंब समद्विभाजक पर है (अत: OA = OB) और BC के लंब समद्विभाजक पर भी (अत: OB = OC)। दोनों बातें मिलकर तीनों को समान कर देती हैं — और इसीलिए एक ही वृत्त तीनों शीर्षों से होकर जा सकता है।
प्र4.
दो बिंदुओं A और B से होकर जाते हुए वृत्त की न्यूनतम संभावित त्रिज्या क्या है?
उत्तर

न्यूनतम संभावित त्रिज्या ½ AB है — दोनों बिंदुओं की दूरी की आधी।

AB ऐसे प्रत्येक वृत्त की जीवा है।
कोई जीवा व्यास से बड़ी नहीं हो सकती, अत: AB ≤ 2r, अर्थात r ≥ AB/2।
r = AB/2 वास्तव में प्राप्त भी होता है: AB का मध्यबिंदु M केंद्र लीजिए।
तब MA = MB = AB/2 है और केंद्र M, त्रिज्या AB/2 वाला वृत्त दोनों से होकर जाता है।
न्यूनतम त्रिज्या = AB/2, और उस वृत्त में AB एक व्यास है।
ऐसा क्यों होता है: केंद्र को AB के लंब समद्विभाजक पर ही होना है और A से उसकी दूरी √(h² + (AB/2)²) है, जहाँ h मध्यबिंदु से हटने की दूरी है। यह h = 0 पर न्यूनतम है। मध्यबिंदु से हटते ही त्रिज्या बढ़ने लगती है।
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