कक्षा ९ गणित अध्याय 5 सोचिए, रचना कीजिए और निष्कर्ष निकालिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
A, B और C तीन संरेखीय बिंदु हैं। क्या आप ऐसे एक बिंदु P का पता लगा सकते हैं जिसके लिए PA = PB = PC हो? आप AB और BC के लंब समद्विभाजकों के विषय में क्या कह सकते हैं? रचना कीजिए और जाँचिए। क्या आप प्रदर्शित कर सकते हैं कि तीन संरेखीय बिंदुओं A, B और C के लिए AB और BC के लंब समद्विभाजक समांतर हैं? क्या संरेखीय बिंदुओं से होकर जाता हुआ वृत्त संभव है? क्या आप एक ऐसी रेखा खींच सकते हैं, जो दिए गए वृत्त को तीन भिन्न बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है?
उत्तर

क्रमश: उत्तर — ऐसा कोई P नहीं है; दोनों लंब समद्विभाजक समांतर हैं; तीन संरेखीय बिंदुओं से कोई वृत्त नहीं जाता; और कोई रेखा वृत्त को तीन बिंदुओं पर नहीं काट सकती। चारों वस्तुत: एक ही तथ्य के चार रूप हैं।

लंब समद्विभाजक समांतर हैं। मान लीजिए A, B, C रेखा ℓ पर हैं, AB का मध्यबिंदु M और BC का मध्यबिंदु N है। AB का लंब समद्विभाजक M से होकर ℓ पर लंब रेखा है; BC का लंब समद्विभाजक N से होकर ℓ पर लंब रेखा है। एक ही रेखा पर लंब दो रेखाएँ समांतर होती हैं। चूँकि M ≠ N है (बिंदु भिन्न हैं), ये दो भिन्न समांतर रेखाएँ हैं और कभी नहीं मिलतीं।

PA = PB वाला P ⇒ P, AB के लंब समद्विभाजक पर
PB = PC वाला P ⇒ P, BC के लंब समद्विभाजक पर
ये दोनों रेखाएँ भिन्न व समांतर हैं ⇒ कोई उभयनिष्ठ बिंदु नहींऐसा कोई P नहीं
A B C AB का लं.स. BC का लं.स.
दोनों समद्विभाजक एक ही रेखा पर लंब हैं, अत: समांतर हैं और कभी नहीं मिलते — परिकेंद्र बनता ही नहीं।

संरेखीय बिंदुओं से वृत्त नहीं: वृत्त के लिए ऐसा केंद्र चाहिए जो तीनों से समदूरस्थ हो — अर्थात वही बिंदु P, जिसका अस्तित्व अभी असंभव सिद्ध हुआ।

रेखा वृत्त को तीन बिंदुओं पर नहीं काटती: यदि कोई रेखा वृत्त को तीन बिंदुओं पर काटती तो वे तीन बिंदु संरेखीय भी होते और संवृत्तीय भी — जो ऊपर की बात से असंभव है। कोई रेखा वृत्त को 0, 1 या अधिक से अधिक 2 बिंदुओं पर ही काटती है।

ऐसा क्यों होता है: दो बिंदुओं से तीन बिंदुओं तक जाने पर ही वृत्त अद्वितीय बनता है — किंतु तभी जब तीसरा बिंदु रेखा से हटकर हो। संरेखीयता ठीक वह अपकर्षित स्थिति है जहाँ तीसरा प्रतिबंध कुछ नया नहीं जोड़ता और पूरी रचना ढह जाती है।
प्र2.
दिए गए ΔABC के परिवृत्त की रचना की जाती है। क्या ΔABC के सर्वांगसम अन्य त्रिभुज हो सकते हैं, जिनका परिवृत्त ΔABC का परिवृत्त हो?
उत्तर

हाँ — अनंत त्रिभुज।

ऐसा क्यों होता है: वृत्त में केंद्र के सापेक्ष पूर्ण घूर्णन सममिति होती है। ΔABC को परिकेंद्र O के चारों ओर किसी भी कोण θ से घुमाइए। O से दूरियाँ नहीं बदलतीं, अत: तीनों प्रतिबिंब शीर्ष A′, B′, C′ उसी वृत्त पर रहते हैं और प्रत्येक भुजा की लंबाई भी अपरिवर्तित रहती है — अत: ΔA′B′C′ ≅ ΔABC और उसका परिवृत्त वही है। θ अनंत मान ले सकता है, अत: ऐसे अनंत त्रिभुज हैं।

एक दूसरा परिवार भी है: ΔABC को किसी भी व्यास के सापेक्ष परावर्तित कीजिए। वृत्त स्वयं पर आ जाता है और त्रिभुज उसी वृत्त में अंतर्निहित एक सर्वांगसम (दर्पण-प्रतिबिंब) त्रिभुज में बदल जाता है।

O
अंतर्निहित त्रिभुज को O के चारों ओर घुमाने पर उसी वृत्त में सर्वांगसम त्रिभुज मिलता है।
संकेत: प्रमेय 1 की अद्वितीयता उलटी दिशा में है। तीन बिंदु निश्चित कीजिए तो वृत्त अद्वितीय है। वृत्त निश्चित कीजिए तो उसमें अनंत सर्वांगसम त्रिभुज अंतर्निहित किए जा सकते हैं।
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