कक्षा ९ गणित अध्याय 5 प्रश्नावली 5.6 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
किसी वृत्त में जिसका केंद्र O है, केंद्रीय कोण AOB की माप 60° है। यदि वृत्त की त्रिज्या 12 सेंटीमीटर है तो जीवा AB की लंबाई क्या है?
उत्तर

AB = 12 सेंटीमीटर — जीवा त्रिज्या के बराबर है।

ΔOAB में: OA = OB = 12 सेंटीमीटर (त्रिज्याएँ) ⇒ त्रिभुज समद्विबाहु है
∠OAB = ∠OBA (समद्विबाहु त्रिभुज के आधार के कोण)
∠OAB + ∠OBA + 60° = 180°
2 ∠OAB = 120° ⇒ ∠OAB = ∠OBA = 60°

तीनों कोण 60° के हैं, अत: ΔOAB समबाहु है
∴ AB = OA = OB = 12 सेंटीमीटर
जीवा के सूत्र से जाँच: O से AB की दूरी d = 12 cos 30° = 6√3 है, अत: AB = 2√(144 − 108) = 2√36 = 12 सेंटीमीटर ✓
याद रखने योग्य: 60° का केंद्रीय कोण सदैव त्रिज्या के बराबर जीवा देता है। इसीलिए वृत्त के अंतर्गत बने समषट्भुज की भुजा त्रिज्या के बराबर होती है — 60° के छह भाग मिलकर 360° बना देते हैं।
प्र2.
मान लीजिए, एक वृत्त का केंद्र O है और वृत्त पर स्थित दो बिंदु A और B हैं। (i) क्या AB के एक ही ओर वृत्त पर स्थित दो बिंदु X, Y इस प्रकार हो सकते हैं कि ∠AXB, ∠AYB से भिन्न हो? (ii) क्या यह सत्य है कि यदि ∠AXB = ∠AYB हो तो बिंदु X व Y वृत्त पर एक ही ओर स्थित हैं? (iii) यदि ∠AXB = ∠AYB हो और X व Y वृत्त पर स्थित नहीं हैं तो क्या A, B और X से होकर जाने वाला वृत्त बिंदु Y से होकर जाएगा?
उत्तर

(i) नहीं। यदि X और Y दोनों वृत्त पर हैं और जीवा AB के एक ही ओर हैं तो वे एक ही चाप पर होंगे, अत: सदैव ∠AXB = ∠AYB।

X और Y दोनों एक ही चाप AB के बाहर हैं, अत: प्रमेय 9 से
∠AXB = ½ (उस चाप द्वारा O पर अंतरित कोण) = ∠AYB
कोई स्वतंत्रता शेष नहीं रहती — कोण बदल ही नहीं सकता।

(ii) नहीं, यह सदैव सत्य नहीं है। कोणों के समान होने से X और Y का AB के एक ही ओर होना आवश्यक नहीं है।

यदि X दीर्घ चाप पर हो और Y लघु चाप पर, तो AXBY एक चक्रीय चतुर्भुज है, अत:
∠AXB + ∠AYB = 180° (प्रमेय 11)
ये दोनों समान तभी होंगे जब प्रत्येक 90° हो, अर्थात जब AB एक व्यास हो

प्रत्युदाहरण: मान लीजिए AB एक व्यास है। X को AB के ऊपर और Y को नीचे लीजिए।
∠AXB = ∠AYB = 90° (अर्धवृत्त का कोण), फिर भी X और Y विपरीत ओर हैं।

अत: सही कथन यह है — यदि ∠AXB = ∠AYB हो और AB व्यास हो तो X और Y एक ही ओर होंगे; यदि AB व्यास हो तो यह आवश्यक नहीं।

(iii) हाँ, बशर्ते X और Y रेखा AB के एक ही ओर स्थित हों। यही तो प्रमेय 10 है।

A, B, X असंरेखीय हैं ⇒ इनसे होकर एक वृत्त जाता है (प्रमेय 1)
∠AXB = ∠AYB है और X, Y, AB के एक ही ओर हैं
⇒ प्रमेय 10 से A, B, X, Y संवृत्तीय हैं
A, B, X से होकर जाने वाला वृत्त Y से भी होकर जाएगा
"एक ही ओर" वाली शर्त क्यों नहीं हटाई जा सकती: Y को रेखा AB के सापेक्ष परावर्तित करके Y′ लीजिए। तब ∠AY′B = ∠AYB होगा, किंतु Y′ प्राय: A और B से होकर जाने वाले किसी अन्य वृत्त पर होगा। प्रमेय 10 की उपपत्ति "Y अंदर" और "Y बाहर" — दोनों स्थितियों को बाह्य कोण प्रमेय से काटती है, और उस तर्क के लिए Y का X वाली ही ओर होना आवश्यक है।
प्र3.
चित्र 5.26 में x ज्ञात कीजिए।
उत्तर

x = 80°।

चित्र 5.26 में चारों बिंदु A, D, C, B एक वृत्त पर स्थित हैं, अत: ADCB एक चक्रीय चतुर्भुज है। 100° का कोण D पर और x का कोण B पर अंकित है, और D तथा B सम्मुख शीर्ष हैं।

प्रमेय 11 के अनुसार चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योगफल 180° होता है —
∠ADC + ∠ABC = 180°
100° + x = 180°
x = 180° − 100° = 80°
A D C B 100° x
ADCB चक्रीय है, अत: सम्मुख शीर्षों D और B पर बने कोणों का योग 180° होगा।
सम्मुख कोणों का योग 180° क्यों: ∠ADC चाप ABC पर खड़ा है और ∠ABC चाप ADC पर। ये दोनों चाप मिलकर पूरा वृत्त बनाते हैं, अत: दोनों केंद्रीय कोणों का योग 360° है। प्रत्येक अंतरित कोण अपने केंद्रीय कोण का आधा है, अत: दोनों का योग ½ × 360° = 180° होगा।
स्वयं जाँचिए: दूसरे युग्म का योग भी 180° होना चाहिए। अत: यहाँ ∠DAB + ∠DCB = 180° भी होगा, चाहे उनके अलग-अलग मान कुछ भी हों।
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