प्र1.
गतिविधि — एक वृत्ताकार कागज लीजिए। किनारे की ओर से कागज को अंदर की ओर मोड़िए। अब इस मोड़ को खोल दीजिए। कागज पर बना मोड़ अब एक जीवा के समान है (चित्र 5.13 (ख) देखिए)। अब कागज को पुन: इस प्रकार मोड़िए कि जीवा के अंत्य बिंदु आपस में मिलें। अब इस मोड़ को खोल दीजिए (चित्र 5.13 (ग) देखिए)। इन भागों की दूरियाँ मापिए। दोनों मोड़ के चिह्नों के मध्य कोण मापिए। वृत्त के केंद्र से जीवा के मध्यबिंदु के मध्य की दूरी मापिए।
उत्तर
इस मोड़ने की क्रिया से तीन बातें निकलती हैं और तीनों इसी अध्याय की प्रमेय हैं, केवल कागज के रूप में।
- जीवा के दोनों भाग समान हैं। दूसरा मोड़ जीवा के अंत्य बिंदुओं को आपस में मिला देता है, अत: वह चिह्न जीवा का लंब समद्विभाजक है — वह जीवा को उसके मध्यबिंदु पर ठीक आधा-आधा काटता है।
- दोनों मोड़ के चिह्नों के बीच का कोण 90° है। दूसरे चिह्न पर मोड़ने से जीवा अपने ही ऊपर आ जाती है; यह तभी संभव है जब वह चिह्न जीवा से समकोण बनाए।
- दूसरा चिह्न केंद्र से होकर जाता है, और केंद्र से जीवा के मध्यबिंदु तक की दूरी ही केंद्र से जीवा की दूरी है। दूसरा मोड़ वृत्त के किनारे को अपने ऊपर लाता है, अत: वह चिह्न एक व्यास है और केंद्र से होकर जाता है। "बिंदु से रेखा की दूरी" का अर्थ सदैव लंबवत दूरी होता है, और यहाँ वह लंब ठीक केंद्र से मध्यबिंदु तक का रेखाखंड है।
पहला चिह्न = जीवा AB दूसरा चिह्न = AB का लंब समद्विभाजक
दूसरा चिह्न केंद्र O से होकर जाता है और AB को M पर मिलता है
AM = MB, ∠OMA = ∠OMB = 90°, और OM = O से जीवा की दूरी
दूसरा चिह्न केंद्र O से होकर जाता है और AB को M पर मिलता है
AM = MB, ∠OMA = ∠OMB = 90°, और OM = O से जीवा की दूरी
कागज को यह कैसे पता चलता है: मोड़ना परावर्तन है। दूसरा मोड़ वह परावर्तन है जो A और B को आपस में बदल देता है और वृत्त को स्वयं पर लाता है। जो परावर्तन वृत्त को स्वयं पर लाता है वह केंद्र को अपने स्थान पर ही रखता है, अत: चिह्न O से होकर जाएगा; और जो परावर्तन A व B को बदलता है वह AB का लंब समद्विभाजक ही होगा। ये दोनों कथन मिलकर प्रमेय 4 और 5 हैं।