कक्षा ९ गणित अध्याय 5 सोचिए और विचार कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-08

प्र1.
एक वर्ग में घूर्णन सममिति कौन कौन-सी हैं? इसमें परावर्तन सममिति की कितनी रेखाएँ हैं? एक सम पंचभुज और एक समषट्भुज में घूर्णन सममिति और परावर्तन सममिति की कितनी रेखाएँ होती हैं?
उत्तर

n भुजाओं वाले किसी भी सम बहुभुज में घूर्णन सममिति की कोटि n होती है और परावर्तन सममिति की ठीक n रेखाएँ होती हैं।

वर्ग (n = 4): 90°, 180°, 270°, 360° के घूर्णन — कोटि 4; सममिति की 4 रेखाएँ (2 विकर्ण, 2 सम्मुख भुजाओं के मध्यबिंदुओं से होकर)।
सम पंचभुज (n = 5): 72°, 144°, 216°, 288°, 360° के घूर्णन — कोटि 5; सममिति की 5 रेखाएँ (प्रत्येक शीर्ष से सम्मुख भुजा के मध्यबिंदु तक)।
समषट्भुज (n = 6): 60°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360° के घूर्णन — कोटि 6; सममिति की 6 रेखाएँ (3 बड़े विकर्ण, 3 सम्मुख भुजाओं के मध्यबिंदुओं से होकर)।
ऐसा क्यों होता है: सम n-भुज के शीर्ष एक वृत्त पर 360°/n के अंतराल पर स्थित होते हैं। 360°/n से घुमाने पर प्रत्येक शीर्ष अगले शीर्ष के स्थान पर आ जाता है, अत: आकृति अपरिवर्तित रहती है। ऐसा n बार करने पर हम आरंभिक स्थिति पर लौट आते हैं — इसीलिए ठीक n घूर्णन ही संभव हैं।
क्या आप जानते हैं? n बढ़ने पर बहुभुज वृत्त जैसा दिखने लगता है और उसकी सममितियाँ बढ़ती जाती हैं। वृत्त इसकी चरम स्थिति है — इसमें प्रत्येक कोण घूर्णन सममिति है और परावर्तन सममिति की अनंत रेखाएँ हैं, प्रत्येक व्यास के लिए एक।
प्र2.
5 इकाई त्रिज्या वाले वृत्त में सबसे लंबी जीवा की लंबाई कितनी है? क्या इस वृत्त में कोई सबसे छोटी जीवा है?
उत्तर

सबसे लंबी जीवा व्यास होती है।

सबसे लंबी जीवा = 2 × त्रिज्या = 2 × 5 = 10 इकाई

क्या सबसे छोटी जीवा है? नहीं। न्यूनतम लंबाई वाली कोई जीवा नहीं है।

ऐसा क्यों होता है: केंद्र से d दूरी पर स्थित जीवा की लंबाई 2√(25 − d²) होती है, जहाँ d का मान 0 ≤ d < 5 में कुछ भी हो सकता है। जैसे-जैसे d 5 के निकट पहुँचता है, जीवा छोटी होती जाती है — 2√(25 − 24) = 2, फिर 2√(25 − 24.99) = 0.2, और इसी प्रकार — किंतु वह कभी शून्य नहीं होती, क्योंकि d = 5 पर रेखा वृत्त को केवल एक बिंदु पर छूती है और तब वह जीवा रह ही नहीं जाती। अत: जीवा जितनी चाहें उतनी छोटी बनाई जा सकती है, पर सबसे छोटी कोई नहीं है।
संकेत: "सबसे लंबी" इसलिए है क्योंकि d = 0 संभव है; "सबसे छोटी" इसलिए नहीं है क्योंकि d = 5 संभव नहीं है।
प्र3.
किसी दिए गए बिंदु से समदूरस्थ बिंदुओं का बिंदुपथ वृत्त कहलाता है। दिए गए किन्हीं दो बिंदुओं से समदूरस्थ बिंदुओं के बिंदुपथ के विषय में हम क्या कह सकते हैं? (संकेत— हम जानते हैं कि किन्हीं दो दिए गए बिंदुओं A और B से समदूरस्थ कोई भी बिंदु, AB के लंब समद्विभाजक पर स्थित होता है। क्या इस कारण से रेखाखंड का लंब समद्विभाजक ही यह बिंदुपथ हो जाएगा? इसके लिए हमें यह सिद्ध करना होगा कि लंब समद्विभाजक पर स्थित सभी बिंदु, A व B से समदूरस्थ हैं।)
उत्तर

दो दिए गए बिंदुओं A और B से समदूरस्थ बिंदुओं का बिंदुपथ AB का लंब समद्विभाजक है।

किसी भी बिंदुपथ के दावे में दो बातें सिद्ध करनी पड़ती हैं, एक नहीं —

  1. बिंदुपथ का प्रत्येक बिंदु उस रेखा पर है। मान लीजिए P ऐसा है कि PA = PB, और M रेखाखंड AB का मध्यबिंदु है। ΔPMA और ΔPMB में — PA = PB, AM = BM, PM उभयनिष्ठ। SSS द्वारा ΔPMA ≅ ΔPMB, अत: ∠PMA = ∠PMB। ये रेखीय युग्म हैं, अत: दोनों 90° के होंगे। इस प्रकार PM ⊥ AB है और मध्यबिंदु से होकर जाता है — अर्थात P लंब समद्विभाजक पर स्थित है।
  2. उस रेखा का प्रत्येक बिंदु बिंदुपथ में है। मान लीजिए Q लंब समद्विभाजक पर कोई बिंदु है, जो AB को मध्यबिंदु M पर मिलता है। ΔQMA और ΔQMB में — QM उभयनिष्ठ, ∠QMA = ∠QMB = 90°, AM = BM। SAS द्वारा ΔQMA ≅ ΔQMB, अत: QA = QB।
P, A और B से समदूरस्थ है P, AB के लंब समद्विभाजक पर स्थित है
अत: बिंदुपथ ठीक AB का लंब समद्विभाजक है।
दोनों भाग क्यों आवश्यक हैं: केवल भाग 1 से बिंदुपथ रेखा का कोई अंश भी हो सकता था; केवल भाग 2 से रेखा के बाहर भी बिंदु हो सकते थे। दोनों मिलकर ही बिंदुपथ को ठीक-ठीक निर्धारित करते हैं। अध्याय इसी परिणाम का तुरंत उपयोग करता है — A और B से होकर जाने वाले सभी वृत्तों के केंद्र ठीक इसी रेखा के बिंदु हैं।
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